क्या प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में रेलवे पूर्वोत्तर भारत में विकास का इंजन बन गया है?
सारांश
Key Takeaways
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण हो रहा है।
- 1,300 से अधिक स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया है।
- पश्चिम बंगाल में 101 स्टेशनों का पुनर्विकास हो रहा है।
- इस योजना पर 3,600 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
- यात्री सुविधाओं में सुधार और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गुवाहाटी, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ स्थापित किया है। रेलवे परियोजनाओं के माध्यम से न केवल कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, बल्कि आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिली है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल के रेलवे क्षेत्र में स्पष्ट और निर्णायक परिवर्तन देखने को मिला है। जो क्षेत्र कभी भौगोलिक सीमाओं, जर्जर ढांचे और असमान पहुंच से जूझ रहे थे, वे अब एकीकृत और भविष्य के अनुकूल रेलवे प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन का केंद्र अमृत भारत स्टेशन योजना है, जो दुनिया की सबसे बड़ी रेलवे स्टेशन पुनर्विकास योजना है और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एक नए युग का संकेत देती है। यह योजना केवल स्टेशनों के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को जनता की आवश्यकताओं के अनुसार नया स्वरूप देने की एक दूरदर्शी पहल है।
देशभर में 1,300 से अधिक स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। शर्मा के अनुसार, यह योजना ऐसी नेतृत्व सोच को दर्शाती है जो इरादों पर नहीं, बल्कि ठोस परिणामों और गति पर केंद्रित है।
इन पुनर्विकास कार्यों में केवल बाहरी सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि आधुनिक यात्री सुविधाएं, दिव्यांगजनों के अनुकूल ढांचा, बेहतर यात्री आवागमन व्यवस्था, आधुनिक प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणाली और स्थानीय विरासत से प्रेरित वास्तुकला भी शामिल है। इससे स्टेशन आधुनिक, सुलभ और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े विकास द्वार बन रहे हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना को एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार पहल के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है। स्टेशनों को जीवंत सार्वजनिक स्थान और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित कर यह योजना क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद कर रही है।
पश्चिम बंगाल यात्री-केंद्रित रेलवे आधुनिकीकरण का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभर रहा है। सुरक्षा, सुगमता और आवागमन में किए गए बड़े सुधार राज्य में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल रहे हैं।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पश्चिम बंगाल में 101 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिस पर करीब 3,600 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इनमें महानगरों के बड़े स्टेशन, सीमावर्ती कस्बे और तीर्थ स्थल शामिल हैं, जिससे संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित हो रहा है।
हावड़ा, सियालदह, न्यू जलपाईगुड़ी, खड़गपुर, आसनसोल, बंदेल, मालदा टाउन, सिलीगुड़ी, अलीपुरद्वार, शालीमार और संतरागाछी जैसे प्रमुख स्टेशनों को एकीकृत आधुनिकीकरण दृष्टिकोण के तहत उन्नत किया जा रहा है।
न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन को लगभग 335 करोड़ रुपये की लागत से पूर्वोत्तर भारत के आधुनिक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां नए टर्मिनल, एयर कॉनकोर्स और उन्नत यात्री सुविधाएं बनाई जा रही हैं।