जयशंकर ने नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन को दी 212वें संविधान दिवस की शुभकामनाएं, मोदी की ऐतिहासिक यात्रा से पहले
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 17 मई 2025 को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ई दे को देश के 212वें संविधान दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह बधाई ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पाँच देशों की यूरोप यात्रा के तहत 18 मई को ओस्लो पहुँचने वाले हैं।
एक्स पर दी शुभकामनाएं
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा — 'एस्पेन बार्थ ई दे, नॉर्वे की सरकार और वहाँ के लोगों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हम अपने बहुआयामी संबंधों को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हैं।' यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक सहयोग का स्पष्ट संकेत है।
मोदी की ऐतिहासिक नॉर्वे यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की यह नॉर्वे की पहली यात्रा होगी — और पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली आधिकारिक यात्रा भी। वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे के निमंत्रण पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए पहुँचेंगे। इस दौरान वे नॉर्वे के राजा किंग हैरल्ड पंचम और रानी सोन्या से भी मुलाकात करेंगे।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और व्यापार एजेंडा
19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री भाग लेंगे। मोदी और स्टोरे संयुक्त रूप से भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसका मुख्य फोकस व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना होगा।
भारत-नॉर्डिक व्यापार का आकार
नॉर्डिक देश — नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन — भारत के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटलीकरण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार हैं। आँकड़ों के अनुसार, भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जिसमें भारत का निर्यात और आयात दोनों लगभग 9.5 अरब डॉलर के आसपास हैं।
आगे क्या
मोदी की इस यात्रा से भारत-नॉर्डिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। TEPA के क्रियान्वयन पर ठोस प्रगति और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग के नए समझौते इस यात्रा के संभावित परिणामों में शामिल हो सकते हैं।