एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर जीता गोल्ड, राज रानी बोलीं- सुविधाएं मिलें तो मेडल मिलते हैं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल मुकाबले में ईरान को 37-34 के स्कोर से पराजित कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद टीम की स्टार खिलाड़ी राज रानी ने कहा कि जब एथलीटों को सही सुविधाएं और प्रशिक्षण का पूरा माहौल मिलता है, तब ही मेडल की राह खुलती है।
फाइनल मुकाबला और जीत का सफर
भारतीय टीम ने इस फाइनल में ईरान को कड़ी टक्कर देते हुए 37-34 के अंतर से जीत दर्ज की। गोल्ड मेडलिस्ट राज रानी ने कहा, 'यह कड़ी मेहनत का नतीजा था, क्योंकि हम लगातार कोशिश कर रहे थे, और हमारी फेडरेशन चार-पांच महीने से लगातार ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर रही थी। कड़ी मेहनत के बाद नतीजा तो मिलता ही है।'
राज रानी ने आगे जोड़ा, 'प्रत्येक खिलाड़ी को सही सुविधाओं की जरूरत होती है, और जब सुविधाएं मिलती हैं, तो मेडल भी मिलते हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि प्रतियोगिता के दौरान दूसरे देशों की टीमें भी उच्च स्तर पर खेल रही थीं।
टीम एकता रही सबसे बड़ी ताकत
राज रानी ने टीम की एकता को जीत का सबसे अहम कारण बताया। उनके अनुसार, 'हमारी फेडरेशन ने एक बेहतरीन टीम बनाई, और सबसे बड़ी बात थी एकता। अगर टीम में एकता हो, तभी कुछ हासिल किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जो भी खिलाड़ी निराश महसूस करती, टीम उसे हिम्मत और हौसला देती थी।
गौरतलब है कि भारतीय कबड्डी फेडरेशन के लगातार आयोजित ट्रेनिंग कैंपों ने टीम को मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर तैयार किया, जो अंततः फाइनल में निर्णायक साबित हुआ।
मेडल सेरेमनी का भावुक पल
टीम की खिलाड़ी सोनाली विष्णु शिंगटे ने मेडल सेरेमनी के अनुभव को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा, 'जब हम जीते, तो वह पल और खासकर मेडल सेरेमनी हर खिलाड़ी के लिए एक यादगार पल बन गया। देश का प्रतिनिधित्व करते हुए मेडल लेने जाना, अपने राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा लहराते देखना और गोल्ड मेडल जीतने पर राष्ट्रगान बजते हुए सुनना, यह पल हर खिलाड़ी के रोंगटे खड़े कर देता है।'
सोनाली ने कहा कि ऐसे पल हर किसी को नसीब नहीं होते, और इस अनुभव ने पूरी टीम को भावनाओं से भर दिया।
कोच और आर्थिक संघर्ष से निकली खिलाड़ी की कहानी
सोनाली विष्णु शिंगटे ने अपने खेल सफर के बारे में बताया कि उनके कोच राजेश सर ने उन्हें बिल्कुल शुरुआती स्तर से तैयार किया। उन्होंने कहा, 'जब मुझे कबड्डी खेलना भी नहीं आता था, तब उन्होंने मुझे सब कुछ सिखाया।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में खेल अवसंरचना और आर्थिक सहयोग को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
सोनाली ने यह भी बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति शुरुआत में अच्छी नहीं थी, जिसके चलते राजेश सर ने उन्हें शॉर्ट्स, किट और जूतों तक की व्यवस्था करवाई। यह कहानी इस बात की मिसाल है कि सही मार्गदर्शन और समर्थन मिले तो प्रतिभा कहीं से भी उभर सकती है। आगे इस जीत से भारतीय कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती मिलने की उम्मीद है।