आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का सीबीआई को आदेश, अस्पताल परिसर की सभी संदिग्ध जगहें तुरंत सील करें

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आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का सीबीआई को आदेश, अस्पताल परिसर की सभी संदिग्ध जगहें तुरंत सील करें

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर अस्पताल की सभी संदिग्ध जगहें सील करने का आदेश दिया — वह सेमिनार रूम जहाँ शव मिला था, और तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का कार्यालय भी। पीड़ित परिवार के साक्ष्य छेड़छाड़ के आरोपों के बीच यह न्यायिक हस्तक्षेप जाँच की दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 19 मई 2026 को सीबीआई को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर की सभी संदिग्ध जगहें तुरंत सील करने का आदेश दिया।
अस्पताल का वह सेमिनार रूम जहाँ 9 अगस्त 2024 को पीड़िता का शव मिला था, पहले से सील है; अब तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर भी सील करने का आदेश।
जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच ने मामले में अपनी पहली सुनवाई पूरी की।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 15 मई को यह मामला नई बेंच को सौंपा था, 12 मई को जस्टिस मंथा के खुद को अलग करने के बाद।
अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित; पीड़ित परिवार का आरोप है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ हुई है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 19 मई 2026 को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को कड़ा निर्देश दिया कि वह उत्तर कोलकाता स्थित आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में उन सभी स्थानों को तत्काल प्रभाव से सील करे, जिनका 9 अगस्त 2024 को हुई महिला जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की घटना से कोई भी संबंध हो सकता है। पीड़िता के परिवार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने इस मामले में अपनी पहली सुनवाई पूरी करते हुए सीबीआई को विशेष रूप से निर्देशित किया कि अस्पताल के उस सेमिनार रूम की सील अखंड बनी रहे, जहाँ 9 अगस्त 2024 की सुबह पीड़िता का शव बरामद हुआ था। सुनवाई के दौरान जब सीबीआई के वकील ने पुष्टि की कि सेमिनार रूम सील है, तब पीड़ित परिवार के वकील ने न्यायालय को सूचित किया कि अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर अभी तक सील नहीं किया गया है।

इस पर बेंच ने सीबीआई से तीखा सवाल किया कि क्या निष्पक्ष जाँच के लिए केवल सेमिनार रूम को सील करना पर्याप्त था और अन्य संदिग्ध स्थानों को क्यों नहीं सील किया गया। अंततः न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि परिसर की समस्त संदिग्ध जगहें — जिनमें संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर भी शामिल हैं — तुरंत सील की जाएँ।

संदीप घोष का विवादास्पद रोल

गौरतलब है कि संदीप घोष का नाम इस बलात्कार-हत्या मामले के अतिरिक्त अस्पताल में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भी पहले से विवादों में रहा है। पीड़ित परिवार लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि घटनास्थल पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है और उन्हें अब तक घटनास्थल का दौरा करने की अनुमति नहीं दी गई है।

बेंच बदलने की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब 12 मई को जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 15 मई को यह प्रकरण जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच को सौंपा। यह इस संवेदनशील मामले में तीसरी बेंच है, जो प्रक्रियागत जटिलताओं की ओर संकेत करती है।

आम जनता और पीड़ित परिवार पर असर

पीड़िता के परिवार के लिए यह आदेश एक महत्वपूर्ण कदम है। परिवार का तर्क रहा है कि जब तक सभी संदिग्ध स्थानों को सील नहीं किया जाता, तब तक साक्ष्य सुरक्षित नहीं रह सकते और जाँच की विश्वसनीयता संदिग्ध बनी रहती है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप सीबीआई की जाँच प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी को और कड़ा करता है।

आगे क्या होगा

न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित की है। सीबीआई को इस तिथि से पहले परिसर की सभी संदिग्ध जगहों को सील करने की कार्रवाई पूरी करनी होगी और न्यायालय को इसकी अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो साक्ष्य संरक्षण की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह पहली बार नहीं है कि किसी हाई-प्रोफाइल मामले में न्यायालय को जाँच एजेंसी को बुनियादी प्रक्रियाओं की याद दिलानी पड़ी हो। तीन बेंचों का बदलना और पीड़ित परिवार का घटनास्थल से वंचित रहना — ये संकेत देते हैं कि न्याय की राह अभी लंबी और जटिल है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 19 मई 2026 को सीबीआई को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर की उन सभी जगहों को तुरंत सील करने का आदेश दिया, जिनका अगस्त 2024 की बलात्कार-हत्या घटना से संबंध हो सकता है। इसमें तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर भी शामिल हैं।
आरजी कर रेप-मर्डर केस क्या है?
9 अगस्त 2024 को उत्तर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार रूम में एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। मामले में बलात्कार और हत्या के आरोप हैं और सीबीआई इसकी जाँच कर रही है।
संदीप घोष कौन हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है?
संदीप घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल हैं। वे बलात्कार-हत्या मामले के अलावा अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भी विवादों में रहे हैं। उनके कार्यालय को अब तक सील न करने पर न्यायालय ने सीबीआई से सवाल किया।
इस मामले में नई बेंच का गठन क्यों हुआ?
12 मई को जस्टिस राजशेखर मंथा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 15 मई को यह मामला जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच को सौंपा।
अगली सुनवाई कब होगी और पीड़ित परिवार की क्या माँग है?
अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित है। पीड़ित परिवार लंबे समय से घटनास्थल का दौरा करने की अनुमति माँग रहा है और आरोप लगा रहा है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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