हज 2026: ओवैसी ने हवाई किराए में ₹10,000 की अतिरिक्त वसूली को बताया 'शोषण', रिजिजू से सर्कुलर वापस लेने की माँग

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हज 2026: ओवैसी ने हवाई किराए में ₹10,000 की अतिरिक्त वसूली को बताया 'शोषण', रिजिजू से सर्कुलर वापस लेने की माँग

सारांश

हज कमेटी ऑफ इंडिया ने मध्य पूर्व संकट का हवाला देते हुए प्रत्येक हज 2026 तीर्थयात्री से 100 डॉलर अतिरिक्त वसूलने का फैसला किया — यह उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो पहले ही ₹90,000 से अधिक चुका चुके हैं। AIMIM सांसद ओवैसी ने इसे 'शोषण' बताते हुए मंत्री रिजिजू से सर्कुलर वापस लेने की माँग की है।

Key Takeaways

  • हज कमेटी ऑफ इंडिया ने 28 अप्रैल 2026 को सर्कुलर जारी कर प्रत्येक तीर्थयात्री से 100 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹10,000) अतिरिक्त हवाई किराए की माँग की।
  • मध्य पूर्व संकट के कारण ATF कीमतों में वृद्धि को अतिरिक्त शुल्क का आधार बताया गया; एयरलाइंस ने 400 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी माँगी थी।
  • AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे "सरासर शोषण" करार दिया; मुंबई से यात्रियों से पहले ही ₹90,844 वसूले जा चुके हैं।
  • ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से सर्कुलर तत्काल वापस लेने और वसूली गई राशि लौटाने की माँग की।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हज 2026 के तीर्थयात्रियों से 'हवाई किराए में अंतर' के नाम पर अतिरिक्त ₹10,000 वसूले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। 30 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में उन्होंने इसे "सरासर शोषण" करार देते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से संबंधित सर्कुलर तत्काल वापस लेने की माँग की।

क्या है पूरा मामला

हज कमेटी ऑफ इंडिया ने 28 अप्रैल 2026 को एक पत्र जारी कर सभी हज तीर्थयात्रियों को सूचित किया कि मध्य पूर्व में जारी संकट से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों के मद्देनज़र, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हवाई चार्टर संचालन के लिए हवाई किराए में एकमुश्त संशोधन को मंज़ूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत प्रत्येक तीर्थयात्री को प्रस्थान बिंदु चाहे जो भी हो, 100 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹8,300-10,000) की अतिरिक्त राशि स्वयं वहन करनी होगी।

हज कमेटी ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय एयरलाइंस की उन बार-बार की गई गुज़ारिशों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिनमें मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी वृद्धि का हवाला देते हुए बेस फेयर में 400 अमेरिकी डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी की माँग की गई थी। कमेटी ने यह भी कहा कि यह फैसला तथ्यों की जाँच-पड़ताल और सभी संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद लिया गया है।

ओवैसी की आपत्ति और तर्क

ओवैसी ने अपनी पोस्ट में रेखांकित किया कि मुंबई से रवाना होने वाले प्रत्येक यात्री से कुछ महीने पहले ही ₹90,844 वसूले जा चुके हैं, जो आम यात्रियों के लिए उपलब्ध बाज़ार दरों से लगभग दोगुना है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या हज यात्री हज कमेटी के ज़रिए जाने की सज़ा भुगत रहे हैं?"

उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश हज तीर्थयात्री आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होते — वे इस पवित्र यात्रा के लिए वर्षों तक पैसे जोड़ते हैं। उनके लिए यह कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की एक अहम धार्मिक आकांक्षा है। ओवैसी ने माँग की कि इस सर्कुलर को तुरंत वापस लिया जाए और यात्रियों से ली गई अतिरिक्त राशि उन्हें लौटाई जाए।

सरकार की स्थिति

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने अभी तक ओवैसी की माँगों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से भी इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि हज यात्रा से जुड़े किराए और सब्सिडी के मुद्दे पर पहले भी राजनीतिक विवाद होते रहे हैं।

आम तीर्थयात्रियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब हज 2026 की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और हज़ारों तीर्थयात्री रवानगी की तैयारी कर रहे हैं। अतिरिक्त शुल्क की यह माँग उन परिवारों पर वित्तीय बोझ डालती है जो पहले ही भारी रकम जमा कर चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्प सूचना पर इस तरह के संशोधन तीर्थयात्रियों की योजनाओं को प्रभावित करते हैं और हज कमेटी की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसदीय और सामाजिक स्तर पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।

Point of View

जिसे घटाकर 100 डॉलर किया गया। लेकिन असली सवाल यह है कि यात्रा शुरू होने से ठीक पहले इस तरह का एकतरफा संशोधन क्यों? जो तीर्थयात्री पहले से ही बाज़ार दर से दोगुना किराया चुका चुके हैं, उनके लिए यह अल्पसूचना वाला बोझ न केवल वित्तीय, बल्कि विश्वास का भी संकट है। हज कमेटी की संरचनात्मक पारदर्शिता और किराया निर्धारण प्रक्रिया पर व्यापक बहस की ज़रूरत है — ओवैसी की आपत्ति राजनीतिक है, पर सवाल वैध हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

हज 2026 में हवाई किराए में कितनी बढ़ोतरी की गई है?
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने प्रत्येक तीर्थयात्री से प्रस्थान बिंदु चाहे जो भी हो, 100 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹10,000) की अतिरिक्त राशि वसूलने का फैसला किया है। यह संशोधन 28 अप्रैल 2026 को जारी सर्कुलर के ज़रिए लागू किया गया।
हज कमेटी ने हवाई किराया क्यों बढ़ाया?
कमेटी के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। एयरलाइंस ने बेस फेयर में 400 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी माँगी थी, जिसे परामर्श के बाद 100 डॉलर तक सीमित किया गया।
ओवैसी ने इस फैसले पर क्या कहा?
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे 'सरासर शोषण' बताया और कहा कि अधिकांश हज यात्री आर्थिक रूप से कमज़ोर होते हैं जो वर्षों तक बचत करके हज पर जाते हैं। उन्होंने मंत्री किरेन रिजिजू से सर्कुलर वापस लेने और वसूली गई राशि लौटाने की माँग की।
मुंबई से हज यात्रियों से पहले कितना किराया लिया गया था?
मुंबई से रवाना होने वाले प्रत्येक हज यात्री से कुछ महीने पहले ₹90,844 वसूले जा चुके थे, जो ओवैसी के अनुसार आम यात्रियों के लिए उपलब्ध बाज़ार दरों से लगभग दोगुना है।
क्या सरकार ने ओवैसी की माँगों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय या मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला संसदीय और सामाजिक स्तर पर और अधिक ध्यान आकर्षित कर सकता है।
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