सड़क पर नमाज विवाद: योगी के बयान पर संत समाज का समर्थन, सीपीआई(एम) ने कहा — सबके लिए एक नीति लागू करो

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सड़क पर नमाज विवाद: योगी के बयान पर संत समाज का समर्थन, सीपीआई(एम) ने कहा — सबके लिए एक नीति लागू करो

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज विरोधी बयान ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। संत समाज ने इसे सही ठहराया तो सीपीआई(एम) ने सवाल उठाया — अगर नियम बनाना है तो सभी के लिए बराबरी से बनाओ।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने का विरोध करते हुए बयान दिया।
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अष्टकौशल महंत योगानंद गिरि ने बयान का स्वागत किया, कहा — सड़क इबादत के लिए नहीं।
महंत ने कहा कि श्रावण और नवरात्रि में हिंदू श्रद्धालु भी सड़क पर पूजा नहीं करते।
सीपीआई(एम) सांसद हन्नान मोल्ला ने इसे दोहरी नीति बताया, सभी समुदायों पर समान नियम लागू करने की माँग की।
विवाद ने सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट और निष्पक्ष नीति की बहस को नई धार दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने के विरोध में दिए गए बयान को लेकर देशभर में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। जहाँ श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संत समाज ने इस बयान का खुलकर स्वागत किया है, वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] ने इसे सरकार की दोहरी नीति करार देते हुए सभी के लिए समान नियम लागू करने की माँग की है।

संत समाज की प्रतिक्रिया

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अष्टकौशल महंत योगानंद गिरि ने कहा, 'नमाज के संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा दिया गया बयान जितनी भी तारीफ की जाए, उतनी कम है। असल में, सड़कें केवल आवागमन और परिवहन के लिए होती हैं, न कि नमाज अदा करने के लिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की इबादत सड़क पर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सड़क आम जनमानस के लिए बनाई गई है।

महंत योगानंद गिरि ने यह भी कहा कि सड़क पर जुलूस और शोभायात्रा निकाली जा सकती है, परंतु धार्मिक इबादत के लिए सड़क का उपयोग उचित नहीं है। उनके अनुसार, 'अगर सड़क पर नमाज करनी है तो मस्जिद को हटा दो। मस्जिद में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि नमाज पूरी अकीदत यानी श्रद्धा के साथ पढ़ी जा सके।'

हिंदू पर्वों का हवाला

महंत ने तुलनात्मक तर्क देते हुए कहा कि श्रावण मास में शिवालयों और नवरात्रि के अवसर पर दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन हिंदू श्रद्धालु सड़कों पर बैठकर पूजा नहीं करते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के इस फैसले से संत समाज पूरी तरह प्रसन्न है।

सीपीआई(एम) की आलोचना

सीपीआई(एम) सांसद हन्नान मोल्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सरकार की दोहरी नीति बताया। उन्होंने कहा, 'ठीक है, अगर यह सरकारी नीति है तो इसे ईमानदारी से लागू करें। मुसलमान सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ेंगे, लेकिन कुछ लोग पूरे दिन सड़कों पर कब्जा करके गुंडागर्दी करते हैं, जिससे सड़कें महीनों तक बंद रहती हैं।'

हन्नान मोल्ला ने आगे कहा, 'सरकार को दोहरी राजनीति नहीं करनी चाहिए। अगर सच्चे तौर पर ईमानदारी दिखानी है तो सबके साथ समान रूप से नीति बनाओ।' उनका यह बयान इस विवाद को धार्मिक पक्षपात बनाम सार्वजनिक व्यवस्था की बहस के केंद्र में ले जाता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद नया नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों के उपयोग को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है। सीपीआई(एम) का तर्क है कि यदि सड़क पर किसी भी धर्म की गतिविधि प्रतिबंधित करनी है, तो यह नियम सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

आगे क्या

इस विवाद के राजनीतिक असर अभी सामने आने बाकी हैं। विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है। सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट और समान नीति की माँग अब विभिन्न पक्षों से उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सीपीआई(एम) का 'समान नीति' वाला तर्क उस असली कमज़ोरी को उजागर करता है जो इस विवाद के केंद्र में है — क्या सरकार वाकई सभी धर्मों पर एक जैसा मापदंड लागू करती है? संत समाज की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन जब तक सड़क पर होने वाले हर धार्मिक आयोजन — चाहे वह किसी भी समुदाय का हो — पर एक समान नियम न बने, यह बहस राजनीतिक हथियार बनी रहेगी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि सार्वजनिक स्थल प्रबंधन का मुद्दा धर्म-तटस्थ प्रशासनिक नीति की माँग करता है, न कि चुनिंदा बयानबाज़ी की।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने का विरोध किया है। उनका कहना है कि सड़कें आवागमन के लिए हैं, धार्मिक इबादत के लिए नहीं।
संत समाज ने योगी के बयान का स्वागत क्यों किया?
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महंत योगानंद गिरि ने कहा कि सड़कें केवल परिवहन के लिए हैं और किसी भी धर्म की इबादत सड़क पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू श्रद्धालु भी श्रावण या नवरात्रि में सड़क पर पूजा नहीं करते।
सीपीआई(एम) ने इसे दोहरी नीति क्यों कहा?
सीपीआई(एम) सांसद हन्नान मोल्ला का तर्क है कि यदि सड़क पर धार्मिक गतिविधि प्रतिबंधित करनी है तो यह नियम सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सड़कें महीनों तक बंद रखते हैं, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस विवाद का आम जनता पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों के नियमन को लेकर एक व्यापक नीतिगत बहस की ओर इशारा करता है। यदि सरकार स्पष्ट और समान नीति नहीं बनाती, तो यह मामला सामाजिक तनाव का कारण बन सकता है।
क्या उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज को लेकर पहले भी विवाद हुए हैं?
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद पहले भी उठते रहे हैं। यह मामला उस दीर्घकालिक बहस का हिस्सा है जिसमें सार्वजनिक स्थल प्रबंधन और धार्मिक अधिकारों के बीच संतुलन की माँग की जाती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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