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हीटवेव 2025: बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे बड़ा खतरा, NHM ने बताए 6 जरूरी बचाव उपाय

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हीटवेव 2025: बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे बड़ा खतरा, NHM ने बताए 6 जरूरी बचाव उपाय

सारांश

भीषण गर्मी में NHM की चेतावनी — बच्चों और बुजुर्गों को हीटवेव से सबसे ज्यादा खतरा। शरीर की ताप-नियंत्रण क्षमता कमजोर होने से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का जोखिम बढ़ता है। दोपहर 12-4 बजे घर में रहें, खूब पानी पिएं और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें।

मुख्य बातें

NHM के अनुसार बच्चों और बुजुर्गों को हीटवेव में सबसे अधिक खतरा होता है क्योंकि उनका शरीर तापमान को जल्दी नियंत्रित नहीं कर पाता।
हीट स्ट्रोक के लक्षण : चक्कर आना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना, अचानक कमजोरी और मतली — इन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बच्चों और बुजुर्गों को घर के भीतर रखें — इस समय धूप सबसे तीव्र होती है।
नियमित रूप से पानी, ORS, नींबू पानी और छाछ पिलाएं; शराब, कैफीन और अत्यधिक ठंडे पेय से बचाएं।
लू लगने पर तुरंत ठंडे पानी से शरीर पोंछें और हेल्पलाइन 104 पर संपर्क करें।
IMD ने अप्रैल-मई 2025 में उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक तापमान रहने का पूर्वानुमान दिया है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025। देशभर में हीटवेव (लू) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने चेतावनी दी है कि बच्चों और बुजुर्गों को इस भीषण गर्मी में सबसे अधिक जोखिम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों आयु वर्गों का शरीर बढ़ते तापमान को तेजी से नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। समय रहते सावधानी बरतकर इन खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

क्यों सबसे कमजोर हैं बच्चे और बुजुर्ग?

बच्चों का शरीर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी पसीने की ग्रंथियां कम सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। दूसरी ओर, बुजुर्गों में उम्र के साथ शरीर की ताप-नियंत्रण क्षमता कमजोर पड़ जाती है और कई बार दवाइयों के दुष्प्रभाव भी इस स्थिति को और गंभीर बना देते हैं।

NHM के अनुसार, इन दोनों वर्गों में लू लगने (Heat Stroke) की आशंका सामान्य वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक होती है। यह स्थिति तब और खतरनाक हो जाती है जब पहले से कोई बीमारी हो या पोषण की कमी हो।

लू लगने के प्रमुख लक्षण — इन्हें नजरअंदाज न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हीटवेव के मुख्य लक्षण इस प्रकार बताए हैं: अचानक चक्कर आना, तेज सिरदर्द, सामान्य से अधिक पसीना आना, अचानक कमजोरी महसूस होना और मतली या उल्टी जैसा अनुभव होना।

यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उन्हें ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं और बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक में हर मिनट की देरी जानलेवा हो सकती है।

NHM के 6 प्रभावी बचाव उपाय

1. पर्याप्त पानी पिएं: बच्चों और बुजुर्गों को बार-बार पानी पिलाएं। नींबू पानी, छाछ या ORS घोल भी दिया जा सकता है। तरल पदार्थों का नियमित सेवन डिहाइड्रेशन से बचाता है।

2. धूप से पूरी तरह बचाव करें: बाहर निकलते समय सिर पर टोपी, आंखों पर धूप का चश्मा और हल्के, ढीले, सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर की गर्मी आसानी से बाहर निकल सके।

3. दोपहर में घर के भीतर रहें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें। इस समय सूर्य की किरणें सर्वाधिक तीव्र होती हैं और लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

4. हल्का और पौष्टिक आहार लें: भोजन में अधिक तेल-मसाले वाले भारी खाने से परहेज करें। फल, सब्जियां, दही और हल्के भोजन को प्राथमिकता दें जो शरीर को ठंडक दे और आसानी से पच सके।

5. हानिकारक पेय पदार्थों से दूरी बनाएं: शराब, अधिक कैफीन वाले पेय और अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों से बचें क्योंकि ये शरीर के तापमान को असंतुलित कर सकते हैं। इनकी जगह प्राकृतिक शरबत या ताजे फलों का रस लें।

6. लगातार निगरानी रखें: बच्चों और बुजुर्गों पर हर समय ध्यान दें। यदि वे थकान, सुस्ती या खेलने-घूमने में अरुचि दिखाएं तो तुरंत आराम कराएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लें।

घर को ठंडा रखना भी उतना ही जरूरी

स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि गर्मी के मौसम में घरों में पंखे, कूलर या एयर कंडीशनर का उपयोग करें और कमरों को यथासंभव ठंडा रखें। खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाने से भी तापमान नियंत्रित रहता है।

यदि किसी को लू लगने का संदेह हो तो उसे तुरंत ठंडे पानी से नहलाएं, गीले कपड़े से शरीर पोंछें और नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क करें।

व्यापक परिप्रेक्ष्य — क्यों यह चेतावनी और भी अहम है?

गौरतलब है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अप्रैल-मई 2025 में उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक तापमान रहने का पूर्वानुमान दिया है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हीटवेव से होने वाली मौतों में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में जन जागरूकता और सामुदायिक तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार है।

आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे मई और जून का महीना नजदीक आएगा, तापमान और बढ़ने की संभावना है — इसलिए अभी से सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी एडवाइजरी जारी होती हैं — लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारी उतनी नहीं दिखती जितनी होनी चाहिए। विडंबना यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की तीव्रता साल-दर-साल बढ़ रही है, फिर भी शहरी गरीब बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में न कूलर है, न पर्याप्त पानी की आपूर्ति। बच्चे और बुजुर्ग सबसे कमजोर तबका हैं — और यही वह तबका है जो सरकारी सुविधाओं से सबसे दूर है। असली सवाल यह है कि क्या NHM की एडवाइजरी उन तक पहुंच रही है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है?
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हीटवेव में बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है?
बच्चों की पसीने की ग्रंथियां कम सक्रिय होती हैं और उनका शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता, जबकि बुजुर्गों में उम्र व दवाइयों के कारण ताप-नियंत्रण क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसीलिए NHM के अनुसार ये दोनों वर्ग हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के प्रति सबसे संवेदनशील होते हैं।
लू लगने के मुख्य लक्षण क्या हैं?
लू लगने पर चक्कर आना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना, अचानक कमजोरी और मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण दिखते ही व्यक्ति को तुरंत ठंडी जगह ले जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
हीटवेव से बचने के लिए दिन के किस समय घर में रहना चाहिए?
NHM की सलाह है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर के भीतर रहें क्योंकि इस दौरान सूर्य की किरणें सबसे तीव्र होती हैं। इस समय बाहर निकलना हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।
लू लगने पर तुरंत क्या करें?
लू लगने पर व्यक्ति को तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं, ठंडे पानी से शरीर पोंछें या नहलाएं और ORS या नींबू पानी दें। इसके साथ ही बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाएं या हेल्पलाइन नंबर 104 पर कॉल करें।
गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों को क्या खाना-पीना चाहिए?
उन्हें बार-बार पानी, नींबू पानी, छाछ या ORS घोल देना चाहिए और भोजन में फल, सब्जियां व दही को शामिल करें। तेल-मसाले वाला भारी खाना, शराब और अधिक कैफीन वाले पेय से बिल्कुल परहेज करें।
राष्ट्र प्रेस
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