टीसीएस ने नासिक मामले में दोषी कर्मचारियों को किया निलंबित, शोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की पुष्टि
सारांश
Key Takeaways
- टीसीएस ने नासिक मामले में दोषी कर्मचारियों को सस्पेंड किया।
- कंपनी की जीरो टॉलरेंस नीति शोषण के खिलाफ है।
- अब तक नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
- कंपनी ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ सहयोग किया है।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया गया है।
नई दिल्ली, १२ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने रविवार को जानकारी दी कि उसने नासिक मामले में जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और वह अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रही है।
टीसीएस ने स्पष्ट किया कि कंपनी में शोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है और आगे की कार्रवाई जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी।
भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा निर्यातक कंपनी नासिक में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन की कथित घटनाओं के कारण जांच के दायरे में आ गई है।
खबरों के अनुसार, इस मामले में कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक महिला ने अपने सहकर्मी पर शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया।
जांच के दौरान पुलिस को और भी शिकायतें मिलीं, जिसके चलते आठ और एफआईआर दर्ज की गईं।
टीसीएस ने कहा कि उसने मामले की जानकारी मिलते ही तुरंत कार्रवाई की और जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित किया। कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि वह कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रही है।
कंपनी ने कहा कि आगे की कार्रवाई चल रही जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी।
अब तक, इस मामले में कम से कम छह कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये गिरफ्तारियां नासिक पुलिस आयुक्त कार्यालय को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई हैं।
इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने नासिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।