भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से जारी

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भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से जारी

सारांश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस सुरंग का पांच किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह खोद लिया गया है, जिससे परियोजना की गति को और तेज किया जा रहा है। जानिए इस महत्वाकांक्षी योजना की नवीनतम जानकारी।

Key Takeaways

  • 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है।
  • इस सुरंग का न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड द्वारा निर्माण किया जा रहा है।
  • सुरंग के भीतर जल निकासी और वॉटरप्रूफिंग प्रणाली की स्थापना की जा रही है।
  • सुरंग का 5 किलोमीटर हिस्सा पहले ही खोद लिया गया है।
  • यह परियोजना 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का हिस्सा है।

मुंबई, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के एक महत्वपूर्ण हिस्से में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस सुरंग का पांच किलोमीटर लंबा खंड, जिसे न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का उपयोग करके बनाया जा रहा है, पूरी तरह से खोद लिया गया है। खुदाई के इस चरण की समाप्ति के बाद, अब सुरंग के निर्माण का कार्य अगले महत्वपूर्ण चरणों में पहुंच चुका है।

यह 21 किलोमीटर लंबी सुरंग मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) से शिलफाटा तक बनाई जा रही है। इसमें से सात किलोमीटर का हिस्सा थाने क्रीक के नीचे समुद्र के अंदर से गुजरेगा, जो भारत की पहली अंडरसी रेल सुरंग होगी। शेष भाग टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) द्वारा निर्मित किया जाएगा।

सुरंग के भीतर जल निकासी प्रणाली का काम जोर-शोर से चल रहा है। यहाँ विशेष ड्रेनेज कास्टिंग गैन्ट्री का उपयोग करके रिसने वाले पानी को इकट्ठा कर सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा रहा है। इसके बाद वॉटरप्रूफिंग गैन्ट्री काम कर रही है, जो विशेष झिल्लियों के उपयोग से सुरंग को पानी से पूरी तरह सुरक्षित करेगी।

इसके बाद मजबूती बढ़ाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। स्टील की सलाखों से पिंजरे बनाए जा रहे हैं, जो कंक्रीट की अंतिम परत को मजबूत सहारा देंगे। इन पिंजरों को सही स्थान पर लगाने के बाद लाइनिंग गैन्ट्री कंक्रीट डालेगी। यह अंतिम कंक्रीट परत सुरंग को स्थायी मजबूती और चिकनी सतह प्रदान करेगी, जिससे बुलेट ट्रेन सुचारू रूप से चल सकेगी।

सुरंग के संचालन और रखरखाव के लिए आवश्यक उपकरण कक्ष भी बनाए जा रहे हैं। इन कक्षों में विद्युत, सिग्नलिंग और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।

हर चरण में प्रगति के साथ भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का भूमिगत हिस्सा पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। इस कुल 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में कुल 27.4 किलोमीटर सुरंगें हैं, जिनमें से यह 21 किलोमीटर लंबी सुरंग सबसे बड़ी चुनौती प्रस्तुत करती है।

Point of View

बल्कि यह देश के बुनियादी ढांचे में एक नया आयाम जोड़ने का कार्य भी करेगा। इस प्रकार की परियोजनाएँ भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगी।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

बुलेट ट्रेन परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
बुलेट ट्रेन परियोजना का मुख्य उद्देश्य यात्रा की गति को बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करना है।
इस सुरंग का निर्माण कब तक पूरा होगा?
सुरंग के निर्माण कार्य की समय सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन वर्तमान प्रगति के अनुसार यह जल्द ही पूरा हो सकता है।
न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड क्या है?
यह एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसका प्रयोग सुरंगों के निर्माण में किया जाता है, जिसमें सुरंग को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से खोदा जाता है।
सुरंग के भीतर क्या विशेषताएँ होंगी?
सुरंग के भीतर जल निकासी और वॉटरप्रूफिंग प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण फीचर्स होंगे।
यह सुरंग कितनी लंबी होगी?
यह सुरंग कुल 21 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें से 7 किलोमीटर समुद्र के नीचे गुजरेगा।
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