18 अगस्त 2026
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मोदी-ओर्पो बैठक: भारत-फिनलैंड 6जी, एआई और परमाणु ऊर्जा में साझेदारी बढ़ाएंगे, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का संकल्प

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मोदी-ओर्पो बैठक: भारत-फिनलैंड 6जी, एआई और परमाणु ऊर्जा में साझेदारी बढ़ाएंगे, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का संकल्प

सारांश

ओस्लो में मोदी-ओर्पो मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — यह भारत-फिनलैंड संबंधों को तकनीक और हरित अर्थव्यवस्था की धुरी पर पुनर्स्थापित करने का प्रयास था। 6जी, एआई और परमाणु ऊर्जा से लेकर सितंबर 2026 में गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की संयुक्त मेज़बानी तक, दोनों देश 2030 तक व्यापार दोगुना करने के साझा लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के PM पेटेरी ओर्पो ने 19 मई 2026 को ओस्लो में द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों देशों ने 6जी, एआई, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्पेस में साझेदारी गहरी करने पर सहमति जताई।
भारत और फिनलैंड सितंबर 2026 में गांधीनगर, गुजरात में वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की संयुक्त मेज़बानी करेंगे।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
फिनलैंड ने तकनीक और इनोवेशन में भारतीय पेशेवरों के योगदान की सराहना की।
दोनों नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र लागू होने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2026 को ओस्लो, नॉर्वे में फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), परमाणु ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

बैठक के प्रमुख बिंदु

बैठक के बाद मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो से मिलकर बहुत खुशी हुई। इस साल भारत और फिनलैंड के बीच बहुत सारे कार्यक्रम हुए हैं। पीएम ओर्पो खुद एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत आए थे। आज हमारी मीटिंग का मकसद दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देना है।' उन्होंने आगे कहा कि दोनों नेताओं ने 6जी, एआई, शिक्षा, न्यूक्लियर ऊर्जा तथा अन्य भविष्य के क्षेत्रों में मिलकर काम करने और जलवायु परिवर्तन, सर्कुलर इकॉनोमी व सतत विकास में जुड़ाव गहरा करने पर विचार-विमर्श किया।

वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की मेज़बानी

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने घोषणा की कि भारत और फिनलैंड मिलकर सितंबर 2026 में गांधीनगर, गुजरात में वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की संयुक्त मेज़बानी करेंगे। यह आयोजन सर्कुलर अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि फिनलैंड इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में गिना जाता है।

व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच संबंध

विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, डिजिटलाइजेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, नवीकरणीय ऊर्जा, इनोवेशन, शिक्षा, मोबिलिटी और लोगों के बीच संबंधों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सामान और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार की निरंतर वृद्धि का स्वागत किया। फिनलैंड ने तकनीकी क्षेत्र की बढ़ोतरी और इनोवेशन में भारतीय पेशेवरों के योगदान की विशेष सराहना की।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध और रणनीतिक महत्व

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र लागू होने की आवश्यकता पर बल दिया। फिनलैंड, यूरोपीय संघ और नॉर्डिक क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। उद्योग, शोध संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी यूरोपीय साझेदारियों को तकनीकी और हरित अर्थव्यवस्था के धरातल पर पुनर्परिभाषित कर रहा है। सितंबर 2026 में गांधीनगर में होने वाला वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम दोनों देशों के बीच इस नई साझेदारी की पहली बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 6जी, क्वांटम और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की घोषणाएं पहले भी होती रही हैं, पर ठोस परियोजनाओं में बदलने की गति अक्सर धीमी रही है। गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की मेज़बानी एक मूर्त कदम है, जो भारत की हरित अर्थव्यवस्था महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर परखेगा। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर जोर देना सामयिक है, लेकिन यह वार्ता वर्षों से लंबित है — फिनलैंड की पैरवी इसे गति दे सकती है, बशर्ते राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों तरफ से बनी रहे।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी और पेटेरी ओर्पो की ओस्लो बैठक में क्या तय हुआ?
19 मई 2026 को ओस्लो में हुई बैठक में भारत और फिनलैंड ने 6जी, एआई, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकॉनोमी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने और सितंबर 2026 में गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम की संयुक्त मेज़बानी की घोषणा की गई।
वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम 2026 कहाँ और कब होगा?
वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमिक फोरम सितंबर 2026 में गांधीनगर, गुजरात, भारत में आयोजित होगा। इसकी संयुक्त मेज़बानी भारत और फिनलैंड करेंगे।
भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार का मौजूदा स्तर क्या है और 2030 का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सामान और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि दर्ज की है। दोनों नेताओं ने 2030 तक मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की प्रतिबद्धता दोहराई, हालांकि मौजूदा व्यापार का सटीक आंकड़ा आधिकारिक बयान में नहीं बताया गया।
भारत-फिनलैंड संबंध यूरोपीय संघ की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
फिनलैंड यूरोपीय संघ और नॉर्डिक क्षेत्र में भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं और दोनों नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र लागू होने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत-फिनलैंड तकनीकी सहयोग में भारतीय पेशेवरों की क्या भूमिका है?
फिनलैंड ने तकनीकी क्षेत्र की बढ़ोतरी और इनोवेशन में भारतीय पेशेवरों के महत्वपूर्ण योगदान की विशेष सराहना की। दोनों देशों ने उद्योग, शोध संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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