एशियन गेम्स 2026: आयुष शेट्टी तीसरे राउंड में बाहर, उन्नति हुड्डा और त्रिशा-गायत्री जोड़ी ने रखी उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय बैडमिंटन का मिला-जुला दिन रहा — आयुष शेट्टी मेंस सिंगल्स के तीसरे राउंड में बाहर हो गए, जबकि उन्नति हुड्डा और त्रिशा जॉली/गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने इचिनोमिया सिटी में शनिवार को भारतीय उम्मीदें जीवित रखीं। शेट्टी को चीनी ताइपे के टिएन-चेन चाउ ने 16-21, 21-19, 17-21 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया।
आयुष शेट्टी का सफर
वर्ल्ड रैंकिंग में 20वें नंबर पर काबिज आयुष शेट्टी ने दूसरे राउंड में कजाकिस्तान के मखसुत ताजीबुल्लायेव को महज 21 मिनट में 21-7, 21-7 से रौंदा था। उस मैच में शेट्टी ने शुरू से ही अपना वर्चस्व कायम किया और प्रतिद्वंद्वी को खेल में टिकने का मौका नहीं दिया।
तीसरे राउंड में चाउ के खिलाफ पहला गेम 16-21 से गँवाने के बाद शेट्टी ने जबरदस्त वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-19 से जीता, लेकिन निर्णायक तीसरे गेम में 17-21 से हारकर स्पर्धा से बाहर हो गए। यह एशियन गेम्स में भारतीय मेंस सिंगल्स के लिए निराशाजनक खबर है।
उन्नति हुड्डा की संघर्षपूर्ण जीत
विमेंस सिंगल्स में वर्ल्ड रैंकिंग 25 पर काबिज उन्नति हुड्डा ने 79 मिनट के लंबे संघर्ष में मलेशिया की वोंग लिंग चिंग (रैंकिंग 38) को 21-14, 20-22, 21-19 से हराकर राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। उन्नति ने पहला गेम दमदार अंदाज में जीता, लेकिन दूसरे गेम में वोंग ने 22-20 से बढ़त बनाते हुए मुकाबला बराबर कर दिया।
निर्णायक तीसरे गेम में उन्नति ने 20-18 पर दो मैच प्वाइंट हासिल किए। वोंग ने पहला बचाया, लेकिन दूसरे पर उनका क्रॉस-कोर्ट शॉट बाहर चला गया और उन्नति ने मैच अपने नाम कर लिया। गौरतलब है कि एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर इस तरह के दबाव भरे मैच जीतना उन्नति की मानसिक मजबूती को दर्शाता है।
त्रिशा-गायत्री ने रचा इतिहास की ओर कदम
त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने विमेंस डबल्स में जापान की दिग्गज जोड़ी मायु मात्सुमोतो/युकी फुकुशिमा को 24-22, 21-18 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की की। यह जीत इसलिए और खास है क्योंकि यह जोड़ी एशियन गेम्स में भारत की पहली विमेंस डबल्स मेडलिस्ट बनने की दहलीज पर खड़ी है।
क्वार्टर फाइनल में उनका सामना मलेशिया की पर्ली कोंग ले टैन और थिनाह मुरलीधरन से होगा। इस मुकाबले में जीत उन्हें सेमीफाइनल में पहुँचा देगी, जिससे कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो जाएगा।
पीवी सिंधु भी दौड़ में
दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु पहले ही विमेंस सिंगल्स के राउंड ऑफ 16 में अपनी जगह बना चुकी हैं। उन्होंने चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियन को 21-19 और 21-14 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की थी। सिंधु के अनुभव और फॉर्म को देखते हुए भारत मेडल के लिए उनसे भी उम्मीद लगाए बैठा है।
यह ऐसे समय में आया है जब एशियन गेम्स में भारतीय बैडमिंटन की प्रतिष्ठा दाँव पर है — सिंधु, उन्नति और त्रिशा-गायत्री जोड़ी की आगे की परफॉर्मेंस तय करेगी कि इस बार इचिनोमिया से भारत कितने पदक लेकर लौटता है।