PM मोदी का स्वीडन दौरा: भारत-यूरोप उद्योग सहयोग को मिलेगी नई रफ्तार, राजदूत अनुराग भूषण का बयान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पाँच देशों के यूरोप दौरे के तहत नीदरलैंड के बाद स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुँचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई ऊँचाई देने के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का गोथेनबर्ग का पहला दौरा है।
दौरे का महत्व और पृष्ठभूमि
राजदूत अनुराग भूषण ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के आमंत्रण पर स्वीडन आए हैं। यह मोदी की स्वीडन की दूसरी यात्रा है — वे पहली बार 2018 में आए थे। भूषण ने कहा कि गोथेनबर्ग, जिसे 1620 में बसाया गया था, आज स्वीडन की तकनीक, उद्योग और नवाचार का केंद्र है और यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय भी निवास करता है।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा, EFTA देशों और ब्रिटेन के साथ भी दो महत्वपूर्ण FTA प्रक्रियाधीन हैं।
द्विपक्षीय बैठकें और यूरोपीय उद्योग जगत से संवाद
राजदूत भूषण के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी स्वीडिश प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन और उनकी नेतृत्व टीम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद वे स्वीडन की व्यापारिक बिरादरी से मुलाकात करेंगे और यूरोपीय राउंडटेबल ऑफ इंडस्ट्री के सदस्यों को संबोधित करेंगे — यह यूरोप की शीर्ष कंपनियों का एक प्रमुख समूह है। भूषण ने कहा कि इस संवाद से भारतीय, स्वीडिश और यूरोपीय उद्योगों के बीच मिलकर काम करने के नए अवसर खुलेंगे।
भारत-स्वीडन आर्थिक साझेदारी की मज़बूत नींव
राजदूत भूषण ने बताया कि भारत और स्वीडन के बीच आर्थिक संबंध पहले से ही काफी गहरे हैं। 300 से अधिक स्वीडिश कंपनियाँ भारत में सक्रिय हैं, जो 4 लाख लोगों को रोज़गार दे रही हैं। वहीं, 75 भारतीय कंपनियाँ स्वीडन में कारोबार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी आर्थिक साझेदारी बहुत जीवंत और सक्रिय है।
इस वर्ष की शुरुआत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में 80 से अधिक स्वीडिश कंपनियों ने भाग लिया था, जो किसी भी देश का दूसरा सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल था। इसमें बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप और मध्यम आकार की कंपनियाँ भी शामिल थीं।
इनोवेशन, ग्रीन टेक और सतत विकास पर फोकस
राजदूत भूषण ने कहा कि 2018 के दौरे के बाद से इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकॉनमी भारत-स्वीडन साझेदारी के केंद्रीय स्तंभ बन गए हैं। स्वीडन इन क्षेत्रों में वैश्विक अग्रणी है, जबकि भारत स्वीडिश कंपनियों को बड़ा बाज़ार और पर्याप्त स्पेस उपलब्ध कराता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरे के बाद एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन टेक्नोलॉजी, सर्कुलर इकॉनमी और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग और गहरा होगा। साथ ही, भारत की स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटीज़ जैसी नीतिगत पहलों में स्वीडिश कंपनियों की रुचि और बढ़ेगी।
आगे क्या
यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राजदूत भूषण ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा स्वीडिश और यूरोपीय उद्योग जगत को भारत में निवेश के नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करेगी। भारत-EU FTA वार्ता की पृष्ठभूमि में यह दौरा व्यापार और निवेश संबंधों को और अधिक संस्थागत रूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।