आयुष मंत्रालय की चेतावनी: हीट एग्जॉर्शन से हीट स्ट्रोक तक, जानें गर्मी से बचाव के ज़रूरी उपाय

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आयुष मंत्रालय की चेतावनी: हीट एग्जॉर्शन से हीट स्ट्रोक तक, जानें गर्मी से बचाव के ज़रूरी उपाय

सारांश

देशभर में भीषण गर्मी के बीच आयुष मंत्रालय ने हीट एग्जॉर्शन और हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय जारी किए हैं। चक्कर, ऐंठन या पसीना बंद होना खतरे के संकेत हैं — ORS लें, ठंडी जगह जाएँ और दोपहर की धूप से बचें। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।

Key Takeaways

आयुष मंत्रालय ने 29 अप्रैल 2026 को गर्मी से बचाव की एडवाइज़री जारी की। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। हीट एग्जॉर्शन और हीट स्ट्रोक के लक्षणों में चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन और पसीना बंद होना शामिल हैं। बचाव के लिए ORS , नींबू पानी, छाछ जैसे इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थ पीने की सलाह दी गई है। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में बाहर न निकलें; हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 29 अप्रैल 2026 को आम जनता से अपील की है कि भीषण गर्मी के बीच हीट एग्जॉर्शन और हीट स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों से बचने के लिए तत्काल सावधानियाँ बरती जाएँ। मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुँच गया है और आने वाले दिनों में और भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है।

गर्मी से जुड़ी बीमारियाँ: मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय के अनुसार, गर्मी से होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है यदि सही समय पर उचित कदम उठाए जाएँ। गर्मी के बढ़ते प्रकोप में सबसे आम समस्याएँ हीट एग्जॉर्शन (गर्मी से थकान) और हीट स्ट्रोक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अनेक हिस्सों में लू की लहरें तेज़ हो रही हैं और अस्पतालों में गर्मी संबंधी मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है।

खतरनाक लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अचानक अस्वस्थ महसूस करने लगे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। निम्नलिखित लक्षण खतरे का संकेत हो सकते हैं:

चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक पसीना आना या पसीना बंद हो जाना — ये सभी हीट स्ट्रोक के प्रारंभिक संकेत माने जाते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

तुरंत अपनाएँ ये बचाव के उपाय

आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

प्रभावित व्यक्ति को तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएँ और शरीर का तापमान बार-बार जाँचते रहें। इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल पदार्थ जैसे नींबू पानी, नमक-शक्कर का घोल, छाछ या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) का सेवन करें। सादे पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स से शरीर को हाइड्रेट रखें। लक्षण गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।

आम जनता पर असर: सबसे ज़्यादा खतरा किसे

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को गर्मी का सबसे अधिक खतरा होता है। इन वर्गों की विशेष देखभाल ज़रूरी है। गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में इन्हीं वर्गों में हीट स्ट्रोक के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।

आयुष मंत्रालय की अपील: क्या करें, क्या न करें

मंत्रालय ने सलाह दी है कि गर्मी के मौसम में हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें। घर के अंदर भी पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें। यदि अस्वस्थ महसूस हो तो तुरंत किसी ठंडी जगह पर जाएँ और पर्याप्त पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें। आने वाले हफ्तों में तापमान और बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन सावधानियों का पालन और भी ज़रूरी हो जाता है।

Point of View

लेकिन सलाह देना और उसे ज़मीन पर लागू करना दो अलग बातें हैं। हर साल गर्मी के मौसम में इसी तरह की अपीलें जारी होती हैं, फिर भी ग्रामीण और मज़दूर वर्ग — जो खेतों और निर्माण स्थलों पर दोपहर की कड़ी धूप में काम करने को मजबूर हैं — सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। असली ज़रूरत है कार्यस्थलों पर अनिवार्य विश्राम-समय, सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग सेंटर और कमज़ोर वर्गों तक सक्रिय पहुँच — केवल डिजिटल अपील पर्याप्त नहीं है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉर्शन में क्या अंतर है?
हीट एग्जॉर्शन गर्मी से होने वाली थकान की प्रारंभिक अवस्था है जिसमें अत्यधिक पसीना, कमज़ोरी और चक्कर आते हैं, जबकि हीट स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो सकता है। हीट स्ट्रोक में तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है।
गर्मी में ORS कब और कैसे लें?
ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन तब लेना चाहिए जब अत्यधिक पसीने, उल्टी या दस्त से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाए। इसे एक लीटर साफ पानी में घोलकर धीरे-धीरे पीना चाहिए; नींबू पानी और छाछ भी विकल्प हैं।
गर्मी में बाहर निकलने का सबसे सुरक्षित समय कौन सा है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय तापमान और UV विकिरण अपने चरम पर होते हैं। सुबह जल्दी या शाम को बाहर निकलना अपेक्षाकृत सुरक्षित है।
बच्चों और बुजुर्गों को गर्मी में विशेष देखभाल क्यों चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों और बुजुर्गों की शरीर की तापमान नियंत्रण क्षमता कमज़ोर होती है, जिससे उनमें हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। पहले से बीमार लोगों की दवाइयाँ भी गर्मी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती हैं, इसलिए इन वर्गों की विशेष निगरानी ज़रूरी है।
घर के अंदर गर्मी से कैसे बचें?
आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है कि घर के अंदर भी पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें, हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और नियमित रूप से पानी पीते रहें। खिड़कियों पर पर्दे लगाकर सीधी धूप को रोकना और कूलर या पंखे का उपयोग करना भी सहायक है।
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