मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: 349 किमी वायाडक्ट तैयार, 9 साल बाद परियोजना ने पकड़ी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) — भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना — अब ज़मीन पर ठोस आकार लेती दिख रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अब तक 349 किलोमीटर वायाडक्ट स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और 443 किलोमीटर तक कंक्रीट पिलर खड़े किए जा चुके हैं। सितंबर 2017 में आधारशिला रखे जाने के करीब नौ साल बाद, परियोजना ने कई बड़े निर्माण पड़ाव पार किए हैं।
मुख्य निर्माण प्रगति
परियोजना को लागू करने वाली संस्था नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने बताया कि 179 किलोमीटर हिस्से में 7,700 से अधिक ओवरहेड इक्विपमेंट मास्ट लगाए जा चुके हैं। शोर नियंत्रण के लिए 288 किलोमीटर क्षेत्र में 5.7 लाख से अधिक नॉइज़ बैरियर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, 374 ट्रैक किलोमीटर तक ट्रैक बेड निर्माण पूरा हो चुका है। करीब 90 प्रतिशत ट्रैक एलिवेटेड कॉरिडोर पर होगा, जिसे यह वायाडक्ट ढाँचा सहारा देगा।
महाराष्ट्र की भूमिगत सुरंग और TBM की तैनाती
महाराष्ट्र का हिस्सा इस परियोजना का सबसे जटिल खंड माना जाता है। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से शिलफाटा तक बनने वाली 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग में से 5 किलोमीटर की खुदाई पूरी हो चुकी है। हाल ही में मुंबई के विक्रोली में देश की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन (TBM) का कटर हेड लॉन्च शाफ्ट में उतारा गया — इसका वज़न करीब 350 टन और व्यास 13.6 मीटर है। रेल मंत्री वैष्णव ने इसे किसी भी भारतीय रेलवे परियोजना में अब तक इस्तेमाल हुआ सबसे बड़ा कटर हेड बताया।
इस भूमिगत खंड में भारत की पहली अंडरसी रेल सुरंग भी शामिल है — करीब 7 किलोमीटर लंबी यह सुरंग ठाणे क्रीक के नीचे से गुज़रेगी। यह ऐसे समय में आया है जब जमीन अधिग्रहण विवाद और राजनीतिक अवरोध के कारण महाराष्ट्र में कई साल तक निर्माण धीमा रहा था।
स्टेशन नेटवर्क और गुजरात में प्रगति
यह कॉरिडोर महाराष्ट्र और गुजरात के कुल 12 स्टेशनों को जोड़ेगा। महाराष्ट्र में मुंबई (BKC), ठाणे, विरार और बोइसर स्टेशन होंगे, जबकि गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद/नडियाद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन बनाए जाएंगे। कॉरिडोर का एक छोटा हिस्सा दादरा और नगर हवेली से भी गुज़रेगा।
NHSRCL अधिकारियों के अनुसार, गुजरात में सूरत, बिलिमोरा, वापी, भरूच, आनंद और वडोदरा स्टेशनों के प्लाज़ा निर्माण के ठेके दिए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में तीनों एलिवेटेड स्टेशनों पर काम शुरू हो चुका है और मुंबई के भूमिगत BKC टर्मिनल की नींव का काम भी जारी है।
स्वदेशी ट्रेनें और परिचालन गति
गौरतलब है कि यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक पर आधारित है, लेकिन ट्रेनें अब भारत में ही निर्मित होंगी। 2024 के अंत में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने बेंगलुरु की कंपनी BEML को ₹867 करोड़ का अनुबंध दिया, जिसके तहत भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन तैयार की जाएगी। इन ट्रेनों की परिचालन गति करीब 250 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, अधिकतम गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है, और पूरा बुनियादी ढाँचा 320 किलोमीटर प्रति घंटा की क्षमता को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
यात्रा समय और आम जनता पर असर
अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर दो श्रेणी की सेवाएँ होंगी। एक्सप्रेस सेवा केवल सूरत और वडोदरा पर रुकेगी और मुंबई से अहमदाबाद की दूरी दो घंटे से थोड़े अधिक समय में तय करेगी। सभी स्टेशनों पर रुकने वाली सेवा यह सफर तीन घंटे से कम में पूरा करेगी। तुलना के लिए, फिलहाल पारंपरिक ट्रेनों से यह यात्रा करीब सात घंटे और वंदे भारत एक्सप्रेस से करीब साढ़े पाँच घंटे में होती है। आने वाले महीनों में निर्माण की गति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति यह तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपनी समयसीमा पर खरी उतरती है या नहीं।