आरजी कर रेप-मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट का सीबीआई को आदेश, अस्पताल परिसर की सभी संदिग्ध जगहें तुरंत सील करें
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 19 मई 2026 को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को कड़ा निर्देश दिया कि वह उत्तर कोलकाता स्थित आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में उन सभी स्थानों को तत्काल प्रभाव से सील करे, जिनका 9 अगस्त 2024 को हुई महिला जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की घटना से कोई भी संबंध हो सकता है। पीड़िता के परिवार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने इस मामले में अपनी पहली सुनवाई पूरी करते हुए सीबीआई को विशेष रूप से निर्देशित किया कि अस्पताल के उस सेमिनार रूम की सील अखंड बनी रहे, जहाँ 9 अगस्त 2024 की सुबह पीड़िता का शव बरामद हुआ था। सुनवाई के दौरान जब सीबीआई के वकील ने पुष्टि की कि सेमिनार रूम सील है, तब पीड़ित परिवार के वकील ने न्यायालय को सूचित किया कि अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर अभी तक सील नहीं किया गया है।
इस पर बेंच ने सीबीआई से तीखा सवाल किया कि क्या निष्पक्ष जाँच के लिए केवल सेमिनार रूम को सील करना पर्याप्त था और अन्य संदिग्ध स्थानों को क्यों नहीं सील किया गया। अंततः न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि परिसर की समस्त संदिग्ध जगहें — जिनमें संदीप घोष का कार्यालय और चैंबर भी शामिल हैं — तुरंत सील की जाएँ।
संदीप घोष का विवादास्पद रोल
गौरतलब है कि संदीप घोष का नाम इस बलात्कार-हत्या मामले के अतिरिक्त अस्पताल में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भी पहले से विवादों में रहा है। पीड़ित परिवार लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि घटनास्थल पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है और उन्हें अब तक घटनास्थल का दौरा करने की अनुमति नहीं दी गई है।
बेंच बदलने की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब 12 मई को जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 15 मई को यह प्रकरण जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की नई डिवीजन बेंच को सौंपा। यह इस संवेदनशील मामले में तीसरी बेंच है, जो प्रक्रियागत जटिलताओं की ओर संकेत करती है।
आम जनता और पीड़ित परिवार पर असर
पीड़िता के परिवार के लिए यह आदेश एक महत्वपूर्ण कदम है। परिवार का तर्क रहा है कि जब तक सभी संदिग्ध स्थानों को सील नहीं किया जाता, तब तक साक्ष्य सुरक्षित नहीं रह सकते और जाँच की विश्वसनीयता संदिग्ध बनी रहती है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप सीबीआई की जाँच प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी को और कड़ा करता है।
आगे क्या होगा
न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित की है। सीबीआई को इस तिथि से पहले परिसर की सभी संदिग्ध जगहों को सील करने की कार्रवाई पूरी करनी होगी और न्यायालय को इसकी अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।