आरजी कर केस: सीबीआई की 4 सदस्यीय स्पेशल टीम कोलकाता पहुंची, दूसरी बरसी से पहले जांच में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार सदस्यों वाली एक विशेष टीम सोमवार, 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली मुख्यालय से कोलकाता पहुंची। यह टीम आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में अगस्त 2024 में एक जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच को नई गति देने के उद्देश्य से भेजी गई है। टीम का आगमन पीड़िता की मृत्यु की दूसरी बरसी (8 अगस्त) से ठीक पाँच दिन पहले हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
कोलकाता पहुंचने के तुरंत बाद स्पेशल टीम ने सीबीआई की कोलकाता यूनिट के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें जांच की अद्यतन स्थिति का आकलन किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल परिसर का दौरा कर उस सेमिनार रूम का निरीक्षण किया, जिसे अपराध की संदिग्ध जगह माना जाता है।
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को अस्पताल परिसर के इसी सेमिनार हॉल में युवा डॉक्टर का शव मिला था। जांचकर्ताओं के अनुसार, ड्यूटी के दौरान उसका दुष्कर्म और हत्या की गई थी।
जांच टीम में बदलाव और परिवार की चिंताएं
यह घटनाक्रम जांच दल में हाल ही में हुए अहम फेरबदल के बाद सामने आया है। पीड़िता के माता-पिता द्वारा जांच की धीमी रफ्तार और खामियों पर लगातार आपत्ति जताए जाने के बाद सीबीआई ने पूर्व जांच अधिकारी सीमा पाहुजा की जगह संदीपनी गर्ग को नियुक्त किया। परिवार का आरोप था कि पिछली जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई।
पिछले सप्ताह सीबीआई ने कोलकाता के सियालदह स्थित अदालत में नई जांच की प्रगति पर अपनी 11वीं स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले में शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस ने की थी, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस वर्ष की शुरुआत में सीबीआई को मामले की नए सिरे से जांच करने और नई टीम गठित करने का निर्देश दिया था।
इस जघन्य घटना के बाद पश्चिम बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे और न्याय की माँग उठी थी। यह हाल के वर्षों में किसी चिकित्सा पेशेवर से जुड़े सबसे हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में से एक माना जाता है।
दोषी और सजा
इस मामले में कोलकाता पुलिस से जुड़े पूर्व सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को एकमात्र दोषी पाया गया है, जो अभी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। हालांकि, पीड़िता के परिवार और कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने कथित तौर पर यह सवाल उठाया है कि क्या मामले में अन्य संलिप्तताओं की पर्याप्त जांच हुई।
आगे क्या होगा
नई स्पेशल टीम के कोलकाता दौरे और कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कोई नया मोड़ आता है या नहीं। 8 अगस्त को पीड़िता की दूसरी बरसी पर देशभर में न्याय की माँग को लेकर फिर से आवाजें उठने की संभावना है।