पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे में 12 अहम समझौते: ग्रीन पार्टनरशिप से डिजिटल सहयोग तक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे पर 18 मई 2026 को ओस्लो में दोनों देशों के बीच 12 प्रमुख समझौतों पर सहमति बनी, जिनमें ग्रीन ऊर्जा, डिजिटल विकास, स्वास्थ्य, समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इस दौरे पर मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से भी नवाजा गया, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है।
ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप: जलवायु सहयोग की नई बुनियाद
भारत और नॉर्वे के बीच संबंधों को ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक उन्नत करने पर सहमति बनी है। यह साझेदारी जलवायु कार्रवाई, हरित उद्योगों और सर्कुलर अर्थव्यवस्था में सहयोग को संस्थागत रूप देती है। इसके तहत नॉर्वेजियन तकनीक को भारत की विनिर्माण क्षमताओं और बड़े बाज़ार के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे दोनों देशों के हरित परिवर्तन को गति मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि नॉर्वे नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री तकनीक में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है, जबकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है। यह साझेदारी दोनों की पूरक शक्तियों को एकजुट करने का प्रयास है।
समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकॉनमी
नॉर्वे हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में औपचारिक रूप से शामिल हो गया है, जिससे स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की भारत की रणनीतिक कोशिशों को समर्थन मिला है। इसके साथ ही नॉर शिपिंग 2027 में भारत की भागीदारी सुनिश्चित हुई है, जहाँ एक समर्पित इंडिया पवेलियन होगा।
यह समझौता जहाज़ निर्माण, ग्रीन शिपिंग और बंदरगाह अवसंरचना में ज्ञान-साझाकरण का मार्ग प्रशस्त करता है। आलोचकों का कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नॉर्वे जैसे यूरोपीय देशों की भागीदारी चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक स्थिति को मज़बूत करती है।
डिजिटल, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचा सहयोग
भारत-नॉर्वे डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत डिजिटल पब्लिक गुड्स, ओपन डिजिटल इकोसिस्टम और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। यह डिजिटल इंडिया मिशन को वैश्विक विस्तार देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों में भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल को साझा करने के लिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में संयुक्त कार्य समूह (JWG) के माध्यम से संस्थागत सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें चिकित्सा और अनुसंधान संस्थाओं के बीच ज्ञान-साझाकरण और संयुक्त परियोजनाएँ शामिल होंगी। सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता और क्षमता निर्माण के लिए विशेष परामर्श सेवाओं पर भी समझौता हुआ है, जो भारत के राजमार्ग और पर्वतीय अवसंरचना विकास के लिए उपयोगी होगा।
विज्ञान, ऊर्जा और अनुसंधान में साझेदारी
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR), भारत और स्टिफ्टेलसन SINTEF, नॉर्वे के बीच सहयोग समझौते के तहत बायो-बेस्ड मटीरियल्स, महासागर ऊर्जा और कार्बन कैप्चर में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, ऑफशोर पवन और तरंग ऊर्जा तकनीक में संयुक्त कार्य के लिए एक परियोजना-विशिष्ट कार्यान्वयन समझौता भी हुआ।
CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद और नॉर्वे की एमरल्ड जियोमॉडलिंग एएस के बीच वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग पर भी सहमति बनी है, जो बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञता को काम में लाएगी। ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग समझौते के तहत छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों की आवाजाही को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
आगे की राह
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी विदेश नीति में यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देने की कोशिश कर रहा है। इन 12 समझौतों के क्रियान्वयन की समयसीमा और निगरानी तंत्र अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन समझौतों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश संयुक्त परियोजनाओं को ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से आगे बढ़ाते हैं।