हीटवेव से बचाव: आयुष मंत्रालय और डीजीएचएस की व्यापक पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी

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हीटवेव से बचाव: आयुष मंत्रालय और डीजीएचएस की व्यापक पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी

सारांश

भीषण गर्मी के बीच आयुष मंत्रालय और डीजीएचएस ने एक साझा पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है — जो आधुनिक चिकित्सा सलाह को आयुर्वेद, सिद्ध, योग, यूनानी और होम्योपैथी के पारंपरिक उपायों से जोड़ती है। हीटस्ट्रोक को चिकित्सीय आपातकाल बताते हुए 108/102 हेल्पलाइन पर तत्काल संपर्क की सलाह दी गई है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय और डीजीएचएस ने 18 मई 2026 को हीटवेव से बचाव के लिए व्यापक पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी की।
शिशु, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और बाहर काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक संवेदनशील श्रेणी में।
हीटस्ट्रोक को चिकित्सीय आपातकाल बताया गया; तत्काल 108 / 102 हेल्पलाइन पर संपर्क की सलाह।
एडवाइजरी में आयुर्वेद, सिद्ध, योग, यूनानी और होम्योपैथी — पाँचों आयुष पद्धतियों के पारंपरिक उपाय शामिल।
छाछ, नारियल पानी, तरबूज, खीरा जैसे हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थों और शीतली प्राणायाम को अपनाने की सिफारिश।
आईएमडी की लू चेतावनियों का नियमित पालन करने और कार्यस्थलों पर छायादार विश्राम स्थल सुनिश्चित करने की सलाह।

देश के अनेक राज्यों में भीषण गर्मी और लू की बढ़ती स्थितियों के बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आयुष प्रभाग ने आयुष मंत्रालय के समन्वय से 18 मई 2026 को एक विस्तृत पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी आम नागरिकों से लेकर बाहर काम करने वाले श्रमिकों तक सभी के लिए हीट स्ट्रेस और गर्मी से जुड़ी बीमारियों से बचाव के उपाय सुझाती है।

किन्हें है सबसे अधिक खतरा

एडवाइजरी के अनुसार शिशु, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग, खुले में काम करने वाले श्रमिक तथा हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इन समूहों के लिए विशेष देखभाल और निरंतर निगरानी की आवश्यकता बताई गई है।

इसके अलावा बड़े जमावड़ों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने वालों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

बचाव के मुख्य उपाय

एडवाइजरी में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दिन के सबसे गर्म घंटों में सीधी धूप से बचने और हल्के सूती कपड़े पहनने पर विशेष जोर दिया गया है। मौसमी फलों और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर तरल पदार्थ — जैसे छाछ, नारियल पानी और नींबू-आधारित पेय — को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

कार्यस्थलों पर छायादार विश्राम स्थलों की व्यवस्था, नियमित जलपान अवकाश और श्रमिकों के लिए वातावरण के अनुकूल ढलने के उपाय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नियोक्ताओं पर डाली गई है।

खतरनाक लक्षण और आपातकालीन सहायता

एडवाइजरी में चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, मानसिक स्थिति में बदलाव, शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ना, निर्जलीकरण, दौरे पड़ना और बेहोशी को गर्मी से जुड़ी बीमारियों के गंभीर संकेत बताया गया है। 'हीटस्ट्रोक' (लू लगना) को चिकित्सीय आपातकाल घोषित करते हुए तत्काल आपातकालीन हेल्पलाइन 108 / 102 पर कॉल करने की सलाह दी गई है।

आयुष पद्धतियों से पारंपरिक बचाव

इस एडवाइजरी की विशेषता यह है कि इसमें आयुर्वेद, सिद्ध, योग, यूनानी और होम्योपैथी — सभी पाँच आयुष प्रणालियों — के पारंपरिक उपाय शामिल किए गए हैं। आयुर्वेद अनुभाग में 'निम्बुक फल पानक', 'आम्र प्रपानक' और 'चिंचा पानक' जैसी पारंपरिक औषधियों के सेवन की सलाह है।

सिद्ध और योग अनुभाग में शीतली प्राणायाम और सौम्य योग अभ्यासों को अपनाने की सिफारिश की गई है, जबकि यूनानी पद्धति में पारंपरिक शीतल पेय और हर्बल लेप लगाने का सुझाव दिया गया है।

आहार में क्या शामिल करें

नागरिकों को खीरा, तरबूज, नींबू, खरबूजा, लौकी और टमाटर जैसे हाइड्रेटिंग और शीतलता प्रदान करने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अपने दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी गई है। साथ ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी मौसम संबंधी अपडेट और लू की चेतावनियों का नियमित रूप से पालन करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की एकीकृत एडवाइजरी — जो आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक आयुष पद्धतियों को एक साथ जोड़ती है — हीटवेव प्रबंधन में एक सकारात्मक कदम है, और आने वाले हफ्तों में तापमान के और बढ़ने की संभावना को देखते हुए इसे समय पर जारी किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केवल कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाएगी। भारत में हर साल हीटवेव से सैकड़ों मौतें होती हैं, फिर भी ज़मीनी स्तर पर — विशेषकर प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण इलाकों में — जागरूकता की भारी कमी है। आयुष पद्धतियों को शामिल करना एक सराहनीय एकीकृत दृष्टिकोण है, परंतु इन उपायों की वैज्ञानिक प्रभावशीलता के प्रमाण अभी भी सीमित हैं और इन्हें आधुनिक चिकित्सा के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पूरक के रूप में ही देखा जाना चाहिए। असली कसौटी यह होगी कि यह एडवाइजरी उन तक कितनी पहुँचती है जिन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय की हीटवेव एडवाइजरी किसके लिए जारी की गई है?
यह एडवाइजरी आम जनता, संवेदनशील समूहों (शिशु, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ), नियोक्ताओं, बाहर काम करने वाले श्रमिकों और बड़े जमावड़ों व खेल आयोजनों में भाग लेने वालों के लिए जारी की गई है। इसका उद्देश्य हीट स्ट्रेस और गर्मी से जुड़ी बीमारियों से बचाव के व्यावहारिक उपाय सुझाना है।
हीटस्ट्रोक के लक्षण क्या हैं और क्या करें?
हीटस्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में चक्कर आना, तेज़ सिरदर्द, मतली, मानसिक स्थिति में बदलाव, शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ना, निर्जलीकरण, दौरे पड़ना और बेहोशी शामिल हैं। एडवाइजरी में इसे चिकित्सीय आपातकाल बताते हुए तत्काल हेल्पलाइन 108 या 102 पर कॉल करने की सलाह दी गई है।
गर्मी से बचाव के लिए आयुर्वेद में क्या उपाय सुझाए गए हैं?
आयुर्वेद अनुभाग में छाछ, नारियल पानी और नींबू-आधारित पेय के साथ 'निम्बुक फल पानक', 'आम्र प्रपानक' और 'चिंचा पानक' जैसी पारंपरिक औषधियों के सेवन की सलाह दी गई है। इसके अलावा गर्मी के मौसम के अनुकूल आहार अपनाने और खीरा, तरबूज, लौकी जैसे हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थ खाने की सिफारिश की गई है।
कार्यस्थलों पर नियोक्ताओं को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
एडवाइजरी के अनुसार नियोक्ताओं को कार्यस्थलों पर छायादार विश्राम स्थलों की व्यवस्था करनी चाहिए, श्रमिकों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए अवकाश देना चाहिए और वातावरण के अनुकूल ढलने के उपाय सुनिश्चित करने चाहिए। साथ ही हीट स्ट्रेस के लक्षणों के बारे में श्रमिकों में जागरूकता फैलाना भी अनिवार्य बताया गया है।
गर्मी में मौसम की चेतावनियाँ कहाँ से मिलेंगी?
एडवाइजरी में नागरिकों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी मौसम संबंधी अपडेट नियमित रूप से देखने और लू की चेतावनी के दौरान आवश्यक सावधानियाँ अपनाने की सलाह दी गई है। आईएमडी की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ये अपडेट उपलब्ध रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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