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भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा: तेजी से न्यायसंगत परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता

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भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा: तेजी से न्यायसंगत परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता

सारांश

भारत के केंद्रीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज और न्यायसंगत बनाने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक नेता बन रहा है।

मुख्य बातें

भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व का महत्व है।
नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार एक प्रमुख उद्देश्य है।
प्रधानमंत्री मोदी की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए निर्धारित लक्ष्य हासिल किए जा रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर आपसी मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज, न्यायसंगत और विकास केंद्रित बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, ताकि इसका लाभ मानवता और पृथ्वी दोनों को मिल सके।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा ठोस कदमों, बड़े लक्ष्यों और समावेशिता पर आधारित है।

जोशी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और इसी के साथ उद्योग, आजीविका और नवाचार को भी ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।"

गुटेरेस ने यह भी उल्लेख किया कि भारत यह साबित कर रहा है कि स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार और औद्योगिक विकास एक साथ संभव है।

उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा, "आइए हम मिलकर जलवायु की आवश्यकता को विकास के अवसर में बदलें और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को लोगों और पृथ्वी के लिए न्यायसंगत और तेज बनाएं।"

इस बीच, भारत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है।

भारत ने 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत तक कम करने, गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत ऊर्जा क्षमता को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने और 2.5 से 3 अरब टन तक का कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इससे पहले, देश ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के लगभग दो-तिहाई लक्ष्य निर्धारित समय से चार साल पहले ही हासिल कर लिए हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में गुटेरेस ने एआई में विभाजन के खतरे की ओर ध्यान दिलाया और बेहतर परिणामों के लिए वैश्विक स्तर पर आपसी मानकों की आवश्यकता बताई।

गुटेरेस ने कहा कि आज के समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग करना कठिन हो गया है।

उन्होंने चेतावनी दी, "तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। यदि कोई साझा आधार नहीं होगा, तो अलग-अलग क्षेत्र और देश विभिन्न नीतियों और तकनीकी मानकों के तहत कार्य करेंगे, जिससे बिखराव बढ़ेगा।"

गुटेरेस ने विज्ञान-आधारित एआई नियमों की भी मांग की, ताकि लोगों की सुरक्षा हो सके और नवाचार को गति मिले। उनके अनुसार, एआई के लिए बनाए गए नियम भरोसा बढ़ाने वाले होने चाहिए और व्यवसायों को स्पष्टता देनी चाहिए ताकि नवाचार सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की आर्थिक विकास के लिए भी एक सकारात्मक पहल है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजना क्या है?
भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजना में 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 45% तक कम करने का लक्ष्य शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण विकास कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्या कहा?
गुटेरेस ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति की सराहना की और इसे औद्योगिक विकास के साथ जोड़ने की बात कही।
भारत का जलवायु परिवर्तन से निपटने का योगदान क्या है?
भारत ने अपने एनडीसी लक्ष्यों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है।
नवाचार को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
गुटेरेस ने एआई के लिए विज्ञान-आधारित नियमों की मांग की है ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले।
राष्ट्र प्रेस
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