ग्रीन हाइड्रोजन हब बनेगा भारत: नीदरलैंड से तीन बड़े समझौते, प्रल्हाद जोशी ने गिनाए फायदे

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ग्रीन हाइड्रोजन हब बनेगा भारत: नीदरलैंड से तीन बड़े समझौते, प्रल्हाद जोशी ने गिनाए फायदे

सारांश

पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी — यह भारत की ग्रीन हाइड्रोजन महत्वाकांक्षा का यूरोपीय दरवाज़ा खोलने की कोशिश थी। तीन ठोस समझौतों के साथ भारत ने यूरोप को हाइड्रोजन निर्यातक बनने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 17 मई 2025 को कहा कि नीदरलैंड साझेदारी भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने में मदद करेगी।
PM मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान तीन समझौते हुए — नवीकरणीय ऊर्जा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप, ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप और नीति आयोग-नीदरलैंड ऊर्जा परियोजना करार।
ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप से यूरोपीय बाज़ार में भारतीय हाइड्रोजन निर्यात और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश का रास्ता खुलेगा।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता; वर्तमान क्षमता 250 गीगावाट से अधिक ।
साझेदारी से स्वच्छ ऊर्जा इनोवेशन, निवेश और भारतीय कार्यबल के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 17 मई 2025 को कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नीदरलैंड के साथ हुई साझेदारी भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान हुए समझौते नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन में सहयोग को नई ऊँचाई देंगे।

तीन प्रमुख समझौते: क्या तय हुआ

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच तीन अहम करारों पर सहमति बनी। पहला, दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप गठित करने का निर्णय लिया है। इस मंच के ज़रिए भारत को स्वच्छ ऊर्जा विस्तार के लिए डच तकनीक, विशेषज्ञता और वित्तपोषण हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में भारतीय उद्योग, शोधकर्ताओं और कार्यबल के लिए नए अवसर खुलेंगे।

दूसरा समझौता ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप तैयार करने से जुड़ा है। इससे यूरोपीय बाज़ार में भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात का रास्ता खुलेगा और स्टोरेज व पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश एवं तकनीक आएगी। तीसरा करार नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा क्षेत्र एवं ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर सहयोग का है, जो दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा।

भारत की ग्रीन एनर्जी क्षमता और 2030 का लक्ष्य

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में देश की स्थापित ग्रीन एनर्जी क्षमता 250 गीगावाट से अधिक हो चुकी है — यानी लक्ष्य का आधा रास्ता तय हो चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और यूरोपीय देश आपूर्ति के विश्वसनीय स्रोत तलाश रहे हैं।

साझेदारी का व्यापक महत्व

जोशी के अनुसार, यह साझेदारी सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और पुख्ता करती है। गौरतलब है कि नीदरलैंड यूरोप का एक प्रमुख ऊर्जा व्यापार केंद्र है और रॉटरडैम बंदरगाह हाइड्रोजन आयात का संभावित प्रवेश द्वार माना जाता है। इस नज़रिए से भारत-नीदरलैंड ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप के गठन और रोडमैप के क्रियान्वयन की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा परियोजनाओं पर औपचारिक समझौते के बाद दोनों देशों के बीच निवेश और तकनीकी हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज़ होने की उम्मीद है। भारत की ग्रीन हाइड्रोजन राष्ट्रीय मिशन के तहत यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी घरेलू उत्पादन लागत घटाने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — न कि इरादे की। भारत की ग्रीन हाइड्रोजन राष्ट्रीय मिशन के तहत उत्पादन लागत अभी भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक है, और यूरोप को निर्यात तब तक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं होगा जब तक पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज में ठोस निवेश न आए। ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप का गठन सही दिशा में कदम है, परंतु इसकी समयसीमा और जवाबदेही तंत्र अभी अस्पष्ट हैं। 500 गीगावाट के लक्ष्य का आधा रास्ता तय होना उत्साहजनक है, किंतु हाइड्रोजन को वास्तविक निर्यात उत्पाद बनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय अंतराल को पाटना अभी बाकी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नीदरलैंड ग्रीन हाइड्रोजन साझेदारी क्या है?
यह पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान हुई साझेदारी है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप, ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप और नीति आयोग-नीदरलैंड ऊर्जा परियोजना करार शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित करना और यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच बनाना है।
ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप से भारत को क्या फायदा होगा?
ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप से यूरोप में भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात के लिए बड़ा बाज़ार तैयार होगा। साथ ही स्टोरेज और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी निवेश और तकनीक आएगी, जिससे भारत की वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिति मज़बूत होगी।
नवीकरणीय ऊर्जा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप क्या करेगा?
यह समूह भारत में स्वच्छ ऊर्जा विस्तार के लिए नीदरलैंड से तकनीक, विशेषज्ञता और वित्तपोषण हासिल करने का मंच होगा। इससे ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में भारतीय उद्योग, शोधकर्ताओं और कार्यबल के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारत की मौजूदा नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कितनी है?
वर्तमान में भारत की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 250 गीगावाट से अधिक है। देश ने 2030 तक इसे 500 गीगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच क्या समझौता हुआ?
नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा क्षेत्र एवं ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर सहयोग का करार हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और द्विपक्षीय साझेदारी और मज़बूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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