सेला टनल से तवांग को मिली हर मौसम कनेक्टिविटी, अरुणाचल उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने बताया पूर्वोत्तर के बदलाव का प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने 20 जून को कहा कि सेला टनल ने तवांग क्षेत्र की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। उनके अनुसार यह सुरंग अब पूरे वर्ष — हर मौसम में — तवांग तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करती है, जिससे सामरिक बुनियादी ढाँचे को मजबूती मिली है और क्षेत्र में विकास के नए द्वार खुले हैं।
सेला टनल: एक ऐतिहासिक परियोजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मार्च 2024 को 13,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन वाली सेला टनल का उद्घाटन किया था। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह परियोजना दो सुरंगों और एक लिंक रोड से मिलकर बनी है। यह भारत-चीन (तिब्बत) और भूटान की त्रि-जंक्शन सीमा के निकट स्थित तवांग को वर्षभर देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है।
गौरतलब है कि पहले भारी बर्फबारी के कारण तवांग का मार्ग महीनों तक बाधित रहता था, जिससे न केवल आम नागरिकों को कठिनाई होती थी, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह एक बड़ी चुनौती थी।
उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में चौना मीन ने कहा, 'जो रास्ता कभी भारी बर्फबारी के कारण बाधित रहता था, वह अब पूरे साल खुला रहता है। सेला टनल ने तवांग की कनेक्टिविटी में क्रांति ला दी है। इससे हर मौसम में पहुँच संभव हुई है, रणनीतिक बुनियादी ढाँचे को मजबूती मिली है और क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएँ पैदा हुई हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि इस सुरंग से भारतीय सशस्त्र बलों की आवाजाही भी अधिक सुगम हुई है, जो रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पूर्वोत्तर में व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सेला टनल पूर्वोत्तर में चल रहे व्यापक आधारभूत ढाँचा विकास अभियान का एक हिस्सा मात्र है। उनके अनुसार पूर्वोत्तर में 96 प्रतिशत से अधिक रेलवे विद्युतीकरण, 100 प्रतिशत घरेलू विद्युतीकरण और आठ नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे इस परिवर्तन के प्रमाण हैं।
अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। 2014 के बाद से पूर्वोत्तर में 1,500 किलोमीटर से अधिक नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं और रेलवे क्षेत्र में ₹95,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। असम में वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि क्षेत्र के 60 से अधिक रेलवे स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
चौना मीन के अनुसार बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है और पर्यटन को नई ऊर्जा मिली है। यह ऐसे समय में आया है जब तवांग पहले से ही बौद्ध धर्म और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रहा है। हर मौसम में पहुँच उपलब्ध होने से अब स्थानीय व्यापार और पर्यटन उद्योग को वर्षभर लाभ मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर ने ऐतिहासिक बदलाव देखा है। बेहतर संपर्क, डिजिटल सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और बढ़ते आर्थिक अवसरों ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है।
आगे की राह
उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के निरंतर निवेश और जन-केंद्रित नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर अब भारत की विकास गाथा का अभिन्न अंग बन चुका है। ऊँचे पुल, विस्तारित रेलवे नेटवर्क और विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा मिलकर इस क्षेत्र को और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का पूर्ण प्रभाव क्षेत्र की आर्थिक और सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा।