आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा आदेश — सीबीआई की 3 सदस्यीय SIT करेगी नए सिरे से जांच
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 21 मई 2026 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि यह जांच सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा की जाए, जिसका नेतृत्व सीबीआई के संयुक्त निदेशक रैंक का वरिष्ठ अधिकारी करेगा। पीड़िता के परिजनों की दोबारा जांच की माँग को अदालत ने उचित मानते हुए यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया।
अदालत का आदेश और अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने गुरुवार दोपहर पीड़िता के परिजनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। बेंच ने सीबीआई को 24 जून को होने वाली अगली सुनवाई में जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। गौरतलब है कि नई बेंच के समक्ष यह इस मामले की दूसरी सुनवाई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता स्थित सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार रूम में एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव मिला था। कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म और हत्या की गई थी। इस मामले ने देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया और चिकित्सा समुदाय में सुरक्षा को लेकर बड़ा आंदोलन छिड़ गया।
जांच का सफर: पुलिस से सीबीआई तक
प्रारंभ में इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस की SIT ने की, जिसके दौरान शहर पुलिस से जुड़े पूर्व सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली और संजय रॉय को ही मुख्य आरोपी ठहराया। ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालाँकि सीबीआई ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए आरोपी के लिए फांसी की सजा की माँग की है।
परिजनों की आपत्ति और नई बेंच का गठन
पीड़िता के परिजन सीबीआई की जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने हाईकोर्ट में नई जांच की माँग करते हुए आरोप लगाया कि सीबीआई ने मामले की जांच लापरवाही से की और केवल कोलकाता पुलिस की प्रारंभिक जांच को ही आगे बढ़ाया। इससे पहले यह मामला न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की बेंच के समक्ष था, लेकिन उस बेंच ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद केस वर्तमान बेंच को सौंपा गया।
आगे क्या होगा
नई SIT के गठन और उसके जांच के दायरे पर सभी की निगाहें टिकी हैं। 24 जून की सुनवाई में सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि नई जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित होगी। यह मामला न केवल न्याय की माँग का प्रतीक बन चुका है, बल्कि देश में महिला डॉक्टरों की कार्यस्थल सुरक्षा पर बहस को भी नई धार दे रहा है।