अष्टलक्ष्मी ने वैश्विक मानचित्र पर बनाई पहचान, पूर्वोत्तर बना विश्वस्तरीय स्थलों का केंद्र: वित्त मंत्री सीतारमण
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 जून 2026 को कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक स्तर के अनेक महत्वपूर्ण स्थलों का घर बन चुका है और सतत तथा समावेशी विकास का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि 'अष्टलक्ष्मी' — अर्थात अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — अब वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से अपनी पहचान अंकित कर चुकी है।
वैश्विक उपलब्धियाँ जो बनाती हैं पूर्वोत्तर को खास
वित्त मंत्री सीतारमण ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में दुनिया का पहला 100 प्रतिशत जैविक (ऑर्गेनिक) राज्य, विश्व की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग और सबसे ऊँचा गर्डर रेल पुल स्थित है। ये उपलब्धियाँ इस क्षेत्र को केवल भारत के भीतर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाती हैं। गौरतलब है कि ये रिकॉर्ड उस क्षेत्र में दर्ज हुए हैं जिसे कभी विकास की दृष्टि से उपेक्षित माना जाता था।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्य कभी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर माने जाते थे, किंतु आज ये राज्य भारत की विकास यात्रा के नए इंजन के रूप में उभर रहे हैं। उनके अनुसार ये राज्य अब समृद्धि, शक्ति और अपार संभावनाओं से परिपूर्ण हैं।
12 वर्षों में बदला विकास का परिदृश्य
एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास परिदृश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। यह बदलाव निरंतर नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों की बदौलत संभव हुआ है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने क्षेत्र की भौगोलिक दूरी को घटाया है और क्षेत्रीय एकीकरण को नई गति दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट' नीति दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संपर्क सूत्र को और मजबूत करने पर केंद्रित है। स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुँच में भी शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
स्वच्छ ऊर्जा और सीमा-पार कनेक्टिविटी
फैक्ट शीट के अनुसार, पूर्वोत्तर क्षेत्र अब भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। जलविद्युत परियोजनाओं, गैस बुनियादी ढाँचे और सीमा-पार कनेक्टिविटी में किए गए निवेश ने इस बदलाव को संभव बनाया है। वर्ष 2014 से मिल रहे नीतिगत समर्थन ने विकास को पर्यावरणीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ संतुलित किया है।
आगे की राह: अवसरों का नया प्रवेश द्वार
पूर्वोत्तर भारत अब अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव और नए अवसरों के प्रवेश द्वार के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर रहा है। 'अष्टलक्ष्मी' आज एक ऐसे क्षेत्र का प्रतीक बन चुकी है जो पहले से अधिक जुड़ा हुआ, अधिक मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस गति को बनाए रखा गया, तो पूर्वोत्तर अगले दशक में भारत के सबसे तेज़ी से उभरते आर्थिक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।