कमल हासन की CM विजय से मुलाकात: सरकारी OTT, पाइरेसी रोकने समेत तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए 6 बड़ी मांगें

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कमल हासन की CM विजय से मुलाकात: सरकारी OTT, पाइरेसी रोकने समेत तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए 6 बड़ी मांगें

सारांश

कमल हासन ने CM विजय के सामने तमिल सिनेमा की छह बड़ी चुनौतियाँ रखीं — सरकारी OTT से लेकर पाइरेसी तक। यह मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी; यह एक पूरी इंडस्ट्री की गुहार थी जो थिएटर संकट, डिजिटल चोरी और भारी करों के बोझ तले दबी है।

मुख्य बातें

कमल हासन ने 17 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय से व्यक्तिगत मुलाकात की।
तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए 6 मांगें रखी गईं, जिनमें सरकारी OTT प्लेटफॉर्म की स्थापना सबसे प्रमुख है।
फिल्मों पर लगने वाले 4% मनोरंजन कर को समाप्त करने की माँग की गई।
तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में विशेष एंटी-पाइरेसी टीम बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
थिएटर रिलीज के बाद कम से कम 8 सप्ताह तक OTT पर फिल्म न लाने और प्रतिदिन 5 शो की अनुमति देने की भी मांग शामिल।
मुख्यमंत्री विजय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दिग्गज अभिनेता और मक्कल निधि मैयम के प्रमुख कमल हासन ने 17 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से व्यक्तिगत मुलाकात कर तमिल फिल्म उद्योग की बदहाली और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में कमल हासन ने 6 ठोस मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य सिनेमाघरों से लेकर डिजिटल मंच तक तमिल सिनेमा की संपूर्ण पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करना है।

मुलाकात का संदर्भ और कमल हासन का बयान

कमल हासन ने मुलाकात के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज मैंने तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री विजय से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने तमिलनाडु के विकास के लिए अपने कई सपनों को साझा किया। मुलाकात के दौरान उन्होंने जो विनम्रता और स्नेह दिखाया, उससे मैं गर्व से भर गया।' उन्होंने यह भी कहा कि तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका दाँव पर है और समय रहते सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है।

छह मांगों का विवरण

पहली मांगसरकारी OTT प्लेटफॉर्म की स्थापना। कमल हासन का तर्क है कि ऐसा मंच बनाया जाए जहाँ दर्शक कम कीमत में तमिल फिल्में, स्वतंत्र फिल्में और डॉक्यूमेंट्री देख सकें। इससे छोटे फिल्मकारों और नए कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा और तमिल भाषा व संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

दूसरी मांग — फिल्मों पर लगने वाले 4% मनोरंजन कर को समाप्त करना। उनका कहना है कि फिल्म निर्माण की लागत पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है और थिएटर संचालकों पर बिजली, कर्मचारियों तथा अन्य खर्चों का बोझ भी बढ़ा है। यह कर हटने से निर्माताओं और थिएटर मालिकों दोनों को राहत मिलेगी और नए निवेशक फिल्म निर्माण की ओर आकर्षित होंगे।

तीसरी मांगडिजिटल पाइरेसी पर कठोर कार्रवाई। कमल हासन ने बताया कि फिल्म रिलीज होते ही उसकी अवैध कॉपी इंटरनेट पर उपलब्ध हो जाती है, जिससे पूरी इंडस्ट्री को भारी नुकसान होता है। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में एक विशेष एंटी-पाइरेसी टीम गठित करने की माँग की, जो लीक हुई सामग्री को तत्काल हटाने में सक्षम हो।

चौथी मांग — थिएटरों को प्रत्येक फिल्म के लिए प्रतिदिन 5 शो चलाने की अनुमति। इससे सिनेमाघरों की आय बढ़ेगी और दर्शकों को अधिक विकल्प मिलेंगे।

पाँचवीं मांग — थिएटर रिलीज के बाद कम से कम 8 सप्ताह तक किसी फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म पर न लाया जाए। उनका मानना है कि फिल्मों का जल्दी डिजिटल होना सिनेमाघरों की दर्शक संख्या और राजस्व को सीधे प्रभावित करता है।

छठी मांग — फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजना शुरू करना। कमल हासन ने कहा कि सरकारी समर्थन मिले तो तमिलनाडु एक बार फिर बड़े फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में पर्यटन को भी लाभ मिलेगा।

इंडस्ट्री पर असर और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब तमिल फिल्म उद्योग OTT प्लेटफॉर्मों के तेज विस्तार और थिएटर दर्शकों की घटती संख्या से जूझ रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी तमिल फिल्में थिएटर में अपेक्षित कमाई नहीं कर पाईं, जबकि पाइरेसी की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। कमल हासन की यह पहल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े तकनीशियनों, कलाकारों और थिएटर कर्मियों — सभी के हितों को एक साथ संबोधित करती है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री विजय की ओर से अभी तक इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उद्योग जगत की नजरें अब राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं — खासतौर पर मनोरंजन कर और OTT विंडो जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। कमल हासन ने उम्मीद जताई है कि इन मांगों से इंडस्ट्री को ठोस लाभ मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल राजनीतिक इच्छाशक्ति का है। सरकारी OTT जैसे प्रस्ताव पहले भी कई राज्यों में उठे हैं, मगर क्रियान्वयन की जटिलताओं में दब गए। 4% मनोरंजन कर हटाना राज्य के राजस्व को प्रभावित करेगा, इसलिए सरकार की सहमति आसान नहीं होगी। OTT विंडो की 8 सप्ताह की सीमा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों के व्यावसायिक हितों से सीधे टकराती है, जो बड़े राजनीतिक दबाव समूह हैं। बिना बाध्यकारी नीतिगत ढाँचे के, यह मुलाकात केवल एक सुर्खी बनकर रह सकती है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमल हासन ने CM विजय के सामने कौन-सी 6 मांगें रखीं?
कमल हासन ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए सरकारी OTT प्लेटफॉर्म की स्थापना, 4% मनोरंजन कर समाप्त करना, साइबर क्राइम विभाग में एंटी-पाइरेसी टीम, प्रतिदिन 5 शो की अनुमति, थिएटर रिलीज के 8 सप्ताह बाद OTT विंडो और नई फिल्म निर्माण प्रोत्साहन योजना — ये 6 मांगें रखीं। इन मांगों का उद्देश्य थिएटरों से लेकर डिजिटल मंच तक पूरी इंडस्ट्री को सहारा देना है।
सरकारी OTT प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव क्यों रखा गया?
कमल हासन का मानना है कि एक सरकारी OTT मंच पर कम कीमत में तमिल फिल्में, स्वतंत्र फिल्में और डॉक्यूमेंट्री उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे छोटे फिल्मकारों और नए कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा और तमिल भाषा व संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।
तमिल फिल्मों पर कितना मनोरंजन कर लगता है और इसे हटाने की मांग क्यों?
तमिलनाडु में फिल्मों पर 4% मनोरंजन कर लागू है। कमल हासन का तर्क है कि फिल्म निर्माण और थिएटर संचालन की लागत पहले से काफी बढ़ चुकी है, इसलिए यह कर निर्माताओं और थिएटर मालिकों पर अतिरिक्त बोझ है। इसे हटाने से नए निवेशक भी इंडस्ट्री में आ सकते हैं।
डिजिटल पाइरेसी से तमिल फिल्म इंडस्ट्री को कैसे नुकसान होता है?
फिल्म रिलीज होते ही उसकी अवैध कॉपी इंटरनेट पर उपलब्ध हो जाती है, जिससे थिएटर और वैध डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों की कमाई प्रभावित होती है। कमल हासन ने तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में विशेष एंटी-पाइरेसी टीम बनाने की माँग की है, जो लीक सामग्री को तत्काल हटाए।
OTT विंडो के लिए 8 सप्ताह की सीमा क्यों माँगी गई?
कमल हासन का कहना है कि फिल्मों के जल्दी OTT पर आने से दर्शक थिएटर जाने से बचते हैं, जिससे सिनेमाघरों की आय और दर्शक संख्या दोनों घटती है। थिएटर रिलीज के कम से कम 8 सप्ताह बाद ही OTT पर फिल्म लाने से सिनेमाघरों को पर्याप्त कमाई का अवसर मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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