पूर्वोत्तर भारत में 12 वर्षों में ₹27,963 करोड़ की 2,730 परियोजनाएं पूरी, राष्ट्रीय राजमार्ग 16,207 किमी तक पहुंचा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर भारत के आठों राज्यों में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार के नीतिगत समर्थन और निरंतर निवेश से विकास की तस्वीर बदली है। 20 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और आजीविका के क्षेत्रों में हुए सुधारों ने इस क्षेत्र को अधिक जुड़ा हुआ और आत्मनिर्भर बनाया है।
परियोजनाओं की स्थिति
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 3,746 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी स्वीकृत लागत ₹27,963 करोड़ से अधिक बताई गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय पाँच केंद्रीय क्षेत्रीय योजनाओं के माध्यम से आठों राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
PM-DevINE योजना का विस्तार
प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन (PM-DevINE) को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह 100 प्रतिशत केंद्र पोषित योजना है, जिसके लिए वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक ₹6,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत बुनियादी ढाँचे, आजीविका, सामाजिक विकास और विकास संबंधी कमियों को दूर करने वाले 48 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं — जिनमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और पैसेंजर रोपवे सिस्टम शामिल हैं — पहले ही पूरी हो चुकी हैं।
सड़क और रेल नेटवर्क में विस्तार
पूर्वोत्तर में सड़क संपर्क के मोर्चे पर आधिकारिक आँकड़े उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो 1 अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई है — यानी करीब 49 प्रतिशत की वृद्धि।
रेलवे नेटवर्क में भी तुलनात्मक रूप से बड़ा विस्तार हुआ है। 2009 से 2014 के बीच 333 किलोमीटर नई रेल लाइनें शुरू हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह आँकड़ा 1,900 किलोमीटर से अधिक पहुँच गया है।
एक्ट ईस्ट नीति और क्षेत्रीय पहचान
सरकार की एक्ट ईस्ट नीति, जो 2014 से लागू है, ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के संपर्क के केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। कनेक्टिविटी, व्यापार, सांस्कृतिक संबंधों और सीमा क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत का व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र अब अवसरों, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। साथ ही विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया गया है, जिससे यह दीर्घकालिक और टिकाऊ बताया जा रहा है।
आगे की राह
शेष 45 PM-DevINE परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और उनके ज़मीनी प्रभाव पर नज़र रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए यह क्षेत्र भारत की आर्थिक विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बशर्ते बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ मानव संसाधन विकास पर भी समान ध्यान दिया जाए।