अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 4 साल के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट क्रूड $125.5 प्रति बैरल
सारांश
Key Takeaways
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की आशंका के चलते 30 अप्रैल 2026 को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गईं। भारतीय समयानुसार सुबह 10:22 बजे बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 6.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ $125.5 प्रति बैरल पर जा पहुँचा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.35 प्रतिशत उछलकर $110 प्रति बैरल हो गया। इससे पहले कच्चे तेल की ऐसी कीमतें 2022 की शुरुआत में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखी गई थीं।
तनाव की जड़: होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध कर रखा है, जिसके चलते ईरान का तेल निर्यात लगभग ठप हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता, तब तक यह नाकेबंदी नहीं हटाई जाएगी। ईरान ने पहले शांति के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें ट्रंप ने ठुकरा दिया था — और अब ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर दावा किया गया है कि अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान में संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों से अवगत कराया है। इन रिपोर्टों ने दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है।
गोल्डमैन सैश ने बढ़ाया कीमतों का अनुमान
मध्य पूर्व में लगातार बने तनाव को देखते हुए अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैश ने 2026 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के लिए कच्चे तेल की औसत कीमतों के अनुमान में एक बार फिर संशोधन किया है। बैंक का अब अनुमान है कि इस अवधि में ब्रेंट क्रूड औसतन $90 प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड औसतन $83 प्रति बैरल रह सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले गोल्डमैन सैश ने इसी अवधि के लिए ब्रेंट क्रूड का दाम $80 प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम $75 प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था। यह संशोधन स्पष्ट संकेत देता है कि वैश्विक वित्तीय संस्थाएँ इस संकट को दीर्घकालिक मान रही हैं।
आपूर्ति पर गहरा असर
गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव के चलते वैश्विक बाज़ार से प्रतिदिन करीब 1.45 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाहर हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा माँग पहले से ही ऊँचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे आपूर्ति-माँग का असंतुलन और विकराल हो गया है।
भारत पर संभावित प्रभाव
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। कीमतों में यह उछाल देश के आयात बिल, ईंधन की खुदरा कीमतों और चालू खाता घाटे पर सीधा दबाव डाल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड $120 से ऊपर लंबे समय तक बना रहा, तो भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों की नज़र टिकी रहेगी।