27 जुलाई 2026
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उत्तर प्रदेश में रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें, यूजीसी ने 107 संस्थानों को नोटिस जारी किया

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उत्तर प्रदेश में रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें, यूजीसी ने 107 संस्थानों को नोटिस जारी किया

सारांश

लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस वर्ष रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें दर्ज हुई हैं। यूजीसी ने अनुपालन न करने वाले 107 संस्थानों को नोटिस जारी किया है। बढ़ती शिकायतें जागरूकता में वृद्धि का संकेत भी हो सकती हैं।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में इस वर्ष रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें दर्ज, पश्चिम बंगाल 75 के साथ दूसरे स्थान पर।
मध्य प्रदेश (63) , महाराष्ट्र (53) और बिहार (50) अगले तीन राज्य; दिल्ली में 27 शिकायतें।
यूजीसी ने 2025 में 18 मेडिकल कॉलेजों सहित 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
नोटिस का कारण: छात्रों से रैगिंग विरोधी वचन न लेना और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न करना।
यूजीसी प्रतिवर्ष दो बार संस्थानों को परामर्श जारी करता है; 24 घंटे हेल्पलाइन सक्रिय।

लोकसभा में 27 जुलाई 2026 को पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) में रैगिंग की सबसे अधिक 135 शिकायतें उत्तर प्रदेश से दर्ज की गई हैं, जबकि पश्चिम बंगाल 75 शिकायतों के साथ दूसरे स्थान पर है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 22 जुलाई 2026 तक के अद्यतन आंकड़ों के आधार पर साझा की।

राज्यवार शिकायतों की स्थिति

मध्य प्रदेश में 63, महाराष्ट्र में 53 और बिहार में 50 शिकायतें दर्ज होने के साथ ये तीनों राज्य क्रमशः तीसरे, चौथे और पाँचवें स्थान पर हैं। इसके अलावा राजस्थान में 44, कर्नाटक में 41, ओडिशा में 36 और दिल्ली में 27 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े सांसद सयानी घोष के एक प्रश्न के उत्तर में सदन के सामने रखे गए।

यूजीसी की कार्रवाई: 107 संस्थानों को नोटिस

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 2025 में एंटी-रैगिंग विनियम, 2009 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन न करने पर 18 मेडिकल कॉलेजों सहित 107 उच्च शिक्षा संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। मंत्री ने बताया कि इन नोटिसों में मुख्यतः दो कमियाँ उजागर हुई हैं — छात्रों और अभिभावकों से रैगिंग विरोधी वचन न लेना, तथा बार-बार निर्देश के बावजूद संस्थागत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न करना।

नियामक ढाँचा: सुधारात्मक और निवारक दृष्टिकोण

मजूमदार ने स्पष्ट किया कि यूजीसी का नियामक रवैया दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक और निवारक है, जिससे संस्थान कमियों को दूर करें और छात्र कल्याण सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि 2016 में यूजीसी ने मौजूदा नियमों में तीसरा संशोधन करते हुए रैगिंग की परिभाषा का दायरा विस्तृत किया था। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उच्च शिक्षा में प्रवेश दर लगातार बढ़ रही है और नए छात्रों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय चिंता बन चुकी है।

रैगिंग रोकने के लिए उठाए गए कदम

मंत्री ने बताया कि रैगिंग की रोकथाम के लिए कई ठोस उपाय लागू हैं, जिनमें शामिल हैं:

चौबीसों घंटे राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी हेल्पलाइन की सुविधा; प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में छात्रों और अभिभावकों द्वारा अनिवार्य ऑनलाइन वचन पत्र; संस्थानों के प्रॉस्पेक्टस में रैगिंग के गंभीर परिणामों का अनिवार्य उल्लेख; रैगिंग विरोधी कार्यशालाएँ और सेमिनार; तथा परिसरों में प्रमुख स्थानों पर रैगिंग विरोधी पोस्टर प्रदर्शित करना। इसके अलावा, यूजीसी प्रतिवर्ष दो बार उच्च शिक्षण संस्थानों को जागरूकता और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने हेतु परामर्श जारी करता है।

आगे की राह

मंत्री ने कहा कि छात्रों में बढ़ी जागरूकता और स्वयं रिपोर्टिंग की प्रवृत्ति नियामक ढाँचे की प्रभावशीलता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों की संख्या में वृद्धि को केवल नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए — यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि अधिक छात्र अब घटनाओं की रिपोर्ट करने में सहज महसूस कर रहे हैं। असली परीक्षा यह होगी कि इन शिकायतों पर समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा दो तरह से पढ़ा जा सकता है — अधिक घटनाएँ, या अधिक रिपोर्टिंग। यूजीसी का 107 संस्थानों को नोटिस देना दिखाता है कि अनुपालन अभी भी कागज़ों तक सीमित है। असली सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई — वह डेटा सरकार ने साझा नहीं किया। बिना परिणाम-आधारित जवाबदेही के, हेल्पलाइन और वचन पत्र महज औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस वर्ष किस राज्य में रैगिंग की सबसे अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं?
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें दर्ज की गई हैं। पश्चिम बंगाल 75 शिकायतों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश (63), महाराष्ट्र (53) और बिहार (50) अगले तीन राज्य हैं।
यूजीसी ने 107 संस्थानों को नोटिस क्यों जारी किया?
यूजीसी ने एंटी-रैगिंग विनियम, 2009 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन न करने पर 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इनमें मुख्य कमियाँ थीं — छात्रों और अभिभावकों से रैगिंग विरोधी वचन न लेना और बार-बार निर्देश के बावजूद संस्थागत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न करना।
रैगिंग रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने चौबीसों घंटे राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी हेल्पलाइन स्थापित की है और प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में छात्रों व अभिभावकों से अनिवार्य ऑनलाइन वचन पत्र लिया जाता है। इसके अलावा, यूजीसी प्रतिवर्ष दो बार संस्थानों को परामर्श जारी करता है और रैगिंग विरोधी कार्यशालाएँ व सेमिनार भी आयोजित किए जाते हैं।
यूजीसी ने रैगिंग की परिभाषा कब और कैसे बदली?
यूजीसी ने 2016 में मौजूदा नियमों में तीसरा संशोधन करते हुए रैगिंग की परिभाषा का दायरा विस्तृत किया। इस संशोधन का उद्देश्य बदलते परिवेश में रैगिंग के नए रूपों को भी कानूनी दायरे में लाना था।
लोकसभा में यह जानकारी किसने और कब दी?
शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में सांसद सयानी घोष के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। आंकड़े 22 जुलाई 2026 तक के अद्यतन डेटा पर आधारित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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