उत्तर प्रदेश में 14566 हेल्पलाइन: पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम
सारांश
Key Takeaways
- 14566 हेल्पलाइन ने पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाया है।
- समाज कल्याण विभाग की यह पहल पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देती है।
- इस हेल्पलाइन के माध्यम से 553 शिकायतों का प्रभावी निपटारा किया गया है।
- पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करना इस हेल्पलाइन का मुख्य लक्ष्य है।
- हर स्तर पर निगरानी सुनिश्चित की जाती है।
लखनऊ, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में सुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 14566 अत्याचार एवं उत्पीड़न हेल्पलाइन अब प्रदेश के पीड़ितों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बन चुकी है, जिसने समय पर कार्रवाई और पारदर्शिता के माध्यम से न्याय की उपलब्धता को और अधिक सुलभ बनाया है।
प्रदेश सरकार की यह स्पष्ट प्राथमिकता है कि किसी भी पीड़ित को न्याय से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इसी प्रतिबद्धता के साथ, 14566 हेल्पलाइन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए कुल 553 शिकायतों का समाधान किया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 628 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 75 डुप्लीकेट निकलीं। इन शिकायतों को अलग करने के बाद, शेष सभी मामलों का समय पर निपटारा किया गया।
मासिक आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल में 45, मई में 37, जून और जुलाई में 65-65, अगस्त में 57, सितंबर में 80, अक्टूबर में 79, नवंबर में 40, दिसंबर में 35, जनवरी में 37, फरवरी में 48 और मार्च में 40 शिकायतें दर्ज की गईं। प्रत्येक शिकायत को संबंधित जिले को तुरंत भेजा गया ताकि कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हेल्पलाइन की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाया गया है। जैसे ही कॉल आती है, शिकायत को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित जिले को भेजा जाता है, और विभागीय अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी जाती है ताकि हर स्तर पर निगरानी बनी रहे। कार्रवाई पूरी होने के बाद, पीड़ित से फीडबैक लेकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे वास्तविक न्याय मिला है या नहीं।
विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि किसी के साथ अत्याचार या उत्पीड़न की घटना होती है, तो वह बिना किसी संकोच के 14566 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकता है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निपटारा किया जा रहा है।