चीन के लिए मध्य पूर्व संघर्ष से एशिया में नए रणनीतिक अवसर: एक विश्लेषण
सारांश
Key Takeaways
- चीन की रणनीति अमेरिका की व्यस्तता पर निर्भर है।
- मध्य पूर्व संघर्ष ने एशिया में चीन के लिए अवसर उत्पन्न किए हैं।
- चीन की गतिविधियों में वृद्धि सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष एशिया में चीन के लिए अपने प्रभाव को बढ़ाने के स्ट्रैटेजिक अवसर उत्पन्न कर सकता है, खासकर तब जब अमेरिका किसी अन्य मोर्चे पर व्यस्त है।
जापान फॉरवर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, “मध्य पूर्व का युद्ध केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्ट्रैटेजिक माहौल को भी बदल रहा है, जिसका प्रभाव दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परिस्थिति के कारण अमेरिका का ध्यान और संसाधन बंट जाते हैं, जिससे अन्य क्षेत्र उतने सुरक्षित नहीं रहते, और यह स्थिति चीन के लिए लाभकारी साबित होती है।
विश्लेषण में यह भी दर्शाया गया है कि चीन को लाभ उठाने के लिए खुद संकट उत्पन्न करने की आवश्यकता नहीं होती। चीन की नीति एशिया में संकट लाने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जब अमेरिका किसी अन्य जगह पर व्यस्त होता है, तब उसे अधिक लाभ होता है।
इतिहास के उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब भी अमेरिका मध्य पूर्व में अधिक उलझा रहा, तब-तब चीन ने एशिया में अपनी गतिविधियों को बढ़ाया। इराक युद्ध के दौरान, चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाई और उसे अधिक प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
इसी प्रकार, 2021 में जब अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल रहा था, तब चीन ने ताइवान के आस-पास सैन्य दबाव बढ़ा दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि ताइवान ने 900 से अधिक बार चीन के सैन्य विमानों को अपने एयर डिफेंस क्षेत्र में प्रवेश करते हुए रिकॉर्ड किया, जो बिना खुली लड़ाई के लगातार दबाव बनाने की रणनीति को दर्शाता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब अमेरिका अपने बड़े सैन्य संसाधनों, जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, को पूर्वी भूमध्य सागर या लाल सागर में तैनात करता है, तो वे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अनुपस्थित होते हैं। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ताकत का संतुलन बदल सकता है।
जापान फॉरवर्ड के अनुसार, चीन धीरे-धीरे और सोच-समझकर छोटे-छोटे कदम उठाने की रणनीति अपना रहा है, जैसे सैन्य अभ्यास और बुनियादी ढांचे का निर्माण, ताकि बिना सीधे टकराव के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की जा सके। हर छोटा कदम भले ही बड़ा संकट न लगे, लेकिन साथ में ये पूरे स्ट्रैटेजिक माहौल को बदल देते हैं, जिसे बाद में बदलना कठिन हो जाता है।
रिपोर्ट में भारत की उत्तरी सीमाओं का भी जिक्र किया गया है, विशेषकर 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और उसके बाद हुए निर्माण कार्यों को इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
जापान फॉरवर्ड ने कहा कि चीन की रणनीति सही समय और अवसर पर आधारित है। इसका उद्देश्य सीधे टकराव नहीं करना है, बल्कि धीरे-धीरे परिस्थितियों को अपने अनुकूल करना है।