पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा: ओस्लो में भारतीय समुदाय उत्साहित, बोले — 'प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मई 2026 को तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ता के लिए नॉर्वे पहुँचे। उनकी इस यात्रा ने ओस्लो में बसे भारतीय प्रवासी समुदाय में उत्साह की लहर पैदा कर दी है — कई सदस्यों ने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जताई है। गौरतलब है कि काफी लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हो रहा है।
भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया
ओस्लो में रहने वाले भारतीय मूल के एक नागरिक ने कहा, 'यह बहुत अच्छा है कि प्रधानमंत्री आ रहे हैं। वे पिछले वर्ष ही आने वाले थे, लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से यात्रा संभव नहीं हो पाई थी। उनके यहाँ आने से हम लोगों को एकजुटता मिलेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा से उन्हें काफी उम्मीदें हैं।
एक अन्य भारतीय प्रवासी ने कहा, 'बहुत वर्षों बाद भारत के प्रधानमंत्री यहाँ आ रहे हैं। यह हमारे लिए और नॉर्वे — दोनों के लिए अच्छा है। हम लोग प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे।' समुदाय के एक और सदस्य ने कहा कि तेल, गैस और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के बीच नॉर्वे भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकता है और प्रधानमंत्री उसी संदर्भ में यहाँ आ रहे हैं।
एक भारतीय प्रवासी ने भावुक होते हुए कहा, '1.5 अरब भारतीयों के प्रतिनिधि का नॉर्वे आना हम सभी के लिए गर्व की बात है। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने का अवसर मिला है।'
उद्योग जगत में भी उत्साह
नॉर्वे की प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनी DNV के भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के कंट्री चेयर अमित मित्तल ने कहा, 'नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर काफी उत्साह है। हम लंबे समय से इस यात्रा का इंतजार कर रहे थे और आखिरकार यह इस साल संभव हो रही है।' यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि यह यात्रा केवल राजनयिक नहीं, बल्कि व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यात्रा का कूटनीतिक महत्व
यह यात्रा तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसमें ऊर्जा, समुद्री व्यापार और हरित तकनीक जैसे क्षेत्रों पर चर्चा अपेक्षित है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है और नॉर्वे — जो दुनिया के प्रमुख तेल व गैस उत्पादकों में से एक है — इस दिशा में एक स्वाभाविक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
आगे क्या
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें होनी हैं। भारतीय समुदाय के साथ संभावित मुलाकात को लेकर भी उत्साह है। यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने का अवसर माना जा रहा है।