एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला कबड्डी टीम का गोल्ड, सोनाली शिंगटे ने इंजरी और 8 साल के इंतजार को किया खत्म
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में शनिवार, 26 सितंबर को ईरान को 37-34 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ भारत की मेडल टैली में एक और गोल्ड जुड़ गया। टीम की वरिष्ठ खिलाड़ी सोनाली विष्णु शिंगटे के लिए यह क्षण विशेष रूप से भावनात्मक था — 2023 के एशियन गेम्स से ठीक 10 दिन पहले लगी चोट के कारण उन्हें उस टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा था।
मुख्य घटनाक्रम
फाइनल मुकाबले में भारत ने ईरान के खिलाफ 37-34 का कड़ा स्कोर दर्ज करते हुए खिताब अपने नाम किया। यह जीत भारतीय महिला कबड्डी के लिए एशियन गेम्स मंच पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। गौरतलब है कि 2018 में भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था, जबकि 2023 के एशियन गेम्स में सोनाली चोट के चलते टीम का हिस्सा नहीं बन सकी थीं।
सोनाली शिंगटे की संघर्षगाथा
सोनाली विष्णु शिंगटे ने इस गोल्ड मेडल तक पहुँचने की अपनी कठिन राह का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2023 के एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले उन्हें गंभीर चोट लगी, जिसके बाद सर्जरी करवानी पड़ी। सर्जरी के बाद उन्होंने रिहैब और रिकवरी की लंबी प्रक्रिया से गुज़रते हुए खेल में वापसी की।
उन्होंने कहा, 'एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना हमारा लक्ष्य था। मैंने इतने साल खेला है। 2018 में हमने सिल्वर जीता था, लेकिन 2023 में चोटिल हो गई थी। मुझे पहले से ही लग रहा था कि इस बार हमारा गोल्ड मेडल आएगा।' उन्होंने यह पदक अपने परिवार — माँ, भाई और भाभी — को समर्पित किया, जिन्होंने उनकी तैयारी में अटूट साथ दिया।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव का लंबा अभाव
सोनाली ने बताया कि 2019 के सैफ गेम्स के बाद टीम को अंतरराष्ट्रीय टूर का अवसर नहीं मिला था। एशियन गेम्स 2022 के रूप में निर्धारित प्रतियोगिता भी स्थानांतरित होकर 2023 में हुई, लेकिन चोट ने उन्हें उसमें भी भाग नहीं लेने दिया। इस तरह 2019 से 2026 के बीच करीब 8 साल का लंबा इंतजार उनके लिए गोल्ड के साथ पूरा हुआ।
सरकार और फेडरेशन का सहयोग
सोनाली ने सरकार और एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि फेडरेशन ने प्रशिक्षण शिविरों में खिलाड़ियों को सप्लीमेंट, विशेष आहार, वर्कआउट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और फिटनेस की व्यापक सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। इस समर्थन को उन्होंने टीम की सफलता का अहम हिस्सा बताया।
महिला प्रो कबड्डी लीग की माँग
स्वर्ण पदक जीत के उत्साह के बीच सोनाली ने एक ज़रूरी सवाल भी उठाया — जिस तरह पुरुषों के लिए प्रो कबड्डी लीग (PKL) आयोजित होती है, उसी तर्ज पर महिलाओं के लिए भी ऐसी लीग होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है पुरुषों की प्रो कबड्डी लीग की तरह महिलाओं के लिए भी इस प्रतियोगिता का आयोजन होना चाहिए।' यह माँग महिला कबड्डी को पेशेवर मंच दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आवाज़ है। आने वाले समय में इस पर नीति-निर्माताओं और फेडरेशन की प्रतिक्रिया पर नज़रें रहेंगी।