राजस्थान का अनोखा गांव: जहां भगवान देव नारायण की आस्था और घरों में ताले नहीं लगते
सारांश
Key Takeaways
- गांव का नाम: देवमाली
- विशेषता: घरों में ताले नहीं लगते
- अवसर: बेस्ट टूरिज्म विलेज का खिताब
- मंदिर: भगवान देव नारायण का मंदिर
- सांस्कृतिक विरासत: प्राचीन मान्यताएँ और परंपराएँ
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक आस्था से भरे देवालय हैं, जिनकी उपस्थिति से ही भक्तों का मन खुश हो जाता है। सिर्फ देवालय ही नहीं, बल्कि उनके आसपास की जगहें भी खूबसूरत और अद्भुत कथाओं से भरी होती हैं। ऐसे ही एक गांव का नाम है देवमाली, जो भगवान नारायण को समर्पित है।
इस गांव की एक विशेषता है कि यहां के कच्चे घरों में कभी ताले नहीं लगते और इसे साल 2024 में 'बेस्ट टूरिज्म विलेज' का खिताब भी मिल चुका है।
राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला के बीच बसा देवमाली गांव आज पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया है। अजमेर जिले के ब्यावर क्षेत्र का यह छोटा सा गांव अपनी प्राचीन मान्यताओं और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। यहां की अनोखी परंपराओं ने इसे भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव बना दिया है।
केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग ने 2024 में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर देवमाली को 'बेस्ट टूरिज्म विलेज' का सम्मान दिया। यह पुरस्कार ब्यावर के पूर्व कलेक्टर और गांव की सरपंच ने ग्रहण किया था। राजस्थान पर्यटन विभाग भी इस गांव को विशेष रूप से प्रमोट कर रहा है।
देवमाली गांव भगवान देव नारायण को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, लगभग एक हजार वर्ष पहले जब देव नारायण यहां आए थे, तो गांव के सभी पत्थर और चट्टानें उन्हें नमन करने के लिए झुक गई थीं। गांव के चारों ओर झुकी हुई चट्टानें इस पौराणिक कथा की गवाही देती हैं।
देवमाली की सबसे बड़ी विशेषता यहां के घर हैं। गांव में कोई भी पक्का मकान नहीं बनाया जाता है। घर केवल पीली मिट्टी और गाय के गोबर से बनाए जाते हैं। हर दो-तीन महीने में इनकी लिपाई-पुताई होती है, जिसे शुद्धिकरण माना जाता है। गांववाले मानते हैं कि भगवान देव नारायण ने कहा था, “मेरा मंदिर पक्का रखो, तुम्हारे घर कच्चे रखो”। इस परंपरा का पालन आज भी सख्ती से किया जाता है। सबसे अनोखी बात यह है कि यहां के घरों में कभी ताले नहीं लगते।
गांववाले गर्व से कहते हैं कि सदियों से यहां न चोरी होती है और न कोई विवाद। चाहे कोई धनवान हो या साधारण किसान, सभी एक समान कच्चे घरों में रहते हैं। व्यसनों पर पूर्ण प्रतिबंध है; न शराब, न मांस का सेवन होता है। शनिवार को दूध नहीं बेचा जाता, बल्कि उसे खीर बनाकर या पड़ोसियों में बांट दिया जाता है।
देवमाली पर्यटकों को पारंपरिक ग्रामीण जीवन का अद्भुत अनुभव कराता है। यह गांव राष्ट्रीय राजमार्ग से केवल 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और अरावली की हरी-भरी वादियों से घिरा हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन देव नारायण मंदिर के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।