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योगी सरकार का गोकशी और गोतस्करी पर कड़ा प्रहार, 35,924 आरोपी सलाखों के पीछे

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योगी सरकार का गोकशी और गोतस्करी पर कड़ा प्रहार, 35,924 आरोपी सलाखों के पीछे

सारांश

योगी सरकार ने गोकशी और गोतस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन कर, अब अपराधियों पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है, जो प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने गोकशी पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है।
35,924 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
गोकशी के खिलाफ कठोर कानून बनाए गए हैं।
अर्थव्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सम्पत्तियों की जब्ती की गई है।
विशेष टीमों द्वारा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

लखनऊ, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योगी सरकार ने प्रदेश में गोकशी, गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कठोर कदम उठाए हैं, जो लगातार जारी हैं। गोकशी को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए और जून 2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश लागू किया गया।

इस कानून के तहत अब तक प्रदेश में गोकशी के 14,182 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यूपी सरकार का मानना है कि गोकशी पर रोक सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है। इसी दिशा में योगी सरकार द्वारा पुलिस, प्रशासन और विशेष कानूनों के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। गोकशी से जुड़े मामलों में आरोपियों के खिलाफ साधारण मुकदमे ही नहीं, बल्कि कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्यवाही की गई है।

गोकशी के मामलों में 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाही की गई, जबकि 178 आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया। इसके अतिरिक्त 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कठोर कार्यवाही की गई है। योगी सरकार की कड़ी कार्यवाही से गोकशी और गोतस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इस दौरान प्रदेश में सक्रिय गोकशी से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और आरोपियों की सम्पत्तियों की जांच की गई।

गोकशी के मामलों में गिरफ्तारी तक ही कार्यवाही सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपए की सम्पत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित सम्पत्ति को जब्त करके संगठित अपराधियों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके। इसके अलावा, अवैध कमाई से खरीदी गई भूमि, वाहन और अन्य सम्पत्तियों को भी कुर्क किया गया है।

योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों द्वारा खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के माध्यम से गोकशी-गोतस्करी के नेटवर्क को नष्ट किया गया। साथ ही, प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त को बढ़ाया गया और पशु परिवहन से जुड़े मामलों की विशेष निगरानी की गई। इसके अलावा, अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है।

उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को और कड़ा किया गया है। इस अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल की कठोर कारावास की सजा, 3 से 5 लाख तक जुर्माना और गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल और 3 लाख जुर्माना का प्रावधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखती है। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोकशी के मामलों में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक गोकशी के मामलों में 35,924 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
गोवध निवारण कानून में क्या संशोधन किया गया है?
2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन कर कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं, जैसे कि गोहत्या पर 10 साल की सजा।
गोकशी के खिलाफ कौन सी विशेष टीम बनाई गई है?
योगी सरकार ने गोकशी के खिलाफ पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया है।
गोकशी के मामलों में क्या आर्थिक कार्रवाई की गई है?
गैंगस्टर एक्ट के तहत लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपए की सम्पत्ति जब्त की गई है।
क्या गोकशी पर नियंत्रण के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया है?
जी हाँ, अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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