चेन्नई: पट्टिनापक्कम में नए सचिवालय प्रस्ताव के खिलाफ नौ मछुआरा गांवों की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की टीवीके सरकार द्वारा पट्टिनापक्कम के तटीय इलाके में नया सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने के प्रस्ताव के विरोध में नौ तटीय गांवों के मछुआरे मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को पट्टिनापक्कम में एकजुट हो रहे हैं। इस बैठक का आयोजन मुल्लिकुप्पम-श्रीनिवासपुरम और मुल्लिनागर मछुआरा गांवों की पंचायत परिषदों की देखरेख में किया जा रहा है, जो प्रस्तावित परियोजना को अपनी आजीविका और पारंपरिक अधिकारों के लिए सीधा खतरा मानती हैं।
बैठक का स्वरूप और भागीदारी
यह बैठक मुल्लिकुप्पम सोशल वेलफेयर सेंटर के सामने होगी। मछुआरा संघ के सूत्रों के अनुसार, एन्नोर के नेट्टुकुप्पम से लेकर चेन्नई जिले के नैनारकुप्पम तक फैले मछली पकड़ने वाले गांवों के प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
बैठक में प्रस्तावित परियोजना से जुड़े सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए विरोध नोटिस जारी करने की योजनाओं पर चर्चा होगी। यदि सरकार प्रस्तावित स्थल पर पुनर्विचार करने से इनकार करती है, तो आंदोलन के अगले चरण पर भी निर्णय होने की संभावना है।
सरकार का प्रस्ताव और विवादास्पद स्थल
विजय की अगुवाई वाली टीवीके सरकार ने प्रशासनिक परिसर के लिए भूमि की पहचान करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश पहले ही जारी कर दिया है। दक्षिण चेन्नई में संथोम रोड के किनारे पट्टिनापक्कम को पसंदीदा स्थान माना जा रहा है, और कथित तौर पर इस परियोजना के लिए 24 से 25 एकड़ भूमि पर विचार किया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹1,200 करोड़ बताई जा रही है।
सरकार का तर्क है कि विभिन्न विभागों को एक छत के नीचे लाने, प्रशासनिक तालमेल बेहतर करने और मौजूदा फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में जगह व बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए एक आधुनिक सचिवालय की आवश्यकता है। हालाँकि, सरकार की ओर से परियोजना का अंतिम डिज़ाइन, लागत विवरण या निर्माण का समय-सीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
मछुआरा समुदाय की चिंताएँ
समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि एक बड़े सरकारी परिसर के निर्माण से मछली पकड़ने से जुड़ी गतिविधियों के लिए उपलब्ध स्थान सिकुड़ जाएगा, नावों और जालों की आवाजाही के पारंपरिक रास्ते प्रभावित होंगे, और तटीय बस्तियों के विस्थापन की प्रक्रिया तेज़ होगी।
इसके अलावा, संथोम रोड पर यातायात जाम, नागरिक बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव और समुद्र तट पर संभावित पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताई जा रही हैं। खासतौर पर कछुओं के अंडे देने वाले संवेदनशील तटीय क्षेत्रों पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है।
मछुआरों का कहना है कि समुद्र तट को प्रभावित करने वाले किसी भी बड़े विकास प्रोजेक्ट को पारंपरिक मछुआरा समुदायों के साथ सार्थक परामर्श के बिना लागू नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब टीवीके ने प्रशासनिक सुधार और बेहतर गवर्नेंस का वादा करते हुए जोरदार चुनाव प्रचार के बाद 108 सीटें जीतकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार को सत्ता से बाहर किया था। गौरतलब है कि इस प्रस्ताव की जरूरत, स्थल-चयन और वित्तीय प्रभाव को लेकर आलोचकों और विपक्षी दलों की ओर से पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं।
बैठक के नतीजे और मछुआरा समुदाय का अगला कदम यह तय करेगा कि तमिलनाडु की नई सरकार अपने पहले बड़े विकास विवाद को किस तरह संभालती है।