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भारत का संकल्प: वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को न्यायसंगत और तेज बनाना - प्रल्हाद जोशी

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भारत का संकल्प: वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को न्यायसंगत और तेज बनाना - प्रल्हाद जोशी

सारांश

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेजी से और न्यायसंगत तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण की भलाई के लिए है, बल्कि लोगों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

भारत का संकल्प स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना है।
गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन के लिए विकास के अवसरों पर जोर दिया।
भारत ने 2030 तक महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
AI में आपसी मानकों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास को एक साथ लाने पर जोर।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज, अधिक न्यायसंगत और विकास केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इसका लाभ मनुष्यों और पृथ्वी दोनों को मिल सके।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को उत्तर देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा ठोस कदमों, बड़े लक्ष्यों और समावेशिता पर आधारित है।

जोशी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और साथ ही उद्योग, आजीविका और नवाचार को भी ऊर्जा दे रहे हैं।"

गुटेरेस ने यह भी कहा था कि भारत यह साबित कर रहा है कि स्वच्छ ऊर्जा का विकास और औद्योगिक प्रगति एक साथ संभव है।

उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा, "आइए, हम मिलकर जलवायु की आवश्यकता को विकास के अवसर में बदलें और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को लोगों और पृथ्वी के लिए न्यायसंगत और तेज बनाएं।"

इस बीच, भारत नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है।

भारत ने 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत तक कम करने, गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत ऊर्जा क्षमता को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने और 2.5 से 3 अरब टन तक का कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य तय किया है।

इस बीच, देश ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के लगभग दो-तिहाई लक्ष्य तय समय से चार साल पहले ही हासिल कर लिए हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में गुटेरेस ने एआई में विभाजन के खतरे की ओर ध्यान दिलाया और बेहतर परिणामों के लिए वैश्विक स्तर पर आपसी मानकों (इंटरऑपरेबिलिटी स्टैंडर्ड) की जरूरत बताई।

गुटेरेस ने कहा कि आज के समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मुश्किल हो गया है।

उन्होंने चेतावनी दी, "तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। अगर कोई साझा आधार नहीं होगा, तो अलग-अलग क्षेत्र और देश अलग नीतियों और तकनीकी मानकों के तहत काम करेंगे, जिससे बिखराव बढ़ेगा।"

उन्होंने कहा कि जब हम सिस्टम की जांच और जोखिम मापने के तरीके पर सहमत होते हैं, तो आपसी तालमेल संभव होता है।

गुटेरेस ने विज्ञान-आधारित एआई नियमों (गार्डरेल्स) की भी मांग की, ताकि लोगों की सुरक्षा हो और नवाचार को गति मिले। उनके अनुसार, एआई के लिए बनाए गए नियम भरोसा बढ़ाने वाले होने चाहिए और व्यवसायों को स्पष्टता देनी चाहिए ताकि नवाचार सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह विकास की नई संभावनाओं को भी खोलेंगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज और न्यायसंगत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत नवीकरणीय ऊर्जा में किस प्रकार का नेतृत्व कर रहा है?
भारत नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भारत के बारे में क्या कहा?
गुटेरेस ने कहा कि भारत यह साबित कर रहा है कि स्वच्छ ऊर्जा का विकास और औद्योगिक प्रगति एक साथ संभव है।
AI में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता क्यों है?
गुटेरेस ने AI में विभाजन के खतरे की ओर ध्यान दिलाया और आपसी मानकों की जरूरत बताई।
राष्ट्र प्रेस
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