सेंसेक्स 582 अंक टूटा, निफ्टी 23,997 पर बंद; अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड उछला
सारांश
Key Takeaways
बीएसई सेंसेक्स गुरुवार, 30 अप्रैल को 582.86 अंक यानी 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,913.50 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 180.10 अंक (0.74 प्रतिशत) फिसलकर 23,997.55 पर आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आने से वैश्विक बाज़ारों में दबाव बना, जिसका असर घरेलू बाज़ार पर भी पड़ा। यह इस सप्ताह का दूसरा कारोबारी सत्र रहा जब भारतीय शेयर बाज़ार में व्यापक बिकवाली देखी गई।
इंट्रा-डे उतार-चढ़ाव
दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स 77,014.21 पर खुला और 77,254.33 का इंट्रा-डे हाई तथा 76,258.86 का इंट्रा-डे लो दर्ज किया। निफ्टी50 23,996.95 पर खुलकर 24,087.45 के उच्च स्तर और 23,796.85 के निम्न स्तर को छुआ। इस प्रकार दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन के अंत में अपने निचले स्तरों से कुछ सुधार किया, लेकिन हरे निशान में वापसी नहीं हो सकी।
व्यापक बाज़ार और सेक्टरवार प्रदर्शन
व्यापक बाज़ारों में भी मंदी का रुख रहा — निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.98 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी (0.37 प्रतिशत की बढ़त) और निफ्टी फार्मा (0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त) को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।
निफ्टी मेटल में 2.12 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.68 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.50 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.35 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि धातु क्षेत्र की यह गिरावट वैश्विक माँग में सुस्ती की आशंकाओं को भी दर्शाती है।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी50 के 50 शेयरों में से 15 में तेजी और 34 में गिरावट रही, जबकि 1 शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ। बजाज ऑटो के शेयर 5.19 प्रतिशत की उछाल के साथ सबसे बड़े गेनर रहे। इसके अलावा सन फार्मा, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, मारुति और कोटक बैंक के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
दूसरी ओर, टीएमपीवी, इटरनल, हिंडाल्को, एचयूएल, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, श्रीराम फाइनेंस और ट्रेंट के शेयर सबसे अधिक दबाव में रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव: असली वजह
खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी को और सख्त करने का निर्देश दिया है। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसने वैश्विक बाज़ारों में निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाए हुए थे।
आगे की दिशा
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक अमेरिका-ईरान तनाव में कमी नहीं आती और क्रूड कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नज़र अब वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू तिमाही नतीजों पर भी टिकी रहेगी।