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वित्त मंत्री सीतारमण ने सीएम स्टालिन पर झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया

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वित्त मंत्री सीतारमण ने सीएम स्टालिन पर झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह नैरेटिव केंद्र सरकार की सलाह के खिलाफ है, जिसमें राज्यों से अधिक दालें और तिलहन उगाने के लिए कहा गया था।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री ने स्टालिन पर झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी।
खाद्य सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य का सहयोग आवश्यक है।
राज्यों को किसानों को उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
दालों और तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से आवश्यक है।

नई दिल्ली, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर कड़ी आलोचना की और उन पर एक झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। यह नैरेटिव केंद्र सरकार की उस सलाह के संदर्भ में था, जिसमें राज्यों से किसानों को अधिक दालें और तिलहन उगाने के लिए प्रेरित करने को कहा गया था।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों को भेजा गया यह संदेश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करने का एक निमंत्रण है। अधिकांश राज्य सरकारों ने इसे समझा और सहकारी संघवाद की भावना के साथ इसका उत्तर दिया। केवल सीएम स्टालिन ने इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की है।

सीतारमण ने कहा कि केंद्र-विरोधी बयानबाजी में समय बर्बाद करने के बजाय, सीएम स्टालिन को तमिलनाडु के लोगों को यह बताना चाहिए कि वे दालों और तिलहनों के मामले में हमें आत्मनिर्भर बनाने के बजाय विदेशी ताकतों को अवसर क्यों दे रहे हैं। जब आवश्यक खाद्य पदार्थों का आयात बढ़ता है, तो घरेलू खाद्य सुरक्षा बाहरी झटकों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाती है। यह एक विशाल देश जैसे भारत के लिए टिकाऊ स्थिति नहीं है। दालों और तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना केवल एक आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता भी है।

स्टालिन की चुनौती के उत्तर में, वित्त मंत्री ने राज्यों को भेजा गया पत्र सार्वजनिक किया। इस पत्र में बताया गया है कि चूंकि देश में धान और चावल का अतिरिक्त भंडार है, इसलिए राज्यों को किसानों को तिलहन और दालें उगाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिनकी अभी कमी है। पत्र में यह भी बताया गया है कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि असली खाद्य संप्रभुता तभी संभव है, जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करें और पानी की अधिक खपत करने वाली फसलों के बजाय आवश्यक फसलों पर ध्यान केंद्रित करें। सीतारमण ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक और निरंतर संवाद की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन वही कर रहे हैं, जिसमें उनकी पार्टी माहिर है: केंद्र और राज्यों के बीच दरार डालना, झूठे नैरेटिव गढ़ना और खुद को किसानों एवं तमिल लोगों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करना।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि क्या उन्हें यह नहीं पता कि पाम ऑयल का भारी आयात इसलिए हो रहा है क्योंकि खाद्य तेल की हमारी मांग का पूरा करना तिलहन की आपूर्ति से संभव नहीं हो पा रहा है? दालों के मामले में भी यही स्थिति है। किसान उन फसलों के लिए बेहतर दाम पा सकते हैं, जिनमें आपूर्ति और मांग के बीच अंतर होता है। स्पष्ट है कि सीएम स्टालिन को किसानों के हितों की कोई चिंता नहीं है।

सीतारमण ने बताया कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत दोहरे लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहता है: प्रोटीन से भरपूर फसलों तक बेहतर पहुंच के जरिए पोषण सुरक्षा और खाद्य तेल के आयात बिल को घटाकर आर्थिक स्थिरता

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीतारमण ने स्टालिन पर क्या आरोप लगाए?
सीतारमण ने स्टालिन पर झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया, जो केंद्र सरकार की सलाह के खिलाफ है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को क्या सलाह दी थी?
केंद्र सरकार ने राज्यों से किसानों को अधिक दालें और तिलहन उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की सलाह दी थी।
सीतारमण ने खाद्य सुरक्षा के लिए किस बात पर जोर दिया?
सीतारमण ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना चाहिए।
स्टालिन ने इस मुद्दे को क्यों सनसनीखेज बनाया?
सीतारमण के अनुसार, स्टालिन ने इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए सनसनीखेज बनाने की कोशिश की।
भारत को दालों और तिलहनों के उत्पादन में क्यों बढ़ावा देना चाहिए?
भारत को दालों और तिलहनों के उत्पादन में बढ़ावा देकर आर्थिक स्थिरता और पोषण सुरक्षा प्राप्त करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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