मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का डिजाइन जारी, 280 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी देश की पहली हाई-स्पीड ट्रेन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने 18 मई 2026 को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर पर चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन का आधिकारिक डिजाइन सार्वजनिक किया। रेलवे मंत्रालय के नई दिल्ली स्थित कार्यालय में प्रस्तावित ट्रेन की तस्वीर गेट नंबर 4 पर प्रदर्शित की गई है, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दिशा में एक प्रतीकात्मक मील का पत्थर है।
कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएँ
508 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इससे पहले फरवरी में लोकसभा को यह जानकारी दी थी। इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन होंगे — मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती।
निर्माण की मौजूदा स्थिति
मंत्रालय के अनुसार, गुजरात के आठ स्टेशनों — वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती — पर नींव का काम पहले ही पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र के ठाणे, विरार और बोइसर में निर्माण कार्य अभी जारी है। अंडरग्राउंड बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन पर खुदाई का काम 91 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
पुल-निर्माण के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है — 17 नदी पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। गुजरात में नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती नदियों पर चार प्रमुख पुलों का काम जारी है, और महाराष्ट्र में चार अतिरिक्त नदी पुलों का निर्माण भी चल रहा है। घंसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है।
'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी ट्रेन सेट
MAHSR परियोजना सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत विकसित की जा रही है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और बेंगलुरु स्थित BEML लिमिटेड संयुक्त रूप से ऐसे ट्रेन सेट विकसित कर रही हैं जो 280 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति प्राप्त करने में सक्षम होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रेल-प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।
भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास
रेल मंत्री वैष्णव के अनुसार, परियोजना के लिए आवश्यक संपूर्ण 1,389.5 हेक्टेयर भूमि लागू कानूनों के तहत अधिग्रहित कर ली गई है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम के तहत प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। गुजरात और महाराष्ट्र सरकारों के समन्वय से पुनर्वास उपाय किए गए हैं और प्रभावित लोगों को अतिरिक्त लाभ भी प्रदान किए गए हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह परियोजना वर्षों की देरी और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों के बाद अब ठोस गति पकड़ती दिख रही है। डिजाइन के सार्वजनिक होने के साथ, अब निगाहें ट्रेन सेट के परीक्षण और परिचालन की समयसीमा पर टिकी हैं, जिसका आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है।