आयुष्मान भारत PM-JAY: 8 साल में 13 करोड़ से अधिक इलाज, ₹2 लाख करोड़ से ज़्यादा खर्च
सारांश
मुख्य बातें
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) ने अपने 8 वर्षों के सफर में 13 करोड़ से अधिक इलाज पूरे कर लिए हैं और 48 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थी कार्ड जारी किए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील कुमार बरनवाल ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना पर अब तक ₹2 लाख करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
बरनवाल के अनुसार, PM-JAY के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक उपचार प्रक्रियाएँ पूरी की गई हैं और देश भर में 48 करोड़ से ज़्यादा आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। प्रत्येक कार्डधारक परिवार को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क इलाज सुनिश्चित किया जाता है। योजना में फिलहाल लगभग 2,000 चिकित्सीय प्रक्रियाएँ शामिल हैं, जिनमें सर्जरी से लेकर विशेष उपचार तक सब कुछ कवर होता है।
उन्होंने कहा कि यह योजना अभी भी सक्रिय रूप से कार्ड जारी कर रही है, क्योंकि लक्ष्य 7 करोड़ से अधिक और लाभार्थियों को कवर करना है। गौरतलब है कि इस स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा पहुँच भारत के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है।
गुणवत्ता और लागत पर NHA का स्पष्टीकरण
बरनवाल ने योजना के पैकेज ढाँचे को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, 'भारत में बनी वस्तुओं की कीमत कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी गुणवत्ता खराब है।' उन्होंने बताया कि PM-JAY का पैकेज एक बंडल पैकेज है, जिसमें प्रक्रिया, दवा और कंज्यूमेबल्स सहित सभी खर्च एकीकृत होते हैं — अलग-अलग मदों के लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता।
AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन प्रणाली
योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित फ्रॉड डिटेक्शन प्रणाली लागू की गई है। बरनवाल के अनुसार, क्लेम के दौरान उपयोग किए गए इम्प्लांट की पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से ली जाती है — इम्प्लांट का बिल और बारकोड दर्ज किया जाता है। यदि किसी मामले में एक से अधिक इम्प्लांट का उपयोग दर्ज होता है, तो IT प्रणाली उसे स्वतः संदिग्ध मानकर आगे की जाँच प्रक्रिया शुरू करती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में फर्ज़ी क्लेम की शिकायतें राष्ट्रीय चर्चा का विषय रही हैं।
गरीब परिवारों पर असर
NHA प्रमुख ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 8 वर्षों में गरीब परिवारों के जो पैसे बचे हैं, वह इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि है। ₹2 लाख करोड़ से अधिक की राशि वह है जो अन्यथा लाभार्थी परिवारों की जेब से खर्च होती। यह योजना उन वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच का काम कर रही है, जो बड़ी बीमारी में कर्ज़ में डूब जाते थे।
आगे की राह
डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा प्लेटफॉर्म का विस्तार और AI-संचालित निगरानी तंत्र इस योजना के अगले चरण की नींव बन रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, कार्ड वितरण अभियान अभी भी जारी है और आने वाले समय में करोड़ों और नागरिक इस स्वास्थ्य सुरक्षा छत्र के दायरे में आएँगे।