बलूचिस्तान के खुजदार में कथित पाकिस्तानी ड्रोन हमला, चार नागरिकों की मौत; एक की हालत नाज़ुक
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान के खुजदार ज़िले के मूला मंजालो इलाके में शुक्रवार, 31 जुलाई को एक आवासीय घर पर कथित तौर पर पाकिस्तानी ड्रोन हमला किया गया। मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) के अनुसार, इस हमले में चार लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बलूचिस्तान के कई इलाकों में कथित तौर पर जमीनी और हवाई सैन्य अभियान तेज़ हो रहे हैं।
मृतकों की पहचान और घायल की स्थिति
मारे गए लोगों में से तीन की पहचान इरफान, मीर गुल और अली गुल के रूप में की गई है, जबकि चौथे व्यक्ति की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। BVJ के अनुसार, हमले में मुनीर नाम का एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे तत्काल उपचार के लिए कराची भेजा गया है। संगठन का कहना है कि उसकी हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।
BVJ की प्रतिक्रिया और आरोप
BVJ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'राज्य की तरफ से की गई क्रूर हिंसा' करार दिया है। संगठन का कहना है कि ड्रोन हमलों के ज़रिए आम नागरिकों को निशाना बनाना अत्यंत चिंताजनक है। BVJ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई पहली या अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह बलूचिस्तान में जारी हिंसा के एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा है।
संगठन के अनुसार, इससे पहले भी मूला और जहरी क्षेत्रों में कथित ड्रोन हमलों में आम नागरिकों की जानें जा चुकी हैं। BVJ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे इन घटनाओं का तत्काल संज्ञान लें, स्वतंत्र जाँच कराएँ और पीड़ितों तथा उनके परिवारों को न्याय दिलाने में सहयोग करें।
व्यापक सैन्य अभियान का संदर्भ
रिपोर्टों के अनुसार, इसी सप्ताह की शुरुआत में खुजदार के वाध क्षेत्र में हुई गोलाबारी में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, सैन्य हेलीकॉप्टरों ने ओरनाच इलाके के सुरगढ़ क्षेत्र में कई स्थानों पर हमले किए, जहाँ हवाई निगरानी और लगातार उड़ानें भी जारी रहीं। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में वाध, ओरनाच और जहरी क्षेत्रों में जमीनी और हवाई अभियान संचालित किए गए हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस विशेष हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। BVJ द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाई गई यह माँग यदि सुनी जाती है, तो बलूचिस्तान में कथित नागरिक हताहतों की स्वतंत्र जाँच का रास्ता खुल सकता है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में पारदर्शी रिपोर्टिंग और स्वतंत्र पहुँच की भारी कमी के कारण वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन बना हुआ है।