15 सितंबर 2026
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पूर्वोत्तर रेल कनेक्टिविटी 2029: भूटान, नेपाल, बांग्लादेश तक पहुँचेगी भारतीय रेल, ₹73,000 करोड़ की परियोजनाएँ जारी

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पूर्वोत्तर रेल कनेक्टिविटी 2029: भूटान, नेपाल, बांग्लादेश तक पहुँचेगी भारतीय रेल, ₹73,000 करोड़ की परियोजनाएँ जारी

सारांश

पूर्वोत्तर भारत अब केवल आंतरिक रेल संपर्क का केंद्र नहीं — भारतीय रेल इसे भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से जोड़ने वाले अंतर्राष्ट्रीय गलियारे में बदल रही है। ₹73,000 करोड़ की 20 परियोजनाएँ, 2029 तक सभी राजधानियाँ नेटवर्क से जुड़ने का लक्ष्य — यह पूर्वोत्तर के लिए एक नई रणनीतिक पहचान है।

मुख्य बातें

भूटान के साथ बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू रेल परियोजनाओं को मंजूरी; 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य।
बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा परियोजना का भौतिक निर्माण पूरा; महिषासन जीरो प्वाइंट पर लगभग 170 मीटर का काम शेष।
नेपाल के लिए जोगबनी-विराटनगर कंटेनर ट्रेन सेवा शुरू, विस्तार जारी।
पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर में करीब 2,000 किलोमीटर नई रेल लाइनें; चालू वर्ष में ₹11,488 करोड़ का बजट।
वर्तमान में ₹73,000 करोड़ की लगभग 20 परियोजनाएँ निर्माणाधीन।
226 किलोमीटर एलीफेंट कॉरिडोर में AI आधारित IDS प्रणाली; हूलोंगापार में गिबन के लिए कैनोपी ब्रिज ।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) अब केवल दूरदराज़ के इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ने तक सीमित नहीं है — भारतीय रेल इस पूरे क्षेत्र को भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक संपर्क के एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय गलियारे में बदलने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। 15 सितंबर 2026 को गुवाहाटी स्थित NFR मुख्यालय के दौरे में रेलवे अधिकारियों ने इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विस्तृत ब्यौरा साझा किया।

अंतर्राष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी: भूटान, नेपाल और बांग्लादेश

NFR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केके शर्मा ने बताया कि भूटान के साथ दो महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं — बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू — को हाल ही में मंजूरी मिली है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दोनों परियोजनाओं को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नेपाल के साथ रेल संपर्क पहले से सक्रिय है — जोगबनी से विराटनगर तक कंटेनर ट्रेन चलाई जा चुकी है और इस मार्ग को आगे विस्तारित करने पर काम जारी है। बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा रेल परियोजना का भौतिक निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि महिषासन जीरो प्वाइंट पर लगभग 170 मीटर का काम शेष बताया गया है।

पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को जोड़ने का लक्ष्य

रेलवे ने 2029 तक सभी पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को 13 सितंबर 2025 को बैराबी-सैरांग परियोजना के ज़रिए पहली बार रेल संपर्क मिला — यह पूर्वोत्तर के रेल विस्तार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

सेवोक-रंगपो परियोजना के तहत सिक्किम को 2027 तक, मणिपुर की राजधानी इंफाल को 2028 तक और नागालैंड को 2029 तक रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। गौरतलब है कि दीमापुर में 1903 में पहला रेलवे स्टेशन बनने के लगभग एक सदी बाद, 2022 में नागालैंड को शोखुवी के रूप में दूसरा स्टेशन मिला।

दशक में 2,000 किलोमीटर नई रेल लाइनें, शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य

रेलवे के अनुसार, पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में करीब 2,000 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई हैं। 2014 से पहले इस क्षेत्र में रेल विद्युतीकरण बेहद सीमित था, जबकि अब पूरा नेटवर्क शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के करीब है।

वर्तमान में NFR के अंतर्गत करीब ₹73,000 करोड़ की लागत वाली लगभग 20 बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। चालू वित्त वर्ष में पूर्वोत्तर रेलवे को ₹11,488 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। रेलवे अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कई परियोजनाओं को 2007 से 2010 के बीच मंजूरी मिली थी, लेकिन बजट की कमी के कारण उनकी रफ़्तार धीमी रही — 2015-16 के बाद इन्हें प्राथमिकता के आधार पर बजट मिलने लगा और निर्माण कार्य में तेज़ी आई।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मज़बूत करने के लिए अलुआबाड़ी से न्यू जलपाईगुड़ी तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने और दोहरीकरण के कार्य भी जारी हैं। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट-हिली रेल प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।

वन्यजीव संरक्षण: AI आधारित तकनीक से हाथियों की सुरक्षा

रेल विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को भी परियोजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है। NFR के अनुसार, करीब 226 किलोमीटर लंबे एलीफेंट कॉरिडोर में AI आधारित 'इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम' (IDS) लगाया जा रहा है, जो रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर समय रहते चेतावनी देता है।

असम के हूलोंगापार वन्यजीव अभयारण्य में गिबन के संरक्षण के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर विशेष कैनोपी ब्रिज बनाए गए हैं, ताकि गिबन को ट्रैक पार करने के लिए ज़मीन पर न उतरना पड़े।

क्या होगा आगे

2029 तक के निर्धारित लक्ष्यों के साथ पूर्वोत्तर के रेल नेटवर्क में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव अपेक्षित है। एक ओर जहाँ क्षेत्र की सभी राजधानियाँ मुख्य नेटवर्क से जुड़ेंगी, वहीं भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ बढ़ता रेल संपर्क माल ढुलाई, व्यापार, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से नए अवसर खोलेगा — और पूर्वोत्तर को भारत की अंतर्राष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी के एक निर्णायक गलियारे में बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन डेढ़ दशक बाद भी वे निर्माण के अंतिम चरण में हैं। बजट आवंटन 2015-16 के बाद बढ़ा ज़रूर, पर समयसीमा बार-बार खिसकती रही है। अगरतला-अखौरा जैसी परियोजना 'भौतिक रूप से पूर्ण' घोषित हो चुकी है, फिर भी 170 मीटर शेष है — यह क्रियान्वयन की जटिलताओं का संकेत है। 2029 के लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इनकी विश्वसनीयता के लिए स्वतंत्र प्रगति-निगरानी और पारदर्शी समयसीमा-ट्रैकिंग ज़रूरी होगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और भूटान के बीच कौन-सी रेल परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं?
भारत और भूटान के बीच दो रेल परियोजनाओं — बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू — को हाल ही में मंजूरी मिली है और भूमि अधिग्रहण शुरू हो चुका है। दोनों परियोजनाओं को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
अगरतला-अखौरा रेल परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
अगरतला-अखौरा रेल परियोजना का भौतिक निर्माण पूरा हो चुका है। महिषासन जीरो प्वाइंट पर लगभग 170 मीटर का काम अभी शेष बताया गया है और यह अंतिम चरण में है।
2029 तक पूर्वोत्तर के कौन-से राज्य रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे?
रेलवे की योजना के अनुसार सेवोक-रंगपो परियोजना से सिक्किम 2027 तक, मणिपुर की राजधानी इंफाल 2028 तक और नागालैंड 2029 तक रेल नेटवर्क से जुड़ेगा। मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को 13 सितंबर 2025 को पहला रेल संपर्क मिल चुका है।
पूर्वोत्तर रेलवे में वन्यजीव संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
NFR ने करीब 226 किलोमीटर लंबे एलीफेंट कॉरिडोर में AI आधारित 'इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम' (IDS) लगाया है, जो ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी की समय रहते चेतावनी देता है। असम के हूलोंगापार वन्यजीव अभयारण्य में गिबन के लिए ट्रैक के ऊपर विशेष कैनोपी ब्रिज भी बनाए गए हैं।
पूर्वोत्तर रेल विस्तार पर कितना बजट आवंटित है?
वर्तमान में NFR के अंतर्गत करीब ₹73,000 करोड़ की लागत की लगभग 20 बड़ी परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र के लिए ₹11,488 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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