रुपया 95.29 के स्तर पर फिसला: कच्चे तेल में 6%25 उछाल और अमेरिका-ईरान तनाव से डॉलर मजबूत
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय रुपया 30 अप्रैल को 0.50%25 गिरकर 95.29 प्रति डॉलर पर पहुँचा, ICE पर 94.82 पर खुला था।
- इस साल की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.93%25 कमज़ोर हो चुका है।
- ब्रेंट क्रूड 6%25 से अधिक उछलकर $125 प्रति बैरल से ऊपर; WTI क्रूड 3%25 बढ़कर $110 प्रति बैरल — चार साल का उच्चतम स्तर।
- अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरें 3.5%25-3.75%25 पर स्थिर रखीं, महँगाई बढ़ने का संकेत दिया।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने की घोषणा की; ईरान ने पीछे हटने से इनकार किया।
- सेंसेक्स और निफ्टी में 1%25 से अधिक की गिरावट दर्ज।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गुरुवार, 30 अप्रैल को 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़क गया और सुबह 11:15 बजे IST पर 0.50 प्रतिशत गिरकर 95.29 पर पहुँच गया। कच्चे तेल की कीमतों में चार साल की ऊँचाई और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
रुपए की चाल और बाज़ार का हाल
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर रुपया 94.82 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में ही दबाव में आ गया। इस साल की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.93 प्रतिशत कमज़ोर हो चुका है, जो वैश्विक अनिश्चितता और लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। रुपए में कमज़ोरी के असर से भारतीय शेयर बाज़ार भी लाल निशान में रहा और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल में चार साल की ऊँचाई
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की आशंका के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 6 प्रतिशत से अधिक उछलकर $125 प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गया, जबकि WTI क्रूड 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर $110 प्रति बैरल हो गया। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे रुपए पर दबाव डालता है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष: तनाव की जड़
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि परमाणु समझौते पर सहमति बनने तक वह ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाएँगे। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ा रहा है।
अमेरिकी फेड का रुख और डॉलर की मज़बूती
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरें 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखी हैं। साथ ही, फेड ने संकेत दिया कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते महँगाई में इज़ाफा हो रहा है, जिससे डॉलर और मज़बूत हुआ है। गौरतलब है कि मज़बूत डॉलर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं — जिनमें रुपया भी शामिल है — पर दबाव बनाता है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान तनाव जल्द नहीं सुलझा, तो कच्चे तेल की कीमतें और चढ़ सकती हैं, जिससे रुपए पर दबाव बना रहेगा। आयात बिल बढ़ने से चालू खाता घाटा (CAD) भी प्रभावित हो सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की बाज़ार हस्तक्षेप नीति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।