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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: सावली में दूसरी टीबीएम असेंबली का शुभारंभ, टनलिंग जुलाई में

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: सावली में दूसरी टीबीएम असेंबली का शुभारंभ, टनलिंग जुलाई में

सारांश

अहमदाबाद, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन की असेंबली सावली में शुरू हुई। यह परियोजना के भूमिगत निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में और क्या खास है।

मुख्य बातें

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली है।
दूसरी टीबीएम की असेंबली सावली में शुरू हुई है।
परियोजना जुलाई में टनलिंग कार्य शुरू करेगी।
इससे यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है।
यह जापान की शिंकान्सेन तकनीक पर आधारित है।

अहमदाबाद, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत, मुंबई के समीप सावली (घनसोली के निकट) में दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की असेंबली प्रारंभ हो गई है। इसे परियोजना के भूमिगत खंड के निर्माण में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

यह टीबीएम सावली शाफ्ट में लगभग 39 मीटर गहराई पर स्थापित की जा रही है, जहां से इसे विखरोली की दिशा में सुरंग बनाने के लिए तैनात किया जाएगा। असेंबली प्रक्रिया के दौरान, 190 मीट्रिक टन वजनी एक विशाल गैन्ट्री को सफलतापूर्वक नीचे उतारा गया, जिसकी लंबाई 18 मीटर, चौड़ाई 10 मीटर और ऊंचाई 9 मीटर है।

इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हर टीबीएम में कुल चार गैन्ट्री लगाए जाएंगे, जो मुख्य शील्ड और कटरहेड से जुड़े होते हैं। ये गैन्ट्री टनल खुदाई के दौरान मशीन के साथ चलते हैं और खुदाई, वॉटरप्रूफिंग और प्रीकास्ट टनल सेगमेंट लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करते हैं।

सावली शाफ्ट पर सीमित स्थान के कारण इंजीनियरों ने अत्यधिक सावधानी से गहराई में क्रमबद्ध तरीके से उपकरणों की इंस्टॉलेशन की है। यहां से टनलिंग का कार्य जुलाई से शुरू होने की योजना है।

इससे पहले, अहमदाबाद के मणिनगर क्षेत्र में एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की गई थी, जहां 1,360 मीट्रिक टन वजनी प्रीकास्ट पोर्टल बीम को चालू रेलवे लाइन के ऊपर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। 34 मीटर लंबे इस संरचना को करीब 3.5 घंटे में ट्रैफिक और पावर ब्लॉक के दौरान 2,200 टन क्षमता वाले क्रॉलर क्रेन की सहायता से लगाया गया।

करीब 508 किलोमीटर लंबा यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स से अहमदाबाद के साबरमती तक फैला है। इस परियोजना को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है और यह जापान की शिंकान्सेन तकनीक पर आधारित है।

परियोजना में एलिवेटेड वायाडक्ट, पुल और अंडरग्राउंड टनल शामिल हैं, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आर्थिक विकास में भी सहायक होगा। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से दोनों शहरों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुलेट ट्रेन परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का उद्देश्य मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय को कम करना है।
टीबीएम की असेंबली कहाँ हो रही है?
टीबीएम की असेंबली सावली में की जा रही है, जो घनसोली के निकट है।
इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की लंबाई कितनी है?
यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है।
इस परियोजना को कौन विकसित कर रहा है?
यह परियोजना नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही है।
जापान की शिंकान्सेन तकनीक का क्या महत्व है?
यह तकनीक तेज और सुरक्षित रेल यात्रा के लिए जानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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