8 जुलाई 2026
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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 21 किमी सुरंग के लिए दूसरी TBM का 350 टन कटरहेड सावली में उतारा गया

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 21 किमी सुरंग के लिए दूसरी TBM का 350 टन कटरहेड सावली में उतारा गया

सारांश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की सबसे चुनौतीपूर्ण कड़ी — 21 किमी की भूमिगत सुरंग — अब दो विशाल TBM के साथ आकार लेने को तैयार है। सावली में 350 टन का दूसरा कटरहेड उतरते ही जुलाई 2026 की प्रारंभिक ड्राइव का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य बातें

सावली (घनसोली) शाफ्ट पर 23 मई 2026 को दूसरी TBM का 350 टन और 13.6 मीटर व्यास का कटरहेड सफलतापूर्वक उतारा गया।
यह TBM सावली से विक्रोली की दिशा में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदेगी; पहली TBM का कटरहेड इसी सप्ताह विक्रोली में उतारा गया।
दोनों TBM की प्रारंभिक ड्राइव जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में शुरू होने की योजना है।
TBM-1 का वजन 3,080 टन , TBM-2 का 3,184 टन ; प्रत्येक की लंबाई 95.32 मीटर ।
कटरहेड में 84 कटर डिस्क , 124 स्क्रैपर और 16 बकेट लिप्स लगे हैं; खुदाई क्षमता 49 मिमी प्रति मिनट तक।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने 23 मई 2026 को एक और बड़ी तकनीकी उपलब्धि दर्ज की — मुंबई के निकट सावली (घनसोली) शाफ्ट पर 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग के निर्माण हेतु दूसरी टनल बोरिंग मशीन (TBM) का विशाल कटरहेड सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला यह कटरहेड TBM की मुख्य शील्ड असेंबली का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है।

मुख्य घटनाक्रम

यह दूसरी TBM सावली (घनसोली) से अपनी खुदाई यात्रा आरंभ करेगी और विक्रोली की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी सप्ताह पहले पहली TBM का कटरहेड विक्रोली में उतारा जा चुका था। अब दोनों मशीनों की अंतिम असेंबली और कमीशनिंग ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। परियोजना के अनुसार, जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में दोनों TBM की प्रारंभिक ड्राइव शुरू करने की योजना है।

तकनीकी विशेषताएँ

13.6 मीटर व्यास का यह कटरहेड एकल सुरंग की खुदाई के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित किया गया है, जिसमें हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की अप और डाउन — दोनों लाइनें एक साथ संचालित हो सकेंगी। यह अत्याधुनिक इकाई 84 कटर डिस्क, 124 स्क्रैपर और 16 बकेट लिप्स से लैस है, जो चट्टानों को काटने और मलबा हटाने का कार्य अत्यधिक दक्षता के साथ संपन्न करती है।

परियोजना के लिए प्राप्त दोनों TBM में TBM-1 का कुल वजन 3,080 टन और TBM-2 का वजन 3,184 टन है। प्रत्येक TBM की कुल लंबाई 95.32 मीटर है और ये मिक्स शील्ड एवं स्लरी-आधारित तकनीक पर कार्य करती हैं। इनमें कटर व्हील, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड और चार विशेष गैन्ट्री जैसे उपकरण शामिल हैं।

ये मशीनें अधिकतम 4 RPM की कटरहेड गति और 49 मिमी प्रति मिनट तक की खुदाई क्षमता के साथ काम कर सकती हैं, जिससे सुरंग निर्माण कार्य सुरक्षित, नियंत्रित और निरंतर गति से पूरा किया जा सकेगा।

परियोजना का महत्व

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को देश के सबसे बड़े हाई-स्पीड रेल अवसंरचना प्रकल्पों में गिना जाता है। गौरतलब है कि 21 किलोमीटर की यह भूमिगत सुरंग इस पूरी परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल खंड है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे से गुज़रेगा। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण और नागरिक कार्यों में भी तेज़ी लाई जा रही है।

आगे की राह

दोनों TBM की कमीशनिंग पूरी होने के बाद जुलाई 2026 से खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है। इस उपलब्धि को परियोजना के लिए एक निर्णायक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भारत में हाई-स्पीड रेल के सपने को साकार करने की दिशा में ठोस प्रगति का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा जुलाई 2026 के बाद शुरू होगी — जब मशीनें वास्तव में ज़मीन के नीचे चलेंगी। 21 किमी की यह सुरंग, जिसका एक हिस्सा समुद्र के नीचे है, भारत में अब तक की सबसे जटिल रेल-सुरंग परियोजना है और इसमें भूगर्भीय अनिश्चितताएँ बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। परियोजना की समग्र समयसीमा कई बार खिसक चुकी है, इसलिए TBM कमीशनिंग की यह रफ़्तार तभी सार्थक होगी जब खुदाई के बाद का नागरिक और विद्युत कार्य भी उसी गति से आगे बढ़े।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की 21 किमी सुरंग क्या है?
यह मुंबई के सावली (घनसोली) से विक्रोली तक बनने वाली 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग है, जो इस पूरी बुलेट ट्रेन परियोजना का सबसे तकनीकी रूप से जटिल खंड है। इसका एक हिस्सा समुद्र के नीचे से गुज़रेगा और इसमें हाई-स्पीड रेल की अप व डाउन दोनों लाइनें एक ही सुरंग में संचालित होंगी।
TBM कटरहेड क्या होता है और इसे उतारना क्यों ज़रूरी है?
कटरहेड TBM का सबसे अग्रणी और भारी हिस्सा होता है, जो घूमकर चट्टानों और मिट्टी को काटता है। इसे शाफ्ट में उतारना TBM असेंबली का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बाद ही मशीन खुदाई के लिए तैयार मानी जाती है।
बुलेट ट्रेन सुरंग की खुदाई कब शुरू होगी?
परियोजना के अनुसार दोनों TBM की प्रारंभिक ड्राइव जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में शुरू करने की योजना है। इससे पहले दोनों मशीनों की अंतिम असेंबली और कमीशनिंग ट्रायल पूरे किए जाएंगे।
इस परियोजना में कितनी TBM का उपयोग हो रहा है और उनकी विशेषताएँ क्या हैं?
परियोजना में दो TBM का उपयोग हो रहा है — TBM-1 (3,080 टन) और TBM-2 (3,184 टन)। दोनों का कटरहेड व्यास 13.6 मीटर और कुल लंबाई 95.32 मीटर है। ये मिक्स शील्ड व स्लरी तकनीक पर आधारित हैं और 49 मिमी प्रति मिनट तक की खुदाई क्षमता रखती हैं।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का महत्व क्या है?
यह भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है और देश के सबसे बड़े रेल अवसंरचना प्रकल्पों में से एक है। इसके पूरा होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय नाटकीय रूप से घटेगा और यह परियोजना भारत के रेल आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगी।
राष्ट्र प्रेस
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