झारखंड भाजपा का CM हेमंत सोरेन के विदेश दौरों पर श्वेत पत्र की मांग, निवेश दावों पर सवाल

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झारखंड भाजपा का CM हेमंत सोरेन के विदेश दौरों पर श्वेत पत्र की मांग, निवेश दावों पर सवाल

सारांश

भाजपा ने CM हेमंत सोरेन के स्वीडन, स्पेन, दावोस और ब्रिटेन दौरों पर हुए खर्च और निवेश दावों का हिसाब माँगा है। टाटा स्टील, इंफोसिस, लुलु समूह समेत दर्जनों कंपनियों के प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतरे — यही विपक्ष का केंद्रीय आरोप है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने 19 मई को रांची में प्रेस वार्ता कर CM हेमंत सोरेन के विदेश दौरों पर श्वेत पत्र की माँग की।
CM सोरेन की स्वीडन, स्पेन, दावोस और ब्रिटेन यात्राओं में हजारों करोड़ के निवेश प्रस्तावों का दावा किया गया था।
फाइरा डी बार्सिलोना के साथ रांची कन्वेंशन सेंटर, बैटरी संयंत्र और इलेक्ट्रिक वाहन प्लांट जैसी परियोजनाएँ कथित तौर पर अटकी हैं।
टाटा स्टील, टेक महिंद्रा, हिताची, इंफोसिस, वेलस्पन, लुलु समूह समेत कई कंपनियों के निवेश प्रस्तावों पर ठोस प्रगति नहीं दिखी।
भाजपा ने दौरों पर हुए खर्च, समझौतों की संख्या और वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की माँग की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरों और उन यात्राओं के दौरान किए गए निवेश संबंधी दावों को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। 19 मई को रांची स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा ने सरकार से विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की माँग की, जिसमें दौरों पर हुए खर्च, हुए निवेश समझौतों और उनकी वर्तमान स्थिति का ब्यौरा हो।

मुख्य आरोप और दावे

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री की स्वीडन, स्पेन, दावोस और ब्रिटेन यात्राओं को हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन से जोड़कर प्रचारित किया गया था। आलोचकों का कहना है कि इन दावों के बावजूद अब तक जमीन पर कोई ठोस औद्योगिक गतिविधि नहीं दिखी है।

शाहदेव के अनुसार, स्पेन की फाइरा डी बार्सिलोना कंपनी के साथ रांची में कन्वेंशन सेंटर बनाने की घोषणा हुई थी, लेकिन कथित तौर पर परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसी तरह बैटरी भंडारण संयंत्र, इलेक्ट्रिक बस और ट्रक प्लांट तथा खेल प्रशिक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर भी कोई प्रगति नहीं दिख रही।

कौन-सी कंपनियाँ थीं दावों में शामिल

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि दावोस दौरे के दौरान टाटा स्टील समेत कई बड़ी कंपनियों के निवेश प्रस्तावों का प्रचार किया गया था। इसके अलावा टेक महिंद्रा, हिताची, इंफोसिस, वेलस्पन और लुलु समूह जैसी कंपनियों के साथ संभावित निवेश समझौतों का उल्लेख किया गया था। जिंदल समूह, उड़ीसा एलॉय, रुंगटा समूह, अमलगम स्टील, अंबुजा सीमेंट और सनशाइन ग्रुप से जुड़े निवेश प्रस्तावों को लेकर भी सरकार ने बड़े दावे किए थे।

शाहदेव ने आरोप लगाया कि इनमें से अधिकांश परियोजनाओं पर न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई और न ही कोई स्पष्ट रोडमैप सामने आया।

रोजगार पर असर का सवाल

भाजपा का तर्क है कि यदि ये निवेश प्रस्ताव वास्तव में धरातल पर उतरते, तो राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़तीं और युवाओं को व्यापक रोजगार मिलता। यह ऐसे समय में उठाया गया सवाल है जब झारखंड में बेरोजगारी एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।

भाजपा की माँग

पार्टी ने राज्य सरकार से माँग की है कि मुख्यमंत्री के विदेशी दौरों पर हुए कुल खर्च, हस्ताक्षरित निवेश समझौतों की संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर एक विस्तृत श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाए। प्रेस वार्ता में भाजपा के सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि राज्य में विपक्षी दल लंबे समय से सरकार की औद्योगिक नीति और निवेश आकर्षण के दावों पर पारदर्शिता की माँग करते आए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनकी कोई समयसीमा नहीं थी। भाजपा की श्वेत पत्र माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन पारदर्शिता की यह माँग जायज भी है — करदाताओं के पैसे से की गई यात्राओं का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। सरकार यदि जवाब नहीं देती, तो यह मुद्दा आगामी राजनीतिक बहसों में और धार पकड़ेगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने झारखंड सरकार से श्वेत पत्र की माँग क्यों की?
भाजपा का आरोप है कि CM हेमंत सोरेन के विदेश दौरों के दौरान हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों और रोजगार सृजन के दावे किए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। पार्टी चाहती है कि दौरों पर हुए खर्च, समझौतों की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
CM सोरेन ने किन देशों की यात्रा की थी और क्या दावे किए गए थे?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वीडन, स्पेन, दावोस (स्विट्ज़रलैंड) और ब्रिटेन की यात्राएँ की थीं। इन दौरों के बाद टाटा स्टील, टेक महिंद्रा, हिताची, इंफोसिस, वेलस्पन और लुलु समूह जैसी कंपनियों के साथ संभावित निवेश समझौतों का प्रचार किया गया था।
कौन-सी परियोजनाएँ अटकी बताई जा रही हैं?
भाजपा के अनुसार, स्पेन की फाइरा डी बार्सिलोना कंपनी के साथ रांची में प्रस्तावित कन्वेंशन सेंटर, बैटरी भंडारण संयंत्र, इलेक्ट्रिक बस और ट्रक प्लांट तथा खेल प्रशिक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर कोई प्रगति नहीं हुई। जिंदल समूह, अंबुजा सीमेंट और सनशाइन ग्रुप से जुड़े प्रस्तावों पर भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
इस विवाद का झारखंड के युवाओं पर क्या असर है?
भाजपा का तर्क है कि यदि ये निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरते तो राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़तीं और युवाओं को रोजगार मिलता। झारखंड में बेरोजगारी पहले से एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा है, इसलिए निवेश के ये अधूरे दावे सीधे रोजगार की उम्मीदों से जुड़े हैं।
भाजपा की ओर से यह माँग किसने उठाई?
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने 19 मई को रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में यह माँग उठाई। इस अवसर पर पार्टी के सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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