मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 21 किमी सुरंग के लिए दूसरी TBM का 350 टन कटरहेड सावली में उतारा गया
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने 23 मई 2026 को एक और बड़ी तकनीकी उपलब्धि दर्ज की — मुंबई के निकट सावली (घनसोली) शाफ्ट पर 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग के निर्माण हेतु दूसरी टनल बोरिंग मशीन (TBM) का विशाल कटरहेड सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला यह कटरहेड TBM की मुख्य शील्ड असेंबली का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है।
मुख्य घटनाक्रम
यह दूसरी TBM सावली (घनसोली) से अपनी खुदाई यात्रा आरंभ करेगी और विक्रोली की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी सप्ताह पहले पहली TBM का कटरहेड विक्रोली में उतारा जा चुका था। अब दोनों मशीनों की अंतिम असेंबली और कमीशनिंग ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। परियोजना के अनुसार, जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में दोनों TBM की प्रारंभिक ड्राइव शुरू करने की योजना है।
तकनीकी विशेषताएँ
13.6 मीटर व्यास का यह कटरहेड एकल सुरंग की खुदाई के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित किया गया है, जिसमें हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की अप और डाउन — दोनों लाइनें एक साथ संचालित हो सकेंगी। यह अत्याधुनिक इकाई 84 कटर डिस्क, 124 स्क्रैपर और 16 बकेट लिप्स से लैस है, जो चट्टानों को काटने और मलबा हटाने का कार्य अत्यधिक दक्षता के साथ संपन्न करती है।
परियोजना के लिए प्राप्त दोनों TBM में TBM-1 का कुल वजन 3,080 टन और TBM-2 का वजन 3,184 टन है। प्रत्येक TBM की कुल लंबाई 95.32 मीटर है और ये मिक्स शील्ड एवं स्लरी-आधारित तकनीक पर कार्य करती हैं। इनमें कटर व्हील, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड और चार विशेष गैन्ट्री जैसे उपकरण शामिल हैं।
ये मशीनें अधिकतम 4 RPM की कटरहेड गति और 49 मिमी प्रति मिनट तक की खुदाई क्षमता के साथ काम कर सकती हैं, जिससे सुरंग निर्माण कार्य सुरक्षित, नियंत्रित और निरंतर गति से पूरा किया जा सकेगा।
परियोजना का महत्व
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को देश के सबसे बड़े हाई-स्पीड रेल अवसंरचना प्रकल्पों में गिना जाता है। गौरतलब है कि 21 किलोमीटर की यह भूमिगत सुरंग इस पूरी परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल खंड है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे से गुज़रेगा। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण और नागरिक कार्यों में भी तेज़ी लाई जा रही है।
आगे की राह
दोनों TBM की कमीशनिंग पूरी होने के बाद जुलाई 2026 से खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है। इस उपलब्धि को परियोजना के लिए एक निर्णायक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भारत में हाई-स्पीड रेल के सपने को साकार करने की दिशा में ठोस प्रगति का संकेत देती है।