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पुणे के कोंढवा में क्लोरीन गैस लीक से 17 अस्पताल में भर्ती, गंगाधाम चौक के पास फैली दहशत

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पुणे के कोंढवा में क्लोरीन गैस लीक से 17 अस्पताल में भर्ती, गंगाधाम चौक के पास फैली दहशत

सारांश

पुणे के कोंढवा में रात के अंधेरे में एक बंद जल शुद्धिकरण केंद्र का अनदेखा क्लोरीन सिलेंडर दहशत की वजह बन गया। 17 लोग अस्पताल में, बचावकर्मी भी प्रभावित — और एक बड़ा सवाल: महाराष्ट्र में पालघर के बाद भी खतरनाक रसायनों की निगरानी इतनी लापरवाह क्यों है?

मुख्य बातें

पुणे के कोंढवा में गंगाधाम चौक के पास केमिकल प्लांट से क्लोरीन गैस लीक, बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात हादसा।
कम से कम 17 लोग सांस की तकलीफ के बाद ससून जनरल अस्पताल समेत नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती।
अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी और एक जवान भी गैस की चपेट में आकर अस्पताल पहुँचे।
रिसाव बंद पड़े जल शुद्धिकरण केंद्र में बिना निगरानी के रखे क्लोरीन सिलेंडर से हुआ।
चार दमकल गाड़ियाँ तैनात; अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रण में होने की पुष्टि की।
2 मार्च को पालघर बोईसर एमआईडीसी में ओलियम गैस लीक से 2,600 से अधिक लोग प्रभावित हुए थे — यह घटना उसी श्रृंखला की कड़ी।

महाराष्ट्र के पुणे के कोंढवा इलाके में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गंगाधाम चौक के समीप स्थित एक केमिकल प्लांट के स्टोरेज टैंक से क्लोरीन गैस का रिसाव शुरू हो गया। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 17 लोगों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालांकि प्रभावितों की संख्या और बढ़ सकती है।

घटना का विवरण

शुरुआती जाँच में सामने आया कि क्लोरीन गैस से भरे एक सिलेंडर से रिसाव हुआ, जिसे पास में ही स्थित एक बंद पड़े जल शुद्धिकरण केंद्र में छोड़ा गया था। यह सिलेंडर लंबे समय से उस परिसर में बिना उचित निगरानी के पड़ा था, जिससे सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गौरतलब है कि क्लोरीन एक अत्यंत विषैली गैस है, जो कम सांद्रता में भी श्वसन तंत्र को नुकसान पहुँचा सकती है।

बचाव अभियान

सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कुल चार दमकल गाड़ियाँ मौके पर भेजीं, जिनमें ब्रीदिंग एपरेटस (बीए) सेट से लैस एक विशेष वाहन भी शामिल था। '108' सरकारी एम्बुलेंस के ज़रिए 14 प्रभावित लोगों को ससून जनरल अस्पताल और अन्य नज़दीकी चिकित्सा केंद्रों में पहुँचाया गया। प्रभावित इलाकों से निवासियों को भी तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।

बचावकर्मी भी हुए प्रभावित

इस हादसे में बचाव कर्मी भी नहीं बच सके। अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी और एक जवान की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी आपदा टल गई और स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। प्रभावित सभी लोग खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा नियमों पर सवाल

इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि एक बंद पड़ी जगह पर इतना खतरनाक रासायनिक पदार्थ बिना किसी निगरानी के कैसे जमा रह गया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में औद्योगिक सुरक्षा उल्लंघनों की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।

पालघर हादसे से तुलना

इससे पहले 2 मार्च को पालघर के बोईसर एमआईडीसी इलाके में स्थित एक केमिकल यूनिट में ओलियम गैस (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) का भारी रिसाव हुआ था, जिसके कारण 1,600 छात्रों सहित 2,600 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना पड़ा था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उस घटना का संज्ञान लेते हुए संभावित मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका जताई थी। कोंढवा की यह घटना महाराष्ट्र में रासायनिक सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं को और गहरा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे कोंढवा में क्लोरीन गैस लीक कैसे हुई?
शुरुआती जाँच के अनुसार, गंगाधाम चौक के पास स्थित एक बंद पड़े जल शुद्धिकरण केंद्र में रखे क्लोरीन गैस सिलेंडर से रिसाव हुआ। यह सिलेंडर बिना उचित निगरानी के उस परिसर में छोड़ा गया था।
कितने लोग प्रभावित हुए और उनकी स्थिति कैसी है?
कम से कम 17 लोगों को सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी और एक जवान भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी प्रभावित खतरे से बाहर हैं, हालांकि संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई थी।
बचाव के लिए क्या कदम उठाए गए?
अग्निशमन विभाग ने चार दमकल गाड़ियाँ तैनात कीं, जिनमें बीए सेट से लैस एक विशेष वाहन भी था। '108' एम्बुलेंस से 14 लोगों को ससून जनरल अस्पताल पहुँचाया गया और प्रभावित इलाके के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
क्या महाराष्ट्र में इस तरह की घटनाएँ पहले भी हुई हैं?
हाँ, 2 मार्च को पालघर के बोईसर एमआईडीसी में ओलियम गैस लीक से 1,600 छात्रों सहित 2,600 से अधिक लोगों को निकालना पड़ा था। NHRC ने उस घटना में मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका जताते हुए संज्ञान लिया था।
इस घटना की जाँच क्या पता लगाने की कोशिश कर रही है?
जाँच एजेंसियाँ यह पता लगा रही हैं कि एक बंद पड़ी जगह पर इतना खतरनाक रासायनिक पदार्थ बिना किसी निगरानी के कैसे जमा रह गया। इससे सुरक्षा नियमों के पालन और रासायनिक भंडारण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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