कबड्डी एशियन गेम्स 2026: भारत ने ईरान को 40-34 से हराया, कप्तान सुनील कुमार ने जीता नौवां गोल्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को आइची में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में ईरान को 40-34 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह भारत का पुरुष कबड्डी में नौवाँ एशियाई खेल स्वर्ण पदक है, जिसने महाद्वीपीय चैंपियन के रूप में देश का वर्चस्व एक बार फिर सिद्ध किया। खिताबी जीत के बाद टीम के कप्तान सुनील कुमार ने कहा कि एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने का उनका सपना आखिरकार पूरा हो गया।
मुख्य घटनाक्रम
भारत और ईरान के बीच खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया और 40-34 के स्कोर के साथ मैच अपने पक्ष में समेट लिया। यह जीत केवल एक मैच की नहीं, बल्कि आठ महीनों की कठिन तैयारी और अनुशासित प्रशिक्षण का परिणाम थी। गौरतलब है कि यह अभियान एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (AKFI) और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की देखरेख में चला।
कप्तान सुनील कुमार की प्रतिक्रिया
कप्तान सुनील कुमार ने जीत के बाद अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'मैंने गोल्ड मेडल जीता है। मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। पिछले आठ महीनों से AKFI और SAI ने हमारा कैंप शुरू किया था। उन्होंने बहुत मेहनत की थी। उन्हें भरोसा था, क्योंकि AKFI ने हमें बहुत अच्छी टीम दी थी।'
उन्होंने यह स्वर्ण पदक अपने गुरु और कोच भूपेंद्र मलिक तथा बड़े भाई विजेंद्र मलिक को समर्पित किया। सुनील ने कहा, 'गुरुजी भूपेंद्र मलिक और बड़े भाई विजेंद्र मलिक को यह मेडल समर्पित करता हूँ, क्योंकि उन्होंने बचपन से ही मेरा साथ दिया है। वे अभी भी मेरे साथ हैं।'
फैंस और आस्था को समर्पण
कप्तान ने उन लाखों भारतीय प्रशंसकों को भी विशेष रूप से याद किया जिन्होंने इस पूरे अभियान के दौरान टीम के लिए दुआएं कीं। उन्होंने कहा, 'मैं इसे उन सभी भारतीय फैंस को समर्पित करता हूँ, जिन्होंने हमारे लिए प्रार्थना की और मंदिर गए।' कोचिंग स्टाफ की भूमिका की सराहना करते हुए सुनील ने बताया कि कोच हमेशा 'जय हनुमान' कहकर टीम का हौसला बढ़ाते थे — और इस बार हनुमान जी की कृपा साथ रही।
ओलंपिक में कबड्डी की माँग
स्वर्ण पदक की खुशी के बीच कप्तान सुनील कुमार ने कबड्डी को ओलंपिक में शामिल किए जाने की माँग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि कबड्डी को ओलंपिक में शामिल किया जाए, क्योंकि यह बहुत दिलचस्प खेल है। अब कई देशों ने इसे खेलना शुरू कर दिया है।' यह ऐसे समय में आया है जब कबड्डी की वैश्विक पहुँच लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए देश इस खेल को अपना रहे हैं।
क्या होगा आगे
इस जीत के साथ भारत ने एशियाई खेलों में पुरुष कबड्डी में अपना निर्विवाद दबदबा बरकरार रखा है। AKFI और SAI के सहयोग से मिली यह सफलता भविष्य में कबड्डी की ओलंपिक दावेदारी को और मज़बूती दे सकती है। अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर कबड्डी की पहचान को और व्यापक बनाना होगा।