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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: महाराष्ट्र की तीसरी पर्वतीय सुरंग MT-07 का निर्माण पूरा, पालघर में बड़ी उपलब्धि

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: महाराष्ट्र की तीसरी पर्वतीय सुरंग MT-07 का निर्माण पूरा, पालघर में बड़ी उपलब्धि

सारांश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने महाराष्ट्र की तीसरी पर्वतीय सुरंग MT-07 का निर्माण पूरा कर बड़ी छलांग लगाई है। पालघर जिले में महज पाँच महीनों में तीन सुरंगें पूरी होना देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना की बदली रफ्तार का संकेत है। वापी-बोइसर कॉरिडोर अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तीसरी पर्वतीय सुरंग MT-07 का निर्माण पूरा; पालघर के अंबेसारी गांव में स्थित।
सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी ; उन्नत निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों से लैस।
पालघर जिले में महज पाँच महीनों में तीन पर्वतीय सुरंगों (MT-05, MT-06, MT-07) का निर्माण पूरा।
MT-05 ( 2 जनवरी 2026 ) और MT-06 ( 3 फरवरी 2026 ) पहले पूरी हो चुकी हैं।
कुल 8 पर्वतीय सुरंगों में से 7 महाराष्ट्र में, 1 गुजरात के वलसाड में — वलसाड वाली पहले ही पूरी।
MT-03 की खुदाई 80% से अधिक, MT-04 लगभग 60% पूरी।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने 2 जून 2026 को महाराष्ट्र खंड की तीसरी पर्वतीय सुरंग MT-07 का निर्माण पूरा कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। रेल मंत्रालय द्वारा मंगलवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह सुरंग पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में बनाई गई है, और देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना की रफ्तार में अहम भूमिका निभाएगी।

सुरंग की तकनीकी विशेषताएँ

मंत्रालय के अनुसार, यह पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। इसे उच्च गति वाली बुलेट ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए उन्नत निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों के साथ तैयार किया गया है। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों ओर की पटरियों को समायोजित करने वाली इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि से की गई।

सुरक्षा और निगरानी प्रणाली

निर्माण के दौरान संरचनात्मक स्थिरता और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक भू-तकनीकी उपकरण लगाए गए। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (SSP), 3D टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसी वास्तविक समय निगरानी प्रणालियों ने कंपन, सुरंग की गतिविधि और आसपास की संरचनाओं पर लगातार नज़र रखी।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा, नियंत्रित पहुँच और निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण सहित श्रमिक सुरक्षा उपायों में कोई ढील नहीं दी गई।

पाँच महीनों में तीन सुरंगें

गौरतलब है कि पालघर जिले में महज पाँच महीनों में तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा हुआ है। 1.5 किलोमीटर लंबी पहली सुरंग MT-05 का काम 2 जनवरी 2026 को सफाले के पास पूरा हुआ था, जो महाराष्ट्र में परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग बनी। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग MT-06 का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) से 454 मीटर की लंबाई में पूरा हुआ।

परियोजना की समग्र प्रगति

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से MT-05, MT-06 और MT-07 की खुदाई पूरी हो चुकी है। MT-08 (350 मीटर) की खुदाई 5 अक्टूबर 2023 को ही पूरी हो गई थी। MT-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक और MT-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है, जबकि MT-01 और MT-02 पर काम लगातार जारी है। परियोजना की कुल आठ पर्वतीय सुरंगों में से सात पालघर जिले में और एक गुजरात के वलसाड जिले में है — वलसाड वाली सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

वापी-बोइसर खंड पर तेज़ी

मंत्रालय के अनुसार, वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच तीनों पर्वतीय सुरंगों (MT-08, MT-07 और MT-06) की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुज़रता है, जहाँ निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में शेष सुरंगों की प्रगति परियोजना की समय-सीमा के लिए निर्णायक मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भूमि अधिग्रहण विवादों और महाराष्ट्र खंड में बार-बार देरी के कारण वर्षों आलोचना झेलनी पड़ी। असली कसौटी अब MT-01, MT-02, MT-03 और MT-04 हैं — जिनकी प्रगति बताएगी कि यह रफ्तार टिकाऊ है या चुनिंदा खंडों की चमक। NATM जैसी तकनीक और रियल-टाइम भू-तकनीकी निगरानी का बढ़ता उपयोग भारतीय बुनियादी ढाँचे में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, बशर्ते सुरक्षा प्रोटोकॉल सिर्फ बयानों तक सीमित न रहें।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की MT-07 सुरंग क्या है?
MT-07 मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की महाराष्ट्र खंड में तीसरी पर्वतीय सुरंग है, जो पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में बनाई गई है। यह 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, और इसका निर्माण 2 जून 2026 को पूरा हुआ।
पालघर जिले में अब तक कितनी पर्वतीय सुरंगें बन चुकी हैं?
पालघर जिले में अब तक चार पर्वतीय सुरंगों — MT-05, MT-06, MT-07 और MT-08 — की खुदाई पूरी हो चुकी है। इनमें से तीन (MT-05, MT-06, MT-07) पिछले पाँच महीनों में पूरी की गई हैं।
सुरंग निर्माण में कौन-सी तकनीक का उपयोग हुआ है?
सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि से की गई, जबकि MT-06 में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग हुआ। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स, 3D टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसी वास्तविक समय निगरानी प्रणालियाँ लगाई गईं।
बुलेट ट्रेन परियोजना में कुल कितनी पर्वतीय सुरंगें हैं?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल आठ पर्वतीय सुरंगें हैं, जिनमें से सात महाराष्ट्र के पालघर जिले में और एक गुजरात के वलसाड जिले में है। वलसाड वाली सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
शेष सुरंगों की प्रगति क्या है?
रेल मंत्रालय के अनुसार, MT-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक और MT-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है। MT-01 और MT-02 पर निर्माण कार्य लगातार जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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