आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा आदेश — सीबीआई की 3 सदस्यीय SIT करेगी नए सिरे से जांच

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आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा आदेश — सीबीआई की 3 सदस्यीय SIT करेगी नए सिरे से जांच

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर रेप-मर्डर केस में सीबीआई की मौजूदा जांच को अपर्याप्त मानते हुए 3 सदस्यीय नई SIT गठित करने का आदेश दिया है। पीड़िता के परिजनों की लंबी लड़ाई को अदालत ने उचित ठहराया — यह मामला अब एक बार फिर नए सिरे से शुरू होगा।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 मई 2026 को आरजी कर रेप-मर्डर केस में सीबीआई को नए सिरे से जांच का आदेश दिया।
जांच 3 सदस्यीय SIT करेगी, जिसका नेतृत्व सीबीआई के संयुक्त निदेशक रैंक का अधिकारी करेगा।
मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित; सीबीआई को प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
ट्रायल कोर्ट पहले ही आरोपी संजय रॉय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना चुका है; सीबीआई ने फांसी की माँग की है।
पीड़िता के परिजनों ने सीबीआई पर लापरवाही से जांच करने का आरोप लगाया था, जिसे अदालत ने उचित माना।

कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 21 मई 2026 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि यह जांच सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा की जाए, जिसका नेतृत्व सीबीआई के संयुक्त निदेशक रैंक का वरिष्ठ अधिकारी करेगा। पीड़िता के परिजनों की दोबारा जांच की माँग को अदालत ने उचित मानते हुए यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया।

अदालत का आदेश और अगली सुनवाई

न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने गुरुवार दोपहर पीड़िता के परिजनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। बेंच ने सीबीआई को 24 जून को होने वाली अगली सुनवाई में जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। गौरतलब है कि नई बेंच के समक्ष यह इस मामले की दूसरी सुनवाई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता स्थित सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार रूम में एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव मिला था। कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म और हत्या की गई थी। इस मामले ने देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया और चिकित्सा समुदाय में सुरक्षा को लेकर बड़ा आंदोलन छिड़ गया।

जांच का सफर: पुलिस से सीबीआई तक

प्रारंभ में इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस की SIT ने की, जिसके दौरान शहर पुलिस से जुड़े पूर्व सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली और संजय रॉय को ही मुख्य आरोपी ठहराया। ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालाँकि सीबीआई ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए आरोपी के लिए फांसी की सजा की माँग की है।

परिजनों की आपत्ति और नई बेंच का गठन

पीड़िता के परिजन सीबीआई की जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने हाईकोर्ट में नई जांच की माँग करते हुए आरोप लगाया कि सीबीआई ने मामले की जांच लापरवाही से की और केवल कोलकाता पुलिस की प्रारंभिक जांच को ही आगे बढ़ाया। इससे पहले यह मामला न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की बेंच के समक्ष था, लेकिन उस बेंच ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद केस वर्तमान बेंच को सौंपा गया।

आगे क्या होगा

नई SIT के गठन और उसके जांच के दायरे पर सभी की निगाहें टिकी हैं। 24 जून की सुनवाई में सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि नई जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित होगी। यह मामला न केवल न्याय की माँग का प्रतीक बन चुका है, बल्कि देश में महिला डॉक्टरों की कार्यस्थल सुरक्षा पर बहस को भी नई धार दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अदालतें आमतौर पर केंद्रीय एजेंसियों की जांच को इस तरह पुनर्निर्देशित नहीं करतीं। असली सवाल यह है कि नई SIT उन बिंदुओं की जांच करेगी या नहीं जो पहली जांच में छूट गए — जैसे कि क्या घटनास्थल पर साक्ष्य संरक्षण में चूक हुई। संजय रॉय को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, ऐसे में नई जांच के निष्कर्ष अगर पहले से अलग निकले तो यह कानूनी और नैतिक दोनों स्तरों पर जटिल स्थिति पैदा करेगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर मामले में नई जांच का आदेश क्यों दिया?
पीड़िता के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सीबीआई ने मामले की जांच लापरवाही से की और केवल कोलकाता पुलिस की प्रारंभिक जांच को ही आगे बढ़ाया। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की बेंच ने इस माँग को उचित मानते हुए 21 मई 2026 को नई SIT जांच का आदेश दिया।
नई SIT का नेतृत्व कौन करेगा और इसमें कितने सदस्य होंगे?
अदालत के आदेश के अनुसार, सीबीआई की 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) नए सिरे से जांच करेगी। इस SIT का नेतृत्व सीबीआई के संयुक्त निदेशक रैंक का वरिष्ठ अधिकारी करेगा।
आरजी कर मामले में अब तक क्या हुआ है?
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म और हत्या हुई। पहले कोलकाता पुलिस की SIT ने जांच की, फिर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी संजय रॉय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि सीबीआई ने फांसी की माँग करते हुए हाईकोर्ट में अपील की है।
अगली सुनवाई कब होगी और अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं?
मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित है। अदालत ने सीबीआई को उस तारीख पर नई जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच क्यों बदली?
पहले यह मामला न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की डिवीजन बेंच के समक्ष था, लेकिन उस बेंच ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। इसके बाद यह केस न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की नई बेंच को सौंपा गया।
राष्ट्र प्रेस
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