क्या 'अष्टलक्ष्मी' परिकल्पना पूर्वोत्तर भारत के विकास का इंजन बनकर उभरी?

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क्या 'अष्टलक्ष्मी' परिकल्पना पूर्वोत्तर भारत के विकास का इंजन बनकर उभरी?

सारांश

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 'अष्टलक्ष्मी' परिकल्पना ने पूर्वोत्तर भारत को विकास का नया केंद्र बना दिया है। इस पहल के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के उपाय तय किए गए हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री की ' अष्टलक्ष्मी ' परिकल्पना से पूर्वोत्तर का विकास हो रहा है।
केंद्रीय मंत्रालयों का 10% बजट पूर्वोत्तर की ओर अग्रसर किया गया।
त्रिपुरा में 365 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन।
274 गांवों में सौर माइक्रोग्रिड से बिजली आपूर्ति।
पूर्वोत्तर में पिछले वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश।

अगरतला, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को 'अष्टलक्ष्मी' क्षेत्र में लाकर भारत के विकास पथ का केंद्र बना दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने त्रिपुरा में 365 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली आठ प्रमुख विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 'अष्टलक्ष्मी' परिकल्पना के तहत पूर्वोत्तर अब केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं रह गया है, बल्कि भारत के विकास का इंजन बनकर उभरा है।

इन परियोजनाओं से राज्य में सड़क संपर्क, पर्यटन, ऊर्जा और आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी 52 केंद्रीय मंत्रालयों के लिए अपने बजट का 10 प्रतिशत पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए आवंटित करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि पिछले एक वर्ष में ही पूर्वोत्तर में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है।

सिंधिया ने कहा कि त्रिपुरा ने पिछले एक दशक में 10.5 से 11 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है और अब यह बिजली अधिशेष वाला राज्य बन गया है।

उद्घाटित परियोजनाओं में 274 दूरस्थ गांवों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के लिए सौर माइक्रोग्रिड की स्थापना शामिल है, जिससे त्रिपुरा के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले 9,700 से अधिक परिवारों को लाभ होगा।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने पश्चिमी त्रिपुरा के राधा किशोर नगर में एक पशु चिकित्सा क्लिनिक परिसर का वर्चुअल उद्घाटन किया और उत्तरी त्रिपुरा और धलाई जिलों में सड़क संपर्क परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

इन सभी परियोजनाओं को प्रधानमंत्री की उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास पहल, उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी), और उत्तर पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना (एनईएसआईडीएस-रोड्स) के तहत वित्त पोषित किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पूर्वोत्तर भारत में हो रहा विकास न केवल क्षेत्र के लिए, बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पहल प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि को साकार कर रही है और भारत के विकास के पथ पर एक नई दिशा प्रदान कर रही है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अष्टलक्ष्मी परिकल्पना क्या है?
अष्टलक्ष्मी परिकल्पना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों को विकास के एकीकृत क्षेत्र के रूप में स्थापित करना है।
इस योजना के अंतर्गत कौन-कौन सी परियोजनाएं शामिल हैं?
इस योजना के अंतर्गत सड़क संपर्क, पर्यटन, ऊर्जा, और आदिवासी क्षेत्रों के विकास की प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
कितना निवेश पूर्वोत्तर में किया गया है?
पिछले एक वर्ष में पूर्वोत्तर में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है।
इससे त्रिपुरा को क्या लाभ होगा?
इससे त्रिपुरा में विकास दर में वृद्धि, बिजली आपूर्ति में सुधार, और ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ होगा।
सरकार की अन्य योजनाएं क्या हैं?
सरकार की अन्य योजनाओं में उत्तर पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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