भारत-ईयू साझेदारी को गहरा बनाने का पक्षधर है पोलैंड: राजदूत स्विटाल्स्की का बड़ा बयान
सारांश
Key Takeaways
- पोलैंड के राजदूत पियोत्र एंटोनी स्विटाल्स्की ने राष्ट्र प्रेस को दिए विशेष साक्षात्कार में भारत-EU साझेदारी को मजबूत करने की वकालत की।
- 2024 में PM मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी शुरू हुई और अब उच्चस्तरीय संपर्क तेज हुए हैं।
- भारत-पोलैंड के बीच वार्षिक व्यापार 6 बिलियन डॉलर है जो राजदूत के अनुसार वास्तविक क्षमता से बहुत कम है।
- पोलैंड अपनी GDP का 5 फीसदी रक्षा पर खर्च कर रहा है और भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग की योजना है।
- EU-भारत FTA के 2025 के अंत तक लागू होने की उम्मीद है जिससे दोनों पक्षों के बीच निवेश और व्यापार में बड़ी वृद्धि संभव है।
- पोलैंड में 20 लाख से अधिक यूक्रेनी शरणार्थी हैं और वह रूस-यूक्रेन युद्ध के शीघ्र न्यायपूर्ण समाधान का पक्षधर है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। भारत में पोलैंड के राजदूत पियोत्र एंटोनी स्विटाल्स्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पोलैंड, यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच संबंधों को हर क्षेत्र में मजबूत करने का दृढ़ समर्थक है। हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है। राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में राजदूत ने रक्षा, निवेश, पश्चिम एशिया संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत तमाम अहम मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
भारत-पोलैंड संबंध: रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा को राजदूत स्विटाल्स्की ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नई शुरुआत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी और अब इसे ठोस रूप देने का काम जारी है।
राजदूत ने यह भी रेखांकित किया कि पोलैंड दुनिया की 20वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसकी GDP 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। वे मानते हैं कि दोनों देशों के बीच 6 बिलियन डॉलर का सालाना व्यापार वास्तविक क्षमता से बहुत कम है और इसे कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
गौरतलब है कि भारत और पोलैंड के बीच वर्षों तक सक्रिय कूटनीतिक और आर्थिक संपर्क सीमित रहा। लेकिन PM मोदी की वारसॉ यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और व्यापारिक वार्ताओं में उल्लेखनीय तेजी आई है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग की असीमित संभावनाएं
राजदूत स्विटाल्स्की ने बताया कि रक्षा क्षेत्र दोनों देशों के बीच सबसे अधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है। पोलैंड अपनी GDP का लगभग 5 फीसदी रक्षा पर खर्च कर रहा है — यह NATO देशों में सर्वाधिक में से एक है — और वह अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से उन्नत कर रहा है।
उन्होंने खुलासा किया कि पोलैंड की कंपनियां न केवल भारत को अपने उत्पाद बेचने में रुचि रखती हैं, बल्कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने और तीसरे देशों में निर्यात करने की भी योजना बना रही हैं। इससे भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति को भी बल मिलेगा।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई भारतीय रक्षा कंपनियों ने पोलैंड में निवेश करने की इच्छा जताई है। यह द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का एक नया और महत्वपूर्ण आयाम है जो पहले कभी नहीं देखा गया।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: जमीन बनाने का अवसर
राजदूत ने भारत-EU FTA को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि इसे 'सीलिंग' नहीं बल्कि 'फर्श' यानी आधार के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह समझौता आर्थिक संबंधों को एक नई गति देगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि FTA साल 2025 के अंत तक लागू हो जाएगा और इसके साथ निवेश संरक्षण से जुड़े कदम भी उठाए जाएंगे। ब्रुसेल्स में यही योजना है, हालांकि वे इसके जल्द लागू होने की संभावना से भी इनकार नहीं करते।
विशेषज्ञों के अनुसार, EU-भारत FTA के लागू होने से पोलैंड जैसे EU सदस्य देशों को भारत के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे भारत में यूरोपीय निवेश की लहर आ सकती है, खासकर तकनीक, रक्षा और विनिर्माण क्षेत्रों में।
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर पोलैंड का रुख
राजदूत स्विटाल्स्की ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है और ऊर्जा कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इस क्षेत्र में अस्थिरता की जड़ बताया और कहा कि पोलैंड किसी भी परिस्थिति में परमाणु ईरान नहीं देखना चाहता।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर राजदूत ने स्पष्ट किया कि पोलैंड यूक्रेन का पूर्ण समर्थन करता है क्योंकि यह युद्ध पोलैंड की अपनी सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि पोलैंड में 20 लाख से अधिक यूक्रेनी शरणार्थी आए हैं जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। इससे पोलैंड के स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने PM मोदी की मध्यस्थता की कोशिशों की सराहना करते हुए कहा कि भारत के नेता — प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री — खाड़ी देशों, अमेरिका और इजरायल के साथ सक्रिय संपर्क में हैं। पोलैंड इन प्रयासों को सकारात्मक दृष्टि से देखता है।
पोलिश नेता की भारत यात्रा और आगे की राह
राजदूत स्विटाल्स्की ने संकेत दिया कि पोलैंड के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा जल्द संभव हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह PM मोदी की पोलैंड यात्रा ने एक नया अध्याय खोला, उसी तरह पोलिश PM की भारत यात्रा संबंधों को और ऊंचाई देगी।
आने वाले महीनों में नए रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर और उत्पादन सुविधाओं के उद्घाटन की उम्मीद है। यदि EU-भारत FTA समयसीमा के भीतर लागू होता है, तो यह दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों में एक नई क्रांति का आगाज हो सकता है।