PM मोदी की 5 देशों की यात्रा: UAE से इटली तक, ऊर्जा-व्यापार-रक्षा में नई साझेदारियों का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई 2026 के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पाँच-देशीय दौरे का उद्देश्य ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक साझेदारियों को और मज़बूत करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंध नए मोड़ पर हैं।
UAE: ऊर्जा सुरक्षा और $101 अरब का व्यापार
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात से करेंगे, जहाँ वे UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि 2014 के बाद से मोदी UAE की सातवीं यात्रा कर रहे हैं, जबकि शेख मोहम्मद भारत की पाँच बार यात्रा कर चुके हैं — जिनमें सबसे हाल की यात्रा जनवरी 2026 में हुई थी।
आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार पहली बार $100 अरब का आँकड़ा पार कर वित्त वर्ष 2025-26 में $101.25 अरब तक पहुँच गया है। जनवरी 2026 में दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को $200 अरब तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा था। UAE भारत का 7वाँ सबसे बड़ा निवेशक है और अब तक $25.19 अरब का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली भी लागू है, जिससे रुपए और दिरहम में व्यापार संभव हो गया है और डॉलर पर निर्भरता कम हुई है।
UAE में रहने वाले भारतीय प्रवासी वहाँ का सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं। उनका कल्याण और निरंतर रेमिटेंस प्रवाह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
नीदरलैंड: सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन और $55 अरब का निवेश
2017 के बाद यह प्रधानमंत्री की नीदरलैंड की दूसरी यात्रा है। नीदरलैंड भारत का दुनिया में 11वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और यूरोप में तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार $27.8 अरब रहा। नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जहाँ से $55.6 अरब का विदेशी निवेश आया है, जबकि भारत से नीदरलैंड में $28 अरब का निवेश हुआ है।
इस यात्रा का एक अहम पड़ाव टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML नीदरलैंड के बीच होने वाला समझौता है, जिसके तहत गुजरात के धोलेरा में बनने वाली सेमीकंडक्टर फैक्ट्री को ज़रूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मिलकर अफस्लुइटडाइक बाँध का भी दौरा करेंगे, जो स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और टिकाऊ मत्स्य पालन पर केंद्रित भारत-नीदरलैंड सहयोग का प्रतीक है। दोनों देशों में 300 से अधिक कंपनियाँ सक्रिय हैं और भारत-ईयू FTA से इस साझेदारी को और गति मिलने की उम्मीद है।
स्वीडन: रक्षा, AI और 6G में रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी आठ साल बाद स्वीडन की यात्रा करेंगे — इससे पहले वे अप्रैल 2018 में पहली भारत-नॉर्डिक शिखर बैठक के लिए स्वीडन गए थे। 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तु और सेवा व्यापार $7.75 अरब तक पहुँच गया है और भारत में 280 से अधिक स्वीडिश कंपनियाँ काम कर रही हैं।
रक्षा क्षेत्र में स्वीडन की कंपनी साब (SAAB) हरियाणा के झज्जर में भारत के बाहर अपनी पहली कार्ल-गुस्ताफ हथियार निर्माण फैक्ट्री बना रही है — यह भारत का पहला ऐसा रक्षा प्रोजेक्ट है जिसमें 100% FDI शामिल है। तकनीक के मोर्चे पर दोनों देशों के बीच 'स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी और AI कॉरिडोर' समझौता हुआ है, जिसमें 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और जीवन विज्ञान पर काम होगा। AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 80 से अधिक स्वीडिश कंपनियों ने हिस्सा लिया। मार्च 2025 में महाराष्ट्र और कैन्डेला के बीच हुए समझौते से स्वीडिश इलेक्ट्रिक बोट्स में ₹1,990 करोड़ का निवेश हुआ है।
नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक द्विपक्षीय यात्रा और TEPA समझौता
प्रधानमंत्री मोदी की ओस्लो यात्रा इस दौरे का सबसे ऐतिहासिक पड़ाव है — 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की यह पहली अलग द्विपक्षीय यात्रा है। इस दौरे में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भी होगा, जो स्टॉकहोम 2018 और कोपेनहेगन 2022 के बाद आयोजित हो रहा है।
व्यापार के मोर्चे पर भारत और EFTA देशों के बीच TEPA (व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता) 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो गया है — यह भारत का विकसित यूरोपीय देशों के साथ पहला ऐसा मुक्त व्यापार समझौता है, जिसके तहत 15 साल में $100 अरब का निवेश और 10 लाख सीधे रोज़गार का लक्ष्य है। नॉर्वे का GPFG — दुनिया का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड, जिसकी कुल कीमत लगभग $2 ट्रिलियन है — में से करीब $30 अरब का निवेश भारत के बाज़ारों में किया गया है।
समुद्री सहयोग में कोचीन शिपयार्ड नॉर्वे के लिए पर्यावरण-अनुकूल जहाज़ बना रहा है और भारतीय शिपयार्ड नॉर्वे शिपओनर्स एसोसिएशन की ऑर्डर बुक का लगभग 11% हिस्सा संभाल रहे हैं। जून 2025 में GRSE और Kongsberg Maritime के बीच हुए समझौते से भारत का पहला स्वदेशी पोलर रिसर्च जहाज़ बनेगा। इसरो के स्वालबार्ड स्थित एंटेना 2026 से काम करना शुरू करेंगे।
इटली: IMEEC, टाटा-इवेको और €20 अरब का व्यापार लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी 19 से 21 मई 2026 को इटली का दौरा करेंगे, जहाँ वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर जाएंगे। यह यात्रा 2025-29 की संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना के तहत हो रही है। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार $16.77 अरब रहा और 2029 तक इसे €20 अरब तक ले जाने का लक्ष्य है।
टाटा मोटर्स द्वारा इवेको ग्रुप का €3.8 अरब में अधिग्रहण अब तक का भारत का इटली में सबसे बड़ा निवेश है। इटली IMEEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) का संस्थापक सदस्य है और Sparkle-Airtel Blue-Raman सबमरीन केबल के ज़रिए जेनोआ तक कनेक्टिविटी शुरू हो चुकी है। इटली ने नई दिल्ली में Simest ऑफिस खोला है, जिसमें €500 मिलियन की फंडिंग लाइन है, और SACE ने SMEs के लिए €200 मिलियन की अतिरिक्त सहायता दी है। भारत-ईयू FTA के बाद दोनों देशों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
यह पाँच-देशीय यात्रा भारत की बहु-आयामी विदेश नीति का प्रतिबिंब है — आने वाले हफ्तों में इन समझौतों के क्रियान्वयन की दिशा तय करेगी कि ये घोषणाएँ ज़मीन पर कितना बदलाव लाती हैं।