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पूर्वोत्तर भारत में 12 वर्षों में ₹27,963 करोड़ की 2,730 परियोजनाएं पूरी, राष्ट्रीय राजमार्ग 16,207 किमी तक पहुंचा

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पूर्वोत्तर भारत में 12 वर्षों में ₹27,963 करोड़ की 2,730 परियोजनाएं पूरी, राष्ट्रीय राजमार्ग 16,207 किमी तक पहुंचा

सारांश

12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में ₹27,963 करोड़ की 2,730 परियोजनाएं पूरी हुईं, राष्ट्रीय राजमार्ग 49% बढ़े और रेल नेटवर्क में 1,900 किमी जुड़े। 'अष्टलक्ष्मी' क्षेत्र अब दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

मुख्य बातें

आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, पूर्वोत्तर में 3,746 परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें से 2,730 पूरी हो चुकी हैं — स्वीकृत लागत ₹27,963 करोड़ से अधिक।
PM-DevINE योजना के तहत ₹6,600 करोड़ (2022-23 से 2025-26) में 48 परियोजनाएं चल रही हैं; 3 पूरी हो चुकी हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग 2014 के 10,905 किमी से बढ़कर 1 अप्रैल 2025 तक 16,207 किमी हो गए।
रेल नेटवर्क विस्तार: 2009-2014 में 333 किमी बनाम 2014-2026 में 1,900 किमी से अधिक ।
एक्ट ईस्ट नीति (2014) के तहत पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने का प्रयास जारी।

पूर्वोत्तर भारत के आठों राज्यों में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार के नीतिगत समर्थन और निरंतर निवेश से विकास की तस्वीर बदली है। 20 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और आजीविका के क्षेत्रों में हुए सुधारों ने इस क्षेत्र को अधिक जुड़ा हुआ और आत्मनिर्भर बनाया है।

परियोजनाओं की स्थिति

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 3,746 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी स्वीकृत लागत ₹27,963 करोड़ से अधिक बताई गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय पाँच केंद्रीय क्षेत्रीय योजनाओं के माध्यम से आठों राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।

PM-DevINE योजना का विस्तार

प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन (PM-DevINE) को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजना है, जिसके लिए वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक ₹6,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत बुनियादी ढाँचे, आजीविका, सामाजिक विकास और विकास संबंधी कमियों को दूर करने वाले 48 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं — जिनमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और पैसेंजर रोपवे सिस्टम शामिल हैं — पहले ही पूरी हो चुकी हैं।

सड़क और रेल नेटवर्क में विस्तार

पूर्वोत्तर में सड़क संपर्क के मोर्चे पर आधिकारिक आँकड़े उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो 1 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई है — यानी करीब 49 प्रतिशत की वृद्धि।

रेलवे नेटवर्क में भी तुलनात्मक रूप से बड़ा विस्तार हुआ है। 2009 से 2014 के बीच 333 किलोमीटर नई रेल लाइनें शुरू हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह आँकड़ा 1,900 किलोमीटर से अधिक पहुँच गया है।

एक्ट ईस्ट नीति और क्षेत्रीय पहचान

सरकार की एक्ट ईस्ट नीति, जो 2014 से लागू है, ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के संपर्क के केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। कनेक्टिविटी, व्यापार, सांस्कृतिक संबंधों और सीमा क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत का व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है।

आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र अब अवसरों, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। साथ ही विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया गया है, जिससे यह दीर्घकालिक और टिकाऊ बताया जा रहा है।

आगे की राह

शेष 45 PM-DevINE परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और उनके ज़मीनी प्रभाव पर नज़र रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए यह क्षेत्र भारत की आर्थिक विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बशर्ते बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ मानव संसाधन विकास पर भी समान ध्यान दिया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परियोजनाओं की संख्या और सड़क-रेल विस्तार के साथ-साथ एक अहम सवाल अनुत्तरित रहता है — इस निवेश ने स्थानीय रोज़गार, प्रति व्यक्ति आय और पलायन दर पर क्या असर डाला? पूर्वोत्तर के कई राज्य अब भी देश के सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले क्षेत्रों में हैं। 'अष्टलक्ष्मी' की ब्रांडिंग और एक्ट ईस्ट नीति की महत्वाकांक्षा तब तक पूरी नहीं होगी जब तक बुनियादी ढाँचे का लाभ स्थानीय उद्यमिता और व्यापार में सीधे तब्दील न हो। बिना सत्यापन-योग्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के, यह कवरेज विकास की कहानी का केवल आधा हिस्सा बताती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वोत्तर भारत में पिछले 12 वर्षों में कितनी परियोजनाएं पूरी हुई हैं?
आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, कुल 3,746 स्वीकृत परियोजनाओं में से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी स्वीकृत लागत ₹27,963 करोड़ से अधिक है। ये परियोजनाएं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की पाँच केंद्रीय योजनाओं के तहत आठों पूर्वोत्तर राज्यों में क्रियान्वित की गई हैं।
PM-DevINE योजना क्या है और इसका बजट कितना है?
PM-DevINE यानी प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन एक 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजना है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक इसके लिए ₹6,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है और इसके तहत बुनियादी ढाँचे, आजीविका व सामाजिक विकास से जुड़े 48 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।
पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क कितना बढ़ा है?
2014 में पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 10,905 किलोमीटर थी, जो 1 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई — यानी लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि। रेलवे नेटवर्क में भी 2014-2026 के बीच 1,900 किलोमीटर से अधिक नई लाइनें जोड़ी गई हैं।
एक्ट ईस्ट नीति का पूर्वोत्तर भारत पर क्या प्रभाव पड़ा है?
2014 से लागू एक्ट ईस्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के संपर्क के केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की गई है। इसमें कनेक्टिविटी, व्यापार, सांस्कृतिक संबंधों और सीमा क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पूर्वोत्तर भारत को 'अष्टलक्ष्मी' क्यों कहा जाता है?
'अष्टलक्ष्मी' पूर्वोत्तर के आठों राज्यों — असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — को संदर्भित करता है। यह नाम क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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